15 अक्टूबर से UPI नियमों में बड़ा बदलाव!: UPI पेमेंट्स पर चार्ज लगाने की पूरी तैयारी, वही 2000 रूपये तक की ख़रीदारी समेत ये 7 तरह के ट्रांजैक्शन रहेंगे शुल्क मुक्त?
15 अक्टूबर से UPI नियमों में बड़ा बदलाव!

नई दिल्ली : UPI से भुगतान करने वालों के लिए अक्टूबर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। 15 अक्टूबर 2026 से प्रस्तावित नए MDR फ्रेमवर्क के तहत ₹2000 के ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शंस पर MDR यानी Merchant Discount Rate लागू होगा। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आम लोगों को हर UPI भुगतान पर अलग से शुल्क देना पड़ेगा। कई तरह के रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान जीरो MDR के दायरे में रखे जाने की बात कही गई है।

क्या हैं MDR?

MDR वह शुल्क है जो मर्चेंट भुगतान स्वीकार करने के दौरान भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों को देता है। यह ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला UPI चार्ज नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था में मर्चेंट कैटेगरी और भुगतान की राशि के आधार पर MDR तय होने की बात कही गई है।

इन 7 तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर नहीं लगेगा MDR

1. P2P ट्रांसफर पर कोई MDR नहीं

आपको बता दें कि अगर आप अपने दोस्त, रिश्तेदार या किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में UPI से पैसे भेजते हैं, तो इस तरह के Person-to-Person यानी P2P ट्रांसफर पर MDR नहीं लगेगा। राशि कितनी भी हो, यह श्रेणी जीरो MDR में रहेगी।

2. UPI से पैसे रिसीव करने पर भी शुल्क नहीं

गौरतलब है कि किसी व्यक्ति के बैंक खाते में UPI के जरिए पैसा आने पर भी MDR नहीं लगेगा। यानी सिर्फ पैसे प्राप्त करने के लिए ग्राहक को कोई MDR नहीं देना होगा।

3. छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत

P2PM यानी छोटे मर्चेंट की श्रेणी में आने वाले कारोबारियों के लिए भी जीरो MDR की व्यवस्था जारी रहने की बात कही गई है। निर्धारित सीमा के भीतर आने वाले ऐसे भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।

4. ₹2,000 तक की छोटी खरीदारी

विदित है कि रोजमर्रा की छोटी खरीदारी करने वालों के लिए भी राहत है। प्रस्तावित फ्रेमवर्क में ₹2,000 तक के P2M यानी Person-to-Merchant भुगतान को जीरो MDR के दायरे में रखने की बात कही गई है।

5. ₹2,000 तक के भुगतान पर ग्राहक से अलग चार्ज नहीं

स्टैंडर्ड मर्चेंट के यहां भी ₹2,000 तक की खरीदारी पर MDR नहीं लगेगा। वहीं इससे अधिक राशि के कुछ मर्चेंट भुगतान पर MDR लागू हो सकता है, लेकिन इसका भार ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होने की बात कही गई है।

6. UPI AutoPay रहेगा MDR फ्री

सब्सक्रिप्शन, बिल और दूसरी नियमित सेवाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले UPI AutoPay पर भी MDR नहीं लगेगा। यानी ऑटोमैटिक पेमेंट सेट करने वाले यूजर्स के लिए इस व्यवस्था से सीधे अतिरिक्त UPI शुल्क की बात नहीं है।

7. जरूरी सेवाओं के भुगतान पर राहत

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक क्षेत्रों में निर्धारित सीमा तक के भुगतान को भी जीरो MDR के दायरे में रखने का प्रावधान बताया गया है।

सबसे जरूरी बात कि ग्राहक से कौन लेगा पैसा?

नए MDR फ्रेमवर्क का सबसे अहम पहलू यही है। MDR लागू होने का अर्थ यह नहीं है कि दुकानदार हर UPI भुगतान पर ग्राहक से अलग पैसा मांग सकता है। दिए गए विवरण के अनुसार बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि MDR का बोझ ग्राहक पर ट्रांसफर न किया जाए। UPI ऐप प्रदाताओं को भी छिपे हुए प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी।

UPI का इस्तेमाल देश में बड़े पैमाने पर होता है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24.51 अरब (2,450.90 करोड़) लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹29.82 लाख करोड़ रही। इसलिए 15 अक्टूबर से जुड़ा MDR बदलाव आम ग्राहकों के लिए समझना जरूरी है। UPI पर MDR लागू होने और ग्राहक से UPI चार्ज वसूले जाने; इन दोनों को एक ही बात नहीं समझना चाहिए।

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