नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को “डीम्ड यूनिवर्सिटी” का दर्जा दे दिया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की सिफारिश के बाद लिए गए इस फैसले से अब NCERT को विश्वविद्यालय जैसी स्वायत्तता मिल गई है। इस फैसले के बाद NCERT अब सिर्फ किताबें बनाने वाली संस्था नहीं रहेगी, बल्कि कोर्स डिजाइन, रिसर्च और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।
क्या बदलेगा अब?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब NCERT अपने स्तर पर कोर्स और सिलेबस तय कर सकेगा। रिसर्च, पीएचडी और नए शैक्षणिक प्रोग्राम शुरू कर सकेगा। देशभर में शिक्षा सुधार में सीधी और मजबूत भूमिका निभाएगा। यानी साफ है कि स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक NCERT का दायरा और असर बढ़ेगा।
इन 6 संस्थानों को मिला दर्जे का फायदा
गौरतलब है कि NCERT के तहत आने वाले 6 बड़े संस्थानों को इस दर्जे में शामिल किया गया है -
ये सभी मिलकर अब एक “डीम्ड यूनिवर्सिटी सिस्टम” की तरह काम करेंगे।
सरकार ने लगाईं सख्त शर्तें
आपको बता दें कि हालांकि यह आजादी पूरी तरह खुली नहीं है। सरकार ने कुछ कड़े नियम भी तय किए हैं -
यानी स्वायत्तता है, लेकिन कड़ी निगरानी भी साथ-साथ
पढ़ाई और एडमिशन पर क्या असर पड़ेगा?
विदित है कि नए नियम से एडमिशन, फीस और सीटों के नियम तय मानकों के अनुसार होंगे। नए कोर्स या विदेशी कैंपस खोलने के लिए भी नियमों का पालन जरूरी है। शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने पर खास जोर दिया जायेगा।
रिसर्च और रैंकिंग पर फोकस
विदित है कि NCERT को अब रिसर्च और पीएचडी प्रोग्राम बढ़ाने होंगे। NAAC और NBA से मान्यता जरूरी। और हर साल NIRF रैंकिंग में भाग लेना अनिवार्य होगा। मतलब अब NCERT को खुद भी क्वालिटी टेस्ट पास करना होगा।
क्यों है ये फैसला बड़ा?
आपको बता दें कि अब तक NCERT सिर्फ स्कूल शिक्षा तक सीमित था। अब यह उच्च शिक्षा और रिसर्च का भी बड़ा केंद्र बनेगा। शिक्षा नीति में सीधा और गहरा असर दिखेगा।
यह शिक्षा में ‘गेम चेंजर’ कदम साबित होगा। केंद्र सरकार का यह फैसला आने वाले समय में भारत की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। संदेश साफ है कि अब NCERT सिर्फ किताबें नहीं बनाएगा बल्कि देश की पढ़ाई का पूरा भविष्य तय करेगा।