देहरादून: उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और अहम बदलाव सामने आया है। राज्य सरकार ने सरकारी और निजी, दोनों तरह के स्कूलों के समय में संशोधन कर दिया है। नए आदेश के लागू होते ही पूरे प्रदेश में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह फैसला बच्चों के हित में है या उनकी परेशानी बढ़ाने वाला?
नया टाइम टेबल: अब ऐसे चलेगा स्कूल
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार अब पूरे राज्य में सीजन के हिसाब से स्कूलों का समय तय किया गया है
गर्मियों में:
•स्कूल शुरू: सुबह 7:45 बजे
•प्रार्थना सभा: 7:45 से 8:05 बजे
•पहली कक्षा: 8:05 से 8:45
•छुट्टी: दोपहर 2:05 बजे
सर्दियों में:
•स्कूल शुरू: सुबह 8:50 बजे
•प्रार्थना सभा: 8:50 से 9:10 बजे
•छुट्टी: 3:10 बजे
सरकार का कहना है कि यह बदलाव पढ़ाई के समय को व्यवस्थित करने और मौसम के अनुसार संतुलन बनाने के लिए किया गया है।
लेकिन क्यों मचा है विवाद?
गौरतलब है कि इस फैसले के बाद शिक्षा जगत में असहमति भी खुलकर सामने आई है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के शिक्षकों का तर्क है कि गर्मियों में स्कूल समय बढ़ाकर 1 घंटे से ज्यादा कर दिया गया, छोटे बच्चों के लिए सुबह जल्दी उठना और लंबे समय तक स्कूल में रहना मुश्किल है।
मैदानी और पहाड़ी इलाकों की अलग चुनौती:
गौरतलब है कि कई बच्चे कई किलोमीटर पैदल स्कूल पहुंचते हैं। पहाड़ों में सुबह जल्दी निकलना और गर्मियों में तेज धूप में लौटना कठिन होता है।
बच्चों पर क्या होगा असर?
विदित है कि यह बदलाव सिर्फ टाइमिंग का नहीं, बल्कि बच्चों की पूरी दिनचर्या को प्रभावित करेगा। सुबह जल्दी उठने का दबाव, लंबे समय तक स्कूल में रहने से थकान से पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आने-जाने की समस्या भी है।
सरकार का तर्क बनाम जमीनी हकीकत
आपको बता दें कि सरकार का दावा है कि पढ़ाई का समय बेहतर तरीके से उपयोग होगा और मौसम के अनुसार छात्रों को राहत मिलेगी, लेकिन जमीनी स्तर पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या सभी क्षेत्रों के लिए एक ही टाइमिंग सही है? क्या बच्चों की सुविधा और दूरी को ध्यान में रखा गया? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नया टाइम टेबल बच्चों की पढ़ाई को मजबूत करेगा या उनकी रोजमर्रा की मुश्किलें बढ़ा देगा।
उत्तराखंड में स्कूल टाइमिंग का यह बदलाव एक बड़ा प्रशासनिक फैसला जरूर है, लेकिन इसका असली असर आने वाले दिनों में दिखेगा। फिलहाल अभिभावक, शिक्षक और छात्र, तीनों ही इस बदलाव को लेकर असमंजस में हैं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस पर कोई संशोधन करती है या नहीं।