लखनऊ/शिक्षा : उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा और तकनीकी बदलाव होने जा रहा है। अब राज्य के लगभग सभी विश्वविद्यालयों में पारंपरिक परीक्षा प्रणाली की जगह हाईटेक मॉडल लागू होगा। राज्यपाल सचिवालय ने Dr. A.P.J. Abdul Kalam Technical University (AKTU) मॉडल को हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
क्या बदलेगा? परीक्षा का पूरा सिस्टम होगा हाईटेक
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि नई व्यवस्था लागू होते ही प्रश्नपत्र अब ऑनलाइन भेजे जाएंगे, परीक्षा केंद्र पर ही पेपर प्रिंट होगा, कॉपियों का डिजिटल मूल्यांकन होगा और सभी केंद्रों पर CCTV निगरानी अनिवार्य होगी। साथ ही परीक्षार्थियों की बायोमैट्रिक उपस्थिति होगी। यानी पूरी परीक्षा प्रक्रिया अब तकनीक के जरिए कंट्रोल होगी।
पारदर्शिता के लिए हाई सिक्योरिटी सिस्टम
गौरतलब है कि नई व्यवस्था में गड़बड़ी रोकने के लिए खास इंतजाम किया गया है। कॉपियों पर बारकोड और QR कोड लगा रहेगा। हर उत्तर पुस्तिका को डमी नंबर मिलेगा। परीक्षक को ऑनलाइन ही कॉपी, प्रश्नपत्र और आंसर की उपलब्ध होगा। इससे कॉपी बदलने, गुम होने या नंबर में हेरफेर जैसी समस्याएं लगभग खत्म हो जाएंगी।
सरकार का दावा: करोड़ों की बचत
इस नए सिस्टम से पेपर प्रिंटिंग का खर्च घटेगा, ट्रांसपोर्टेशन का खर्च खत्म होगा और मूल्यांकन प्रक्रिया तेज और सस्ती होगी। यानी सरकार को हर साल करोड़ों रुपये की बचत होने की उम्मीद है।
नकल, पेपर लीक और ‘मुन्ना भाई’ पर सख्त वार
आपको बता दें कि यह बदलाव सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि सख्ती भी लाएगा। इससे पेपर लीक की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी। फर्जी परीक्षार्थियों पर रोक लगेगी। और नकल माफिया पर कड़ा नियंत्रण लगेगा। पहली बार तकनीक सीधे परीक्षा ईमानदारी की निगरानी करेगी।
किन पर लागू होगा ये नियम?
विदित है कि प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में लागू होगा। लेकिन कृषि और चिकित्सा विश्वविद्यालय फिलहाल इससे बाहर होंगे।
यूपी की परीक्षा व्यवस्था अब डिजिटल युग में प्रवेश कर रही है। उत्तर प्रदेश में यह बदलाव सिर्फ सिस्टम सुधार नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा संस्कृति बदलने की शुरुआत है। अब छात्र की मेहनत ही उसकी असली पहचान बनेगी क्योंकि सिस्टम में हेरफेर की गुंजाइश लगभग खत्म होने जा रही है।