बॉलीवुड : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर आज 71 साल के हो गए हैं। करीब चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने 500 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और अपनी प्रतिभा से हिंदी सिनेमा में एक अलग पहचान बनाई। लेकिन यह चमकदार सफलता आसान नहीं थी। संघर्ष, बीमारी, आर्थिक संकट और असफलताओं के कई दौर से गुजरने के बाद अनुपम खेर आज उस मुकाम पर पहुंचे हैं, जहां उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में गिना जाता है।
छोटे शहर से बड़े सपनों की शुरुआत
आपको बता दें कि 7 मार्च 1955 को हिमाचल प्रदेश के शिमला में एक कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मे अनुपम खेर के पिता पुष्कर नाथ खेर वन विभाग में क्लर्क थे और मां दुलारी खेर गृहिणी थीं। साधारण परिवार से आने वाले अनुपम खेर ने बचपन से ही अभिनय में रुचि दिखाई। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अभिनय की पढ़ाई के लिए नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया। यहीं से उनके अभिनय सफर की असली शुरुआत हुई।
28 साल की उम्र में निभाया बुजुर्ग का किरदार
गौरतलब है कि मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें पहली बड़ी पहचान 1984 की फिल्म “सारांश” से मिली। इस फिल्म में उन्होंने एक बुजुर्ग पिता का किरदार निभाया, जबकि उस समय उनकी उम्र सिर्फ 28 साल थी। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म की तैयारी उन्होंने लगभग छह महीने तक की थी, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब उनका रोल किसी दूसरे अभिनेता को दिए जाने की बात होने लगी। निराश होकर उन्होंने फिल्म के निर्देशक महेश भट्ट से जाकर नाराजगी जताई। लेकिन उनकी ईमानदारी और आत्मविश्वास देखकर महेश भट्ट ने फैसला बदल दिया और वही किरदार अनुपम खेर को दिया गया। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी हिट न रही हो, लेकिन अनुपम खेर की एक्टिंग ने सबका दिल जीत लिया और उन्हें बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। यहीं से उनके शानदार करियर की शुरुआत हुई।
500 से ज्यादा फिल्मों का सफर
विदित है कि इसके बाद अनुपम खेर ने बॉलीवुड में हर तरह के किरदार निभाए; कॉमेडी, विलेन और गंभीर चरित्र भूमिकाएं।
उनकी यादगार फिल्मों में शामिल हैं:
कर्मा
तेजाब
राम लखन
चालबाज
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे
हम आपके हैं कौन..!
कुछ कुछ होता है
ए वेडनसडे
एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी
द कश्मीर फाइल्स
अपने करियर में वह 500 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं।
रिकॉर्ड फिल्मफेयर अवॉर्ड
अनुपम खेर के नाम फिल्मफेयर में बेस्ट कॉमेडियन कैटेगरी में सबसे ज्यादा पांच बार जीतने का रिकॉर्ड है। उन्होंने राम लखन (1989), लम्हे (1991), खेल (1992), डर (1993), दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे (1995) फिल्मों के लिए पुरस्कार जीता। खास बात यह है कि उन्होंने लगातार तीन साल तक यह अवॉर्ड जीतकर एक नया रिकॉर्ड बनाया था।
जब खाते में सिर्फ 400 रुपये बचे
अनुपम खेर के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब वह लगभग आर्थिक रूप से टूट चुके थे। करीब 2004 के आसपास उन्होंने एक बड़ा टीवी प्रोडक्शन हाउस खड़ा करने का सपना देखा और इसके लिए भारी कर्ज लिया। लेकिन प्रोजेक्ट्स उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हुए। हालात इतने खराब हो गए कि उनके बैंक खाते में सिर्फ 400 रुपये ही बच गए थे। उन्हें अपना घर और ऑफिस तक गिरवी रखना पड़ा। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी। दोबारा मेहनत शुरू की और फिल्मों में काम करके धीरे-धीरे इस संकट से बाहर निकल आए।
चेहरे पर लकवा, फिर भी नहीं रोकी शूटिंग
करियर के सुनहरे दौर में ही अनुपम खेर को एक बड़ी बीमारी का सामना करना पड़ा। उन्हें अचानक फेशियल पैरालिसिस (चेहरे पर लकवा) हो गया। डॉक्टरों ने उन्हें कम से कम दो महीने तक आराम करने की सलाह दी थी। लेकिन उसी समय फिल्म “हम आपके हैं कौन” की शूटिंग चल रही थी। अनुपम खेर ने फैसला किया कि वह डरकर घर नहीं बैठेंगे। उन्होंने बीमारी के बावजूद शूटिंग जारी रखी।
हॉलीवुड में भी बनाई पहचान
आपको बता दें कि अनुपम खेर ने हॉलीवुड में भी काम किया। फिल्म “Silver Linings Playbook” में उन्होंने हॉलीवुड स्टार रॉबर्ट डी नीरो और ब्रैडली कूपर के साथ अभिनय किया।
आज भी एक्टिंग में सक्रिय
गौरतलब है कि 71 साल की उम्र में भी अनुपम खेर लगातार फिल्मों में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर की 550वीं फिल्म “खोसला का घोसला 2” की शूटिंग शुरू कर दी है।
अनुपम खेर की जिंदगी संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास की मिसाल है। चेहरे पर लकवा, आर्थिक संकट और असफलताओं के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। इसी जज्बे ने उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल कर दिया।