अब तपन डेका की जगह महेश दीक्षित बने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नए चीफ: अनुच्छेद 370 से लेकर आतंकवाद विरोधी अभियानों में निभाई अहम भूमिका, वहीं G-20 में...जानें IB और IB प्रमुख की जिम्मेदारियाँ_एक नज़र
अब तपन डेका की जगह महेश दीक्षित बने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नए चीफ

नई दिल्ली: भारत की सबसे महत्वपूर्ण खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को नया प्रमुख मिल गया है। केंद्र सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित को इंटेलिजेंस ब्यूरो का नया निदेशक (IB Chief) नियुक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। वह 30 जून को वर्तमान आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे। महेश दीक्षित को देश की आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और मजबूत खुफिया नेटवर्क तैयार करने में विशेषज्ञ माना जाता है।

कौन हैं महेश दीक्षित?

आपको बता दें कि महेश दीक्षित 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और आंध्र प्रदेश कैडर से संबंध रखते हैं। वर्तमान में वह इंटेलिजेंस ब्यूरो में स्पेशल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। लगभग तीन दशक से अधिक के अपने लंबे करियर में उन्होंने देश के कई संवेदनशील इलाकों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। पेशे से डॉक्टर रहे महेश दीक्षित ने बाद में भारतीय पुलिस सेवा का रास्ता चुना और देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बन गए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, पूर्वोत्तर भारत और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण खुफिया अभियानों का नेतृत्व किया है।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद निभाई बड़ी जिम्मेदारी

गौरतलब है कि महेश दीक्षित का नाम विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद सुरक्षा व्यवस्था संभालने को लेकर चर्चा में रहा। उस दौरान उन्होंने श्रीनगर स्थित सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के प्रमुख के रूप में काम किया। सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आतंकवादी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती है। अधिकारियों के अनुसार, घाटी में हालात सामान्य बनाने और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कई बड़े ऑपरेशन सफल बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आतंकवाद विरोधी अभियानों के विशेषज्ञ

महेश दीक्षित को मजबूत जमीनी खुफिया नेटवर्क तैयार करने और आतंकवाद विरोधी अभियानों का विशेषज्ञ माना जाता है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों, लद्दाख और नक्सल प्रभावित इलाकों में भी कई संवेदनशील ऑपरेशन संभाले। पिछले वर्ष उन्होंने एक बड़े सफेदपोश आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। शुरुआती खुफिया सूचनाओं के आधार पर चलाए गए इस अभियान को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना गया।

G-20 बैठक की सुरक्षा में भी निभाई अहम भूमिका

साल 2023 में श्रीनगर में आयोजित G-20 टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक के दौरान भी महेश दीक्षित सुरक्षा प्रबंधन से जुड़े प्रमुख अधिकारियों में शामिल थे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर सटीक खुफिया आकलन देने में उनका अहम योगदान रहा।

कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से हो चुके हैं सम्मानित

विदित है कि अपने लंबे सेवा काल में महेश दीक्षित को कई महत्वपूर्ण सम्मान मिले हैं।

  • वर्ष 2004 में पुलिस आंतरिक सुरक्षा सेवा पदक

  • वर्ष 2009 में सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक

  • वर्ष 2016 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक

ये सम्मान राष्ट्रीय सुरक्षा और उत्कृष्ट सेवाओं में उनके योगदान को दर्शाते हैं।

तपन कुमार डेका की जगह संभालेंगे कमान

महेश दीक्षित वर्तमान आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। डेका 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उन्हें सरकार ने दो बार सेवा विस्तार दिया था। उन्होंने मुंबई 26/11 हमलों के बाद आतंकवाद विरोधी अभियानों तथा इंडियन मुजाहिदीन के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

क्या है इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)?

इंटेलिजेंस ब्यूरो यानी IB भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी है। इसकी स्थापना वर्ष 1887 में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद इसे भारत की केंद्रीय आंतरिक खुफिया एजेंसी के रूप में पुनर्गठित किया गया। यह एजेंसी गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और इसका प्रमुख आमतौर पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का वरिष्ठ अधिकारी होता है।

IB की प्रमुख जिम्मेदारियां

  • देश के भीतर आतंकवादी गतिविधियों पर निगरानी रखना।

  • विदेशी खुफिया एजेंसियों और जासूसी गतिविधियों पर नजर रखना।

  • अलगाववाद, नक्सलवाद और उग्रवाद से जुड़ी सूचनाएं जुटाना।

  • सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था से जुड़े इनपुट सरकार को देना।

  • वीआईपी सुरक्षा के लिए खतरे का आकलन करना।

  • चुनाव, बड़े आयोजनों और संवेदनशील कार्यक्रमों की सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट तैयार करना।

  • साइबर सुरक्षा और फर्जी प्रचार पर निगरानी रखना।

देश की आंतरिक सुरक्षा को मिलेगी नई दिशा

महेश दीक्षित की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश के सामने आतंकवाद, साइबर अपराध और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियां मौजूद हैं। लंबे अनुभव, मजबूत खुफिया नेटवर्क और संवेदनशील क्षेत्रों में काम करने की विशेषज्ञता को देखते हुए उनसे देश की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की उम्मीद की जा रही है।

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