दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का सर्वे हुआ पूरा!: 7 नये हाईस्पीड कॉरिडोर पर 16 ट्रिलियन होंगे खर्च; दिल्ली से लखनऊ मात्र 2 घंटे में, वहीं वाराणसी...नोएडा समेत यूपी के इन 14 बड़े शहरों को मिलेगा सीधा फायदा पूरा रूट_एक नज़र
दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का सर्वे हुआ पूरा!

नई दिल्ली/लखनऊ : अब दिल्ली से लखनऊ जाने में पूरा दिन नहीं लगेगा और काशी/वाराणसी पहुंचना भी हवाई सफर जैसा तेज हो जाएगा। भारतीय रेलवे देश के सबसे बड़े हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट्स में से एक पर तेजी से काम कर रहा है। दिल्ली से वाराणसी तक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने वाला माना जा रहा है। इस हाईस्पीड रेल नेटवर्क के जरिए दिल्ली से लखनऊ सिर्फ 2 घंटे और दिल्ली से वाराणसी लगभग 4 घंटे में पहुंचा जा सकेगा। रेलवे का दावा है कि यह परियोजना उत्तर भारत में यात्रा, व्यापार, रोजगार और निवेश का नया दौर शुरू करेगी।

क्या है दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट और प्रस्तावित रूट?

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि यह हाईस्पीड रेल कॉरिडोर देश की राजधानी दिल्ली को उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहरों से जोड़ेगा। इसका प्रस्तावित रूट दिल्ली, सराय काले खां, नोएडा, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही से वाराणसी है। इस कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 865 किलोमीटर बताई जा रही है।

सफर में आएगी क्रांति!

आज दिल्ली से लखनऊ वंदे भारत से लगभग 6 घंटे और शताब्दी से करीब 7 घंटे लगते हैं। लेकिन बुलेट ट्रेन आने के बाद यही सफर 2 घंटे के आसपास और दिल्ली से बनारस 4 घंटे के भीतर पूरा हो सकता है। यानी ट्रेन का अनुभव अब “फ्लाइट जैसी स्पीड” वाला होने जा रहा है।

अयोध्या को मिलेगा बड़ा फायदा

गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात यह है कि लखनऊ के पास से एक अलग लिंक लाइन अयोध्या तक बनाई जाएगी। इससे अयोध्या, प्रयागराज, रायबरेली और भदोही जैसे शहर भी हाईस्पीड नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। धार्मिक पर्यटन और व्यापार दोनों को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

सराय काले खां बनेगा मेगा ट्रांसपोर्ट हब

विदित है कि दिल्ली में बुलेट ट्रेन का मुख्य स्टेशन सराय काले खां में प्रस्तावित है। यहां एक साथ मेट्रो, नमो भारत (RRTS) और हाईस्पीड रेल का कनेक्शन मिलेगा। यानी एक ही जगह से देश की सबसे तेज ट्रेनों तक पहुंच आसान होगी।

2035-2040 तक पूरा करने का लक्ष्य

आपको बता दें कि रेल मंत्रालय और नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड इस प्रोजेक्ट की DPR, सर्वे और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि लेजर तकनीक से सर्वे पूरा हो चुका है, कई रूट सेक्शन का डेटा तैयार है और परियोजना को 2035 से 2040 के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सिर्फ यूपी नहीं, पूरे देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क!

Ashwini Vaishnaw ने बताया कि सरकार 7 नए हाईस्पीड रेल कॉरिडोर पर काम कर रही है। इन परियोजनाओं पर करीब ₹16 ट्रिलियन तक खर्च होने का अनुमान है। सरकार का लक्ष्य दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों को हाईस्पीड नेटवर्क से जोड़ना है।

मुंबई-अहमदाबाद प्रोजेक्ट बना मॉडल

आपको बता दें कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा हाईस्पीड रेल कॉरिडोर माना जा रहा है। रेलवे का दावा है कि मुंबई-अहमदाबाद सफर 2 घंटे से कम, मुंबई-पुणे 48 मिनट और पुणे-हैदराबाद 2 घंटे से कम में संभव होगा।

यूपी के इन शहरों की बदल सकती है किस्मत

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस प्रोजेक्ट से रियल एस्टेट, इंडस्ट्री, पर्यटन, होटल सेक्टर और रोजगार में जबरदस्त उछाल आ सकता है। खासतौर पर नोएडा, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों में निवेश बढ़ने की संभावना है।

रेलवे का सबसे बड़ा सपना?

भारतीय रेलवे अब सिर्फ ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ा रहा, बल्कि “सुपरफास्ट भारत” की नींव रखने में जुटा है। सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में हाईस्पीड रेल, आधुनिक स्टेशन, इलेक्ट्रिफिकेशन और फ्रेट कॉरिडोर भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार बदल देंगे।

अगर यह प्रोजेक्ट तय समय पर पूरा हुआ, तो दिल्ली से काशी तक का सफर सिर्फ दूरी नहीं, बल्कि “नई तकनीक वाले भारत” की पहचान बन जाएगा।

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