नई दिल्ली : देश में आज से कामगारों, कर्मचारियों और कंपनियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर चार नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं, जिसने नौकरी, वेतन, छुट्टी, सुरक्षा और ओवरटाइम सबकी परिभाषा बदल दी है। सरकार का दावा है कि ये नया फ्रेमवर्क 40 करोड़ से ज्यादा भारतीय कामगारों की जिंदगी बदल देगा, जबकि विरोधियों का कहना है कि इससे कंपनियों पर दबाव और कर्मचारियों पर नई जिम्मेदारियां आएंगी। अब समझिए 10 नए नियम आपको कैसे प्रभावित करेंगे
1. 5 साल की जगह 1 साल के नौकरी में ग्रेच्युटी :
आपको बता दें कि अब ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल नौकरी करने की जरूरत खत्म हो गयी है। सिर्फ 1 साल काम करते ही ग्रेच्युटी का अधिकार मिल जाएगा। यानी अब कोई कंपनी आपको आसानी से बाहर नहीं कर पाएगी और आपका फाइनेंशियल सुरक्षा कवच और मजबूत होगा।
2. कॉन्ट्रैक्ट वर्कर भी पाएंगे स्थायी कर्मचारी जैसा फायदा :
अब कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी भी समान वेतन, मेडिकल बेनिफिट, छुट्टियां, सामाजिक सुरक्षा और ओवरटाइम बेनिफिट पाएंगे। पहली बार सरकार ने माना कि “काम एक जैसा है तो अधिकार भी एक जैसे होने चाहिए।”
3. ओवरटाइम का नया नियम: दोगुना वेतन अनिवार्य :
गौरतलब है कि नई व्यवस्था में 8 से 12 घंटे से ज्यादा काम में डबल पेमेंट अनिवार्य कर दिया गया है। अब किसी भी सेक्टर में कम पैसे देकर ओवरटाइम नहीं कराया जाएगा।
4. गिग वर्कर्स, फ्रीलांसर, Ola-Uber ड्राइवर; पहली बार कानून में शामिल :
आपको बता दें कि अब ये सभी कर्मचारी सोशल सिक्योरिटी के दायरे में आएंगे। एग्रीगेटर्स (Ola, Swiggy, Amazon, Zomato) को उनकी सुरक्षा और बीमा के लिए 1 से 2% टर्नओवर अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। यह भारत के 8 करोड़ गिग वर्कर्स के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
5. हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र अनिवार्य :
आपको बता दें कि चाहे फैक्ट्री हो, IT कंपनी हो या कोई संस्थान, अब कोई भी नौकरी बिना अपॉइंटमेंट लेटर के नहीं दी जा सकती। इससे ठगी, ग़लतफहमी और शोषण पर बड़ी रोक लगेगी।
6. महिलाओं के लिए बड़ा फैसला; नाइट शिफ्ट की मंजूरी, सुरक्षा नियमन सख्त :
महिलाओं को अब किसी भी सेक्टर में, रात की शिफ्ट में, सुरक्षा व्यवस्था के साथ काम करने की मंजूरी दी गई है। साथ ही ‘परिवार’ में सास-ससुर को भी जोड़ने का प्रावधान, ताकि उन्हें भी सुविधाएँ मिलें।
7. साल में 180 दिन काम के बाद छुट्टी लेने का नया अधिकार :
गौरतलब है कि अब कोई कंपनी छुट्टी देने में आनाकानी नहीं कर पाएगी। मीडिया, डिजिटल, खदान, IT और निर्यात क्षेत्र भी नए कोड के दायरे में आएंगे। अब पत्रकारों, डबिंग आर्टिस्ट, डिजिटल मीडिया वर्कर्स, स्टंट पर्सन, खदान मजदूर, IT और ITES कर्मचारी और पोर्ट और एक्सपोर्ट सेक्टर वर्कर्स इन पर पहली बार स्पष्ट नियम लागू होंगे।
8. विवादों का समाधान: अब फटाफट न्याय :
विवादों के समाधान के लिए दो सदस्यीय औद्योगिक ट्रिब्यूनल बनाए जाएंगे, जहां मामले सीधे जा सकेंगे। महीनों की देरी अब नहीं होगी।
9. खदान मजदूरों की सुरक्षा :
नए लेबर लॉ से खदान में काम करने वाले मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा के साथ सेफ्टी मॉनिटरिंग के लिए मानक तैयार किये गए हैं।
10. कंपनियों के लिए बड़ा बदलाव; अब सिर्फ एक लाइसेंस, एक रिटर्न, एक रजिस्ट्रेशन :
विदित है कि इससे झंझट कम होगी, समय की बचत, भ्रष्टाचार में गिरावट और उद्योगों को निवेश बढ़ाने की सुविधा बढ़ेगी।
विशेषज्ञों की राय; ये बदलाव क्यों बड़े हैं?
सरकार के अनुसार इससे मजदूर सुरक्षित होंगे, उद्योग मजबूत होंगे, भारत वैश्विक लेबर स्टैंडर्ड के बराबर पहुंचेगा। वहीं यूनियनों का दावा है कि कंपनियों को हाथ ऊपर है कि इससे कर्मचारियों का दबाव बढ़ेगा। साथ ही कुछ प्रावधान अस्पष्ट हैं। लेकिन माना जा रहा है कि इससे भारत का श्रम इकोसिस्टम तेज़ी से बदलने वाला है।
1 दिन में ही 29 पुराने कानून खत्म, 4 नए कोड लागू, 40 करोड़ कामगारों की जिंदगी बदली है। कहा जा रहा है कि यह निर्णय भारत के रोजगार सिस्टम में 75 साल का सबसे बड़ा बदलाव है। यह कामगारों के अधिकारों का सबसे बड़ा विस्तार और औद्योगिक निवेश को नई गति देने वाला कदम साबित होगा।