अब सिर्फ 15 घंटे में तय होगा दिल्ली से नार्थ-ईस्ट तक का सफर!: निर्मित होगा यूपी-हरियाणा समेत देश के इन 8 राज्यों को जोड़ने वाला देश का नया महाएक्सप्रेसवे...पूरा रूट_एक नज़र
अब सिर्फ 15 घंटे में तय होगा दिल्ली से नार्थ-ईस्ट तक का सफर!

नई दिल्ली: देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क तेजी से विस्तार ले रहा है। इसी कड़ी में प्रस्तावित अंबाला-शामली-गोरखपुर-सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है। अलग-अलग एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के जुड़ने से तैयार होने वाला यह लंबा हाई-स्पीड नेटवर्क उत्तर भारत को पूर्वी भारत और सिलीगुड़ी से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस कॉरिडोर से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों को तेज सड़क संपर्क मिलने की उम्मीद है। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच सड़क यात्रा का समय मौजूदा लगभग 28-32 घंटे से घटकर करीब 15-16 घंटे तक आने का अनुमान बताया जा रहा है।

तीन बड़े एक्सप्रेसवे मिलकर बनाएंगे लंबा कॉरिडोर

आपको बता दें कि इस प्रस्तावित नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी तीन प्रमुख एक्सप्रेसवे परियोजनाएं हैं। अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे करीब 122 किलोमीटर लंबा होगा। यह हरियाणा के अंबाला को उत्तर प्रदेश के शामली से जोड़ेगा। इससे पंजाब, हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले वाहनों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर जाने के लिए बेहतर संपर्क मिल सकता है।
दूसरी महत्वपूर्ण परियोजना शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे है, जिसकी लंबाई करीब 740 किलोमीटर बताई जा रही है। इसके बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वी उत्तर प्रदेश तक तेज सड़क संपर्क विकसित होगा। यह यूपी के कई जिलों के लिए महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग बन सकता है।
तीसरी कड़ी गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे होगी। करीब 519 किलोमीटर लंबे इस मार्ग से गोरखपुर को उत्तर बिहार होते हुए सिलीगुड़ी से जोड़ने की योजना है।

दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर होगा तेज

गौरतलब है कि कि इस पूरे नेटवर्क का सबसे बड़ा असर लंबी दूरी की यात्रा पर देखने को मिल सकता है। प्रस्तावित कॉरिडोर के कारण दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर करीब 15-16 घंटे में पूरा होने का अनुमान है। इसी तरह शामली से गोरखपुर के बीच यात्रा का समय करीब 14-15 घंटे से घटकर लगभग 7-8 घंटे तक आने की उम्मीद जताई जा रही है। गोरखपुर से सिलीगुड़ी का सफर भी करीब 15-18 घंटे से घटकर लगभग 7-7.5 घंटे तक हो सकता है।

किन इलाकों को मिलेगा फायदा?

इस नेटवर्क से हरियाणा के अंबाला, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर जैसे क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज के जरिए दिल्ली और एनसीआर को भी इस नेटवर्क से जोड़ने की योजना महत्वपूर्ण होगी। उत्तर प्रदेश में शामली से गोरखपुर के बीच आने वाले कई जिलों को हाई-स्पीड सड़क संपर्क मिलेगा। वहीं बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्से में अररिया और किशनगंज जैसे क्षेत्रों के लिए भी बेहतर कनेक्टिविटी विकसित होने की उम्मीद है। सिलीगुड़ी इस पूरे नेटवर्क का अहम अंतिम सिरा होगा। यह क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश मार्ग के रूप में महत्वपूर्ण है।

दिल्ली के ट्रैफिक को भी मिल सकती है राहत

विदित है कि इस कॉरिडोर का एक संभावित फायदा यह भी है कि पंजाब, हरियाणा और उत्तर भारत से पूर्वी भारत की ओर जाने वाले वाहनों को दिल्ली के भीतर से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है। इससे लंबी दूरी के यातायात के लिए वैकल्पिक हाई-स्पीड मार्ग उपलब्ध होगा। इसके साथ ही बेहतर सड़क संपर्क से माल ढुलाई, औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्रीय व्यापार को भी गति मिलने की संभावना है।

हालांकि, परियोजनाओं की वास्तविक समयसीमा, निर्माण की प्रगति और अंतिम मार्ग संबंधित सरकारी स्वीकृतियों एवं निर्माण चरणों पर निर्भर करेंगे। कुल मिलाकर, अंबाला से सिलीगुड़ी तक विकसित होने वाला यह नेटवर्क उत्तर भारत से पूर्वी भारत तक सड़क कनेक्टिविटी का एक बड़ा नया अध्याय बन सकता है।

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