लाइफस्टाइल: घर खरीदने और किराए पर रहने के पुराने समीकरण में अब एक नई दिशा चल रही है। बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें, होम-लोन की भारी ईएमआई, छू छूत करियर और जीवनशैली विकल्पों की विविधता ने यह सवाल फिर से जोर से खड़ा कर दिया है: क्या आज घर खरीदना समझदारी भरा विकल्प है, या किराए पर रहना सही फैसला हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि आपकी करियर की शुरुआत हो रही है, आप अक्सर शहर बदलते रहते हैं, बचत कम है या आप लचीलापन चाहते हैं तो किराए पर रहना न सिर्फ विकल्प हो सकता है, बल्कि बेहतर विकल्प भी हो सकता है।
क्यों आज renting स्मार्ट ऑप्शन बन रहा है?
कम प्रारंभिक निवेश का बोझ
घर खरीदने के लिए आपको डाउन-पेमेंट, स्टाम्प-ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन-फीस, फर्निशिंग आदि के बड़े खर्च उठाने पड़ते हैं। जबकि किराए पर रहने में मुख्य रूप से सिक्योरिटी-डिपॉजिट देना होता है, जो आमतौर पर वापस भी हो जाता है। इसका मतलब है प्रारंभ में भारी निवेश नहीं, और आपके पास पैसे की गतिविधि (इंवेस्टमेंट) के लिए ज्यादा विकल्प खुलते हैं।
मरम्मत-रख-रखाव का बोझ कम
जब आप किराए पर रहते हैं तो संपत्ति की बड़ी मरम्मत, फर्श-दीवारों की बड़ी रिपेयर आदि अक्सर मालिक की जिम्मेदारी होती हैं। इस तरह आपके मासिक बजट पर मेंटेनेंस का दबाव कम होता है।
वित्तीय फ्लेक्सिबिलिटी और निवेश का अवसर
घर खरीदने में बहुत सारा राशि लंबी अवधि के लिए बंध जाती है (डाउन-पेमेंट + ईएमआई)। लेकिन किराए पर रहने से यह राशि आप अन्य निवेश विकल्पों में लगा सकते हैं, जैसे म्यूचुअल फंड, एफडी या स्टार्ट-अप में, जहाँ बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना हो सकती है।
नौकरी-स्थानांतरण और अतिरिक्त लचीलापन
अगर आप अभी करियर के शुरुआती चरण में हैं या नौकरी के चलते शहर बदलने की संभावना है तो किराए पर रहने से स्थान बदलने का निर्णय आसान होता है। घर बेचने-खरीदने जैसी बड़ी प्रक्रिया में नहीं पड़ना पड़ता।
टैक्स लाभ और अन्य खर्चों से मुक्ति
किराए पर रहने वालों के लिए House Rent Allowance (HRA) के माध्यम से टैक्स छूट संभव है। वहीं, घर खरीदने वालों को प्रॉपर्टी टैक्स, रख-रखाव शुल्क व अन्य अप्रत्याशित खर्च झेलने पड़ सकते हैं।
लेकिन घर खरीदने के भी हैं ठोस कारण
यह कहना सही नहीं होगा कि घर खरीदना अच्छा नहीं है दरअसल, कई स्थितियों में यह अत्यधिक लाभदायक हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी आय स्थिर है, आप एक ही शहर में लंबी अवधि तक रहने का इरादा रखते हैं और आपके पास अच्छी-खासी बचत मौजूद है तो संपत्ति खरीदना एक मजबूत निवेश हो सकता है।
घर खरीदने से आपको संपत्ति का मालिक होने का मानसिक संतोष, भावनात्मक सुरक्षा तथा भविष्य में विक्रय या किराये-दर से अतिरिक्त लाभ कमाने की संभावना होती है।
कब किराए पर रहना समझदारी भरा है और कब खरीदना बेहतर?
किराए पर रहना बेहतर हो सकता है यदि:
आप अभी करियर में शुरुआत कर रहे हैं या अक्सर स्थानांतरण की संभावना है। आपकी बचत अभी बहुत अधिक नहीं है और आप बड़े डाउन-पेमेंट देने की स्थिति में नहीं हैं। आप लचीलापन चाहते हैं शहर बदलना, नौकरी बदलना, जीवनशैली बदलना आदि।
घर खरीदना बेहतर हो सकता है यदि:
आपकी आय और करियर स्थिर है, और आप उसी शहर में लंबे समय तक रहने का प्लान बनाते हैं। आपने अन्य वित्तीय प्राथमिकताएँ (इमरजेंसी फंड, बचत, निवेश) पहले ही पूरी कर ली हैं। आप संपत्ति के बुनियादी लाभ (मूल्यवृद्धि, किराये-दर, सुरक्षा) का लाभ उठाना चाहते हैं।
आज का बाजार माहौल और निर्णय को प्रभावित करता है
भारत में प्रमुख शहरों में घरों की कीमतें बढ़ती जा रही हैं। उदाहरण के लिए, एक सर्वे के अनुसार भारत में वर्ष 2025 में 6.5% तक वृद्धि की उम्मीद है। इसी समय, किराये की दरें भी तेजी से बढ़ रही हैं जैसे Ahmedabad में कुछ इलाकों में किराये में 25-30% तक उछाल आया है।
इन हालातों में यह देखना महत्वपूर्ण है कि आपके लिए कौन-सा विकल्प समय-समय पर बेहतर रहेगा सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि वित्तीय, जीवनशैली व भविष्य-योजना को ध्यान में रखते हुए।
निष्कर्ष
आपका फैसला सिर्फ यह नहीं है कि “क्या मैं घर खरीदूं या किराए पर रहूं” बल्कि यह है “मेरा करियर, मेरी बचत, मेरा जीवन-लचीलापन, तथा मेरे भविष्य के लक्ष्य क्या हैं?” के आधार पर। अगर आप अभी फ्रीडम चाहते हैं, अक्सर शहर बदलते हैं, और बड़ी बचत नहीं कर पाए हैं तो किराए पर रहना आज एक बुद्धिमानी भरा विकल्प बन सकता है। वहीं यदि आप स्थिर जीवनशैली चाहते हैं, निवेश के रूप में संपत्ति लेना चाहते हैं और आपके पास वित्तीय आधार मजबूत है तो घर खरीदना भी समझदारी हो सकती है।