स्वास्थ्य सुरक्षा; पैकेज्ड फूड को लेकर सुप्रीम कोर्ट का FSSA को सख्त आदेश!: "फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग" होगी अनिवार्य, वही अब पैकेट के सामने...जानें आदेश की वजह और इसके मायने_एक नज़र
स्वास्थ्य सुरक्षा; पैकेज्ड फूड को लेकर सुप्रीम कोर्ट का FSSA को सख्त आदेश!

नई दिल्ली/स्वास्थ्य : बाजार से चिप्स, बिस्किट या कोल्ड ड्रिंक खरीदते समय पीछे लिखी न्यूट्रिशन डिटेल पीछे लिखी होने के कारण लोग उसे देखना कई बार इग्नोर कर देते हैं। लेकिन ये जानकारी स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जरूरी होती है सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अब यह “छिपी हुई जानकारी” सीधे आपके सामने होगी। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से कहा है कि वह पैकेज्ड फूड पर ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’ लागू करने पर गंभीरता से विचार करे। मतलब अब खाने के पैकेट के सामने ही साफ-साफ लिखा होगा कि वह फूड हेल्दी है या अनहेल्दी।

क्या है ‘फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग’?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग (FOPL) का मतलब है कि पैकेट के सामने बड़े और साफ अक्षरों में यह बताया जाए कि :

●उसमें कितनी शुगर (चीनी) है

●कितना नमक है

●कितना फैट है

कुछ देशों में इसे रंगों से भी दिखाया जाता है:

●लाल = ज्यादा शुगर/फैट/नमक (खतरे का संकेत)

●हरा = कम मात्रा (बेहतर विकल्प)

यानी अब ग्राहक को पीछे के बारीक अक्षर पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक नजर में ही हेल्थ रिस्क समझ आएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश क्यों दिया?

गौरतलब है कि देश में लाइफस्टाइल बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। मोटापा, डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट डिजीज के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी बड़ी वजह अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड में छिपी ज्यादा शुगर, नमक और ट्रांस फैट है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से जवाब मांगा है कि वह इस नियम को लागू करने के लिए क्या कदम उठा रहा है।

इससे क्या फायदा होगा?

●लोगों में जागरूकता बढ़ेगी
●हेल्दी फूड चुनना आसान होगा
●न्यूट्रिशन जानकारी पढ़ने की आदत पड़ेगी
●मोटापा और डायबिटीज का रिस्क कम हो सकता है
●हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज से बचाव में मदद

हालांकि, यह कोई गारंटी नहीं कि बीमारियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी। लेकिन लोग “जानकारी के आधार पर” फैसला ले पाएंगे।

पैकेज्ड फूड में क्या होता है खतरनाक?

विदित है कि हर पैकेज्ड फूड खराब नहीं होता, लेकिन कुछ तत्व ज्यादा मात्रा में नुकसान पहुंचा सकते हैं। अतिरिक्त शुगर, अधिक सोडियम (नमक), ट्रांस फैट और सैचुरेटेड फैट का ज्यादा सेवन लंबे समय में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।

क्या पैकेज्ड फूड पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?

विशेषज्ञों का मानना है कि पैकेज्ड फूड को सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए; जैसे महीने में एक-दो बार या विशेष अवसर पर।

बेहतर विकल्प क्या हैं?

●ताजे फल और सब्जियां

●साबुत अनाज

●बिना नमक वाले नट्स

●घर का बना खाना

ये शरीर को जरूरी विटामिन, फाइबर और मिनरल देते हैं और अतिरिक्त शुगर व फैट से बचाते हैं।

अब आगे क्या?

सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को एक महीने के भीतर जवाब देने को कहा है कि फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग को कैसे लागू किया जाएगा। अब नजर इस बात पर है कि यह नियम कब और किस रूप में लागू होता है।

अब स्वाद के साथ सेहत का हिसाब भी साफ दिखाई देगा। अगर यह नियम लागू होता है, तो पैकेट के सामने लिखा हर शब्द आपकी थाली और आपकी सेहत का फैसला करेगा।

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