नई दिल्ली : देशभर के लाखों मकान मालिकों के लिए बड़ी राहत और किराएदारों के लिए चेतावनी भरी खबर सामने आई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि किराएदार जिम्मेदारी से बचने के लिए नए-नए बहाने नहीं बना सकता।
कोर्ट ने कहा कि “अगर परिवार का सदस्य मकान में रह रहा है, तो उसे भी किराएदार का ही कब्जा माना जाएगा।”
क्या था पूरा मामला?
आपको बता दें कि एक किराएदार ने मकान मालिक को चौंकाने वाला तर्क दिया। उसने कहा कि वह खुद उस मकान में नहीं रह रहा उसकी पत्नी वहां रहती है, पत्नी ने मकान पर ताला लगा दिया है। यानी किराएदार ने खुद को जिम्मेदारी से अलग दिखाने की कोशिश की। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।
कोर्ट ने क्या कहा?
गौरतलब है कि नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने इस मामले में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि परिवार का सदस्य, किराएदार का ही कब्जा माना जायेगा। “मैं वहां नहीं रहता” कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। पत्नी को अलग अधिकार नहीं दिया जा सकता। मतलब साफ है कि परिवार के नाम पर खेल अब नहीं चलेगा।
किराएदार को लगा बड़ा झटका
गौरतलब है कि कोर्ट ने न सिर्फ किराएदार की दलील खारिज की, बल्कि उसकी अपील भी खारिज कर दी। मकान खाली कराने (बेदखली) के आदेश को सही ठहराया यानी अब मकान मालिक के पक्ष में फैसला पक्का है।
“कानून का दुरुपयोग” बताकर लगाई फटकार
विदित कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए कहा ताला लगाना और कब्जा बनाए रखना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है और यह सीधे तौर पर मकान मालिक के अधिकारों को खत्म करने की कोशिश है।
इस फैसले का क्या असर होगा?
गौरतलब है कि यह फैसला देशभर के मकान मालिकों के लिए मिसाल बन सकता है। किराएदार अब “परिवार” का बहाना नहीं बना पाएंगे। फर्जी कब्जा या टालमटोल मुश्किल होगी। मकान खाली कराने के केस मजबूत होंगे।
हाई कोर्ट का संदेश बिल्कुल साफ है किराएदार जिम्मेदारी से भाग नहीं सकता। परिवार के नाम पर कब्जा भी अवैध माना जाएगा। अब कानून के सामने बहाने नहीं, सिर्फ तथ्य चलेंगे। यह फैसला किरायेदार और मकान दोनों के लिए अहम साबित होगा।