‘घूसखोर पंडित’ फ़िल्म पर देशभर में हंगामा जारी!: CM के निर्देश पर FIR, तो ब्रज के सन्त समाज ने पीएम को लिखी चिट्ठी? वहीं डायरेक्टर... पूरा मामला_एक नज़र
‘घूसखोर पंडित’ फ़िल्म पर देशभर में हंगामा जारी!

मनोरंजन/लखनऊ/मथुरा : मनोरंजन की दुनिया की एक नई फिल्म रिलीज से पहले ही सियासी-धार्मिक तूफान में घिर गई है। अभिनेता मनोज बाजपेयी की आने वाली थ्रिलर “घूसखोर पंडित” का टीज़र सामने आते ही ऐसा बवाल मचा कि मामला अदालत, पुलिस और संत समाज तक पहुंच गया। लखनऊ में केस दर्ज हुआ, ब्रज में संतों ने मोर्चा खोल दिया और प्रधानमंत्री तक पत्र भेजकर फिल्म पर रोक लगाने की मांग कर दी गई। आखिर एक फिल्म के नाम ने इतना बड़ा विवाद कैसे खड़ा कर दिया आइए पूरा मामला आसान भाषा में समझते हैं

विवाद की शुरुआत; सिर्फ एक शब्द से भड़की आग :

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि मुंबई में एक इवेंट के दौरान फिल्म का टीज़र लॉन्च हुआ। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अफसर अजय दीक्षित का रोल निभा रहे हैं, जिसका निकनेम “पंडित” है। यहीं से विवाद शुरू हो गया। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि “पंडित” एक धार्मिक-सामाजिक पहचान है, उसे “घूसखोर” शब्द के साथ जोड़ना पूरे समुदाय का अपमान है। मुंबई के एक वकील ने तुरंत लीगल नोटिस भेज दिया और कहा कि मनोरंजन के नाम पर किसी जाति की छवि खराब नहीं की जा सकती।

लखनऊ में FIR; मामला कानून तक पहुँचा :

गौरतलब है कि विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाने में फिल्म के मेकर्स और टीम के खिलाफ मामला दर्ज हो गया।

आरोप क्या हैं?

आपको बता दें कि फ़िल्म मेकर पर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप है जिससे सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की आशंका जताई गई है वहीं फ़िल्म के शीर्षक को आपत्तिजनक बताया गया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और प्रमोशन रोक दिया गया।

ब्रज में संतों का विरोध; पीएम को पत्र :

विदित है कि मथुरा-वृंदावन में मामला और गरम हो गया। संत समाज ने इसे ब्राह्मण समाज का अपमान बताया। उनकी मांग है कि फिल्म पर तुरंत बैन लगे, डायरेक्टर-प्रोड्यूसर पर देशद्रोह केस हो। संतों का कहना है कि फिल्मों के जरिए जानबूझकर धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाया जा रहा है और इससे समाज में वैमनस्य फैल सकता है।

मेकर्स की सफाई; “किसी धर्म से लेना-देना नहीं” :

विदित है कि फिल्म के लेखक-निर्माता ने बयान जारी कर कहा यह पूरी तरह काल्पनिक कहानी है, “पंडित” सिर्फ किरदार का निकनेम है। किसी जाति या धर्म पर टिप्पणी नहीं। विवाद बढ़ने के बाद मेकर्स ने सभी प्रमोशनल मटेरियल हटाने का फैसला भी किया

असली टकराव; अभिव्यक्ति बनाम आस्था :

गौरतलब है कि यह विवाद सिर्फ एक फिल्म का नहीं रह गया, बल्कि बड़ा सवाल बन गया है कि क्या कला को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए या सामाजिक-धार्मिक पहचान पर सीमा होनी चाहिए? फिलहाल केस चल रहा है, विरोध जारी है और फिल्म की रिलीज अनिश्चितता में है

यह विवाद सिर्फ एक फिल्म के शीर्षक से बड़ा होकर कला की स्वतंत्रता, सामाजिक संवेदनशीलता और धार्मिक भावनाओं के बीच के जटिल संबंधों पर बहस छेड़ रहा है। जहां एक ओर अभिव्यक्ति की आजादी का सवाल है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सद्भाव की जिम्मेदारी भी है। अब यह देखना होगा कि कानून, समाज और मनोरंजन उद्योग इस चुनौती का समाधान कैसे निकालते हैं।

अन्य खबरे