क्या सच में बंद होने जा रहे हैं ये 6 सरकारी बैंक? जानें पूरी खबर: बड़े मर्जर प्लान की अंदरूनी तैयारी शुरू, बैंकिंग सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव?
क्या सच में बंद होने जा रहे हैं ये 6 सरकारी बैंक? जानें पूरी खबर

बैंकिंग सेक्टर: भारत का बैंकिंग सेक्टर एक बार फिर बड़े भूचाल के मुहाने पर खड़ा है। केंद्र सरकार ने 6 छोटे सरकारी बैंकों के लिए मर्जर की अंदरूनी तैयारी तेज कर दी है। यह कदम सिर्फ कुछ बैंकों के विलय की घोषणा नहीं, बल्कि भारतीय बैंकिंग ढांचे को पूरी तरह रीशेप करने की दिशा में सबसे बड़ा सरकारी ऑपरेशन माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, यह मर्जर 2026–27 में फाइनल हो सकता है, लेकिन इसकी तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। बैंकिंग सेक्टर के जानकार इसे “India Banking Mega Reform 2.0” कह रहे हैं, बिल्कुल वैसा ही जैसा 2017–2020 में हुआ था जब 27 सरकारी बैंक घटकर सिर्फ 12 रह गए थे।

कौन-कौन से 6 सरकारी बैंक खत्म होने के कगार पर?

सूत्रों व फाइनेंशियल पोर्टल्स पर सामने आई जानकारी के अनुसार ये 6 बैंक मर्जर सूची में हैं:

•Central Bank of India
•Indian Overseas Bank (IOB)
•UCO Bank
•Bank of India (BOI)
•Bank of Maharashtra
•Punjab & Sind Bank

इन सभी बैंकों का मार्केट कैप छोटा है, संसाधन सीमित हैं और प्रोफिट ग्रोथ बड़ी बैंकों जितनी तेज नहीं है इसलिए इन्हें बड़े बैंकों में मर्ज करने की सलाह दी गई है।

किस बैंक का विलय किसके साथ हो सकता है?

अब तक यह अनुमान है कि इन 6 बैंकों को निम्न बड़े बैंकों में मर्ज किया जा सकता है:

•SBI
•Bank of Baroda
•Punjab National Bank (PNB)
•Canara Bank
•Union Bank of India

सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में भारत में सिर्फ 5–6 बहुत बड़े और ग्लोबल-लेवल सार्वजनिक बैंक हों।

आखिर क्यों हो रहा है यह मर्जर?, सरकार का असली मकसद

सरकार के बड़े उद्देश्य:

•छोटे, कमजोर बैंकों की संख्या घटाकर उन्हें बड़े बैंकों की ताकत देना
•NPA समस्या कम करना और बैलेंस शीट मजबूत बनाना
•एकीकृत, तेज, सुरक्षित और ग्लोबल-कॉम्पिटिटिव बैंकिंग नेटवर्क बनाना
•अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय बैंकिंग को टॉप-10 सिस्टम में शामिल करना
•डिजिटल पेमेंट और टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन को आसान बनाना

सरकार लंबे समय से इस मॉडल पर काम कर रही है “कम बैंक, पर मजबूत बैंक”।

इन 6 बैंकों की आर्थिक स्थिति, क्यों खतरे में हैं?

इन बैंकों में पिछले वर्षों में कुछ चुनौतियाँ सामने आईं:

•ऊँचा NPA रेट
•कम पूंजी-पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio)
•धीमी वृद्धि
•सीमित नेटवर्क
•प्रॉफिट में उतार-चढ़ाव
•प्रशासनिक कठिनाइयाँ

हालांकि इन बैंकों ने हाल के वर्षों में सुधार दिखाया है, लेकिन सरकार चाहती है कि सब बैंक एक बड़े साझा प्लेटफॉर्म पर स्थिर हों।

ग्राहकों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

मर्जर के बाद ग्राहकों को कुछ बदलाव देखने मिल सकते हैं:

•IFSC कोड बदल सकते हैं
•चेकबुक/पासबुक अपडेट करवानी पड़ सकती है
•UPI / Net Banking नए बैंक में री-लिंक करना होगा
•EMI/लोन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, वही बैंक संभालेगा
•ब्याज दरें वही रहेंगी या नई बैंक नीति के अनुसार थोड़ी बदल सकती हैं
•ब्रांच का लोकेशन बदल सकता है (कभी-कभी)

फायदा यह होगा कि ग्राहक को बड़ा नेटवर्क, ज्यादा ATM, बेहतर डिजिटल सुविधाएँ और अधिक सुरक्षा मिलेगी।

कर्मचारियों पर सबसे बड़ा असर: Transfer, Promotion, New Rules

हर बार की तरह इस मर्जर में भी कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा— ट्रांसफर बढ़ेंगे, नई HR पॉलिसी लागू होगी, प्रमोशन स्केल बदलेगा, यूनियनों की सहमति जरूरी होगी, पिछले मर्जर में भी कर्मचारियों को एडजस्ट होने में 1–2 साल लगे थे।

Bank Unions पहले भी मर्जर को लेकर नाखुश रही हैं, इस बार भी बड़ा विरोध देखने को मिल सकता है।

पहले हुए मर्जर से क्या सीख मिली थी?

2017–2020 के दौरान:

•SBI ने 5 Associate Banks को मर्ज किया
•PNB में OBC + United Bank का विलय हुआ
•Bank of Baroda में Dena और Vijaya Bank शामिल हुए

इन मर्जर के फायदे:

•बड़े बैंकों को ग्लोबल रैंकिंग मिली
•टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन बढ़ा
•NPA कंट्रोल हुआ
•कैपिटल स्ट्रेंथ बढ़ी

यही मॉडल अब दोबारा लागू किया जा रहा है।

"एक्सपर्ट्स की राय, भारत में विश्वस्तरीय बैंक बनने का रास्ता"

वित्त विशेषज्ञों के अनुसार:

•“यह कदम भारतीय बैंकिंग को ग्लोबल प्लेयर बनाएगा।”
•“छोटे बैंकों का लंबे समय तक टिकना मुश्किल था, मर्जर जरूरी है।”
•“सिर्फ बड़े बैंक ही बड़े लोन और बड़े प्रोजेक्ट संभाल सकते हैं।”

कुछ विशेषज्ञों का कहना यह भी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे बैंकों की जरूरत ज्यादा होती है, इस पर सरकार को खास ध्यान देना होगा।

दुनिया में कैसे होते हैं ऐसे मर्जर? इंटरनेशनल कंपैरिजन

चीन के पास 4 मेगा बैंक हैं, दुनिया के टॉप 10 में अमेरिका में 1980 के बाद से 10,000 बैंक घटकर 4,000 बचे, यूरोप में “Banking Union Model” लागू है। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है — “Few Banks, Big Banks, Better Banks”.

आम जनता को अभी क्या सावधानी रखनी चाहिए?

•बैंक की आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें
•फर्जी मैसेज/कॉल से सावधान रहें
•चेकबुक, पासबुक अपडेट के लिए समय निकलें
•अगर आपका बैंक इस लिस्ट में है, ब्रांच से अप-टू-डेट जानकारी लेते रहें

निष्कर्ष: भारत के बैंकिंग इतिहास का बड़ा मोड़

6 छोटे सरकारी बैंकों का यह प्रस्तावित विलय सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं, यह भारत की बैंकिंग व्यवस्था को नई दिशा देने वाला सबसे बड़ा बैंकिंग सुधार साबित हो सकता है।

इस मर्जर के बाद भारत के पास कुछ गिने-चुने, पर बेहद शक्तिशाली सरकारी बैंक होंगे जो देश की आर्थिक रीढ़ को और मजबूत बनाएंगे।

भारत का बैंकिंग भविष्य अब “Small Banks” नहीं बल्कि Super Banks की ओर बढ़ रहा है।

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