पेरिस ओलंपिक की शुरुआत में अब कुछ दिनो का ही समय बचा है। भारत इस बार 100 से अधिक खिलाड़ियों का दल भेज रहा है, जिनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। सरकार ने ओलंपिक की तैयारियों के लिए आवश्यक धनराशि आवंटित कर दी है। टोक्यो खेलों में नीरज चोपड़ा द्वारा स्वर्ण पदक जीतने के बाद, इस ओलंपिक में ट्रैक और फील्ड खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा वित्तीय सहायता मिली है।
एथलेटिक्स पर सबसे ज्यादा खर्च
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के मिशन ओलंपिक सेल (एमओसी) के आंकड़ों के मुताबिक, सरकार ने एथलेटिक्स पर 96 करोड़ 8 लाख रुपए खर्च किए। इस बार 16 खेलों की तैयारियों पर भारत ने कुल 470 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। पिछले ओलंपिक चक्र में टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) के तहत एथलेटिक्स पर 5 करोड़ 38 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस बार एथलेटिक्स को सबसे ज्यादा वित्तीय सहायता मिली है, जो ट्रैक और फील्ड खिलाड़ियों की तैयारी और प्रदर्शन को सुधारने के उद्देश्य से की गई है।
भारत का दल
इस बार भारत 100 से अधिक खिलाड़ियों का दल भेज रहा है। 26 जुलाई से शुरू हो रहे पेरिस खेलों में नीरज चोपड़ा की अगुआई में 28 सदस्यीय एथलेटिक्स दल भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। इस बार भारतीय दल में कुल 118 खिलाड़ी शामिल होंगे। पिछली बार के सात पदकों को देखते हुए इस बार उम्मीदें अधिक हैं और इसलिए खर्चा भी ज्यादा किया गया है। एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा के नेतृत्व में दल को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।
अन्य खेलों पर खर्च
बैडमिंटन खिलाड़ियों को दूसरा सबसे अधिक अनुदान मिला है। उन्हें 72.02 करोड़ रुपए मिले, इसके बाद मुक्केबाजी (60.93 करोड़) और निशानेबाजी (60.42 करोड़) का स्थान है।
टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता भारतीय पुरुष हॉकी टीम को पिछले तीन साल में 41.29 करोड़ रुपए मिले जबकि तीरंदाजी पर 39.18 करोड़ रुपए खर्च हुए। पहलवानों को 37.80 करोड़ रुपए और भारोत्तोलन के लिए 26.98 करोड़ रुपए आवंटित हुए। घुड़सवारी को सबसे कम 95 लाख रुपए मिले। टेनिस को 1.67 करोड़ रुपए और गोल्फ को 1.74 करोड़ रुपए मिले। नौकायन (3.89 करोड़), तैराकी (3.9 करोड़), पाल नौकायन (3.78 करोड़) और जूडो (6.3 करोड़) पर भी 10 करोड़ रुपए से कम खर्च हुए।
सिंधू और शरत कमल होंगे ध्वजवाहक
स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधू और अचंता शरत कमल उद्घाटन समारोह में भारत के ध्वजवाहक होंगे। अचंता शरत कमल की अगुआई वाली भारतीय टेबल टेनिस टीम को 12.92 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी गई है।
विदेशी दौरे और राष्ट्रीय शिविर
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विदेश में अनुभव और टूर्नामेंट के मामले में बैडमिंटन खिलाड़ियों को सबसे अधिक समर्थन मिला है। उन्होंने 81 दौरे किए। निशानेबाजों को 45 विदेशी दौरे मिले, इसके बाद टेनिस (40), एथलेटिक्स (31), टेबल टेनिस (28), कुश्ती (27), तीरंदाजी (24), मुक्केबाजी (23), नौकायन (22), हॉकी (18), जूडो (15), गोल्फ (12) और तैराकी (11) का स्थान आता है।
पिछले तीन वर्षों में निशानेबाजी में 41 राष्ट्रीय शिविर आयोजित किए गए, जो सभी 16 खेलों में सबसे अधिक हैं। तीरंदाजी 41 शिविर के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद एथलेटिक्स 36 शिविर के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद हॉकी (33), मुक्केबाजी (17), नौकायन (16), कुश्ती (15) और बैडमिंटन (13) का स्थान है। घुड़सवारी के लिए कोई राष्ट्रीय शिविर नहीं था क्योंकि अधिकांश सवार विदेश में प्रशिक्षण लेते हैं। गोल्फ के लिए केवल एक शिविर आयोजित हुआ था।
विशिष्ट खेल संबंधित खर्च
व्यक्तिगत और विशिष्ट खेल संबंधित खर्चों में भारतीय हॉकी टीम को 41.81 करोड़ रुपए मिले, जिसमें 76 राष्ट्रीय शिविर और 19 विदेशी दौरों का खर्च शामिल है। नीरज चोपड़ा इस सूची में 5.72 करोड़ रुपए के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यह खर्च उनके मौजूदा विदेशी कोच डॉ. क्लॉस बार्टोनिट्ज की सेवाएं लेने, यूरोप में ओलंपिक पूर्ण शिविर तथा यूरोप, अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर हुआ।