₹10 हजार से ऊपर के ऑनलाइन पेमेंट RBI की बड़े बदलाव की तैयारी!: बड़े ट्रांजैक्शन पर लगेगा 1 घंटे का ब्रेक, मिलेगा कैंसिल का ऑप्शन, वहीं बुजुर्गों को...जानें क्या होंगे बदलाव और आम लोगों को इसके फायदे_एक नजर
₹10 हजार से ऊपर के ऑनलाइन पेमेंट RBI की बड़े बदलाव की तैयारी!

नई दिल्ली/आर्थिकी : देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। अगर प्रस्ताव लागू हुआ, तो ₹10,000 से अधिक के ऑनलाइन पेमेंट तुरंत प्रोसेस नहीं होंगे, बल्कि उन पर 1 घंटे का सुरक्षा होल्ड लगाया जा सकता है। इस दौरान ग्राहक को गलत या संदिग्ध ट्रांजैक्शन रोकने और कैंसिल करने का मौका मिलेगा। RBI का मानना है कि साइबर ठग अक्सर लोगों पर मानसिक दबाव बनाकर जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं। ऐसे में यह “कूलिंग पीरियड” फ्रॉड रोकने का प्रभावी हथियार बन सकता है।

क्या है RBI का नया प्रस्ताव?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रस्ताव के अनुसार ₹10,000 से अधिक डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे का होल्ड लगाया जा सकता है। इस दौरान यूजर चाहे तो ट्रांजैक्शन कैंसिल कर सकेगा। उद्देश्य है कि गलत खाते में पैसा भेजने या ठगी की स्थिति में राहत मिले।

क्यों जरूरी पड़ा यह कदम?

गौरतलब है कि RBI के मुताबिक पिछले वर्ष डिजिटल फ्रॉड से 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। ₹10,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन फ्रॉड मामलों की संख्या में कम हैं, लेकिन कुल फ्रॉड राशि का लगभग पूरा बड़ा हिस्सा इन्हीं से जुड़ा है इसलिए सुरक्षा के लिहाज से इस सीमा को अहम माना गया है।

बुजुर्गों के लिए अलग सुरक्षा लेयर

विदित है कि RBI वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए भी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था पर विचार कर रहा है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए ₹50,000 से ऊपर ट्रांजैक्शन पर “Trusted Person” यानी भरोसेमंद व्यक्ति की मंजूरी जरूरी हो सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बुजुर्ग ठगी का आसान शिकार न बनें।

आएगा ‘Kill Switch’ फीचर

आपको बता दें कि RBI ने एक और अहम सुझाव दिया है अगर अकाउंट हैक हो जाए तो यूजर एक क्लिक में UPI बंद कर सकेगा, नेट बैंकिंग रोक सकेगा और कार्ड/डिजिटल पेमेंट सर्विसेज अस्थायी रूप से ब्लॉक कर सकेगा। यानी ग्राहक को कस्टमर केयर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

व्हाइटलिस्ट से मिलेगी राहत

अगर आप नियमित रूप से किसी भरोसेमंद व्यक्ति या व्यापारी को पैसे भेजते हैं, तो उसे व्हाइटलिस्ट में जोड़ सकेंगे, ऐसे ट्रांजैक्शन पर 1 घंटे का होल्ड लागू नहीं होगा। इससे रोजमर्रा के पेमेंट प्रभावित नहीं होंगे।

अभी क्या स्थिति है?

गौरतलब है कि फिलहाल यह प्रस्ताव/चर्चा चरण में है। RBI बैंकिंग संस्थाओं और NPCI के साथ तकनीकी पहलुओं पर विचार कर रहा है। अभी तक कोई अंतिम नियम लागू नहीं हुआ है। नियम विस्तृत गाइडलाइन बाद में जारी की जाएगी। यह चरणबद्ध तरीके से लागू होने की संभावना है।

क्या होगा असर?

गौरतलब है कि यदि यह नियम लागू होता है तो—

फायदे

•डिजिटल फ्रॉड में कमी
•गलत ट्रांजैक्शन रोकने का मौका
•बुजुर्गों की अतिरिक्त सुरक्षा
•अकाउंट हैक होने पर तुरंत कंट्रोल

चुनौतियाँ

•इंस्टेंट पेमेंट की सुविधा प्रभावित हो सकती है
•बिजनेस/इमरजेंसी पेमेंट में देरी संभव
•टेक्निकल इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करना होगा

डिजिटल पेमेंट को और सुरक्षित बनाने की दिशा में RBI का यह प्रस्ताव बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अगर लागू हुआ तो ऑनलाइन बैंकिंग का अनुभव पहले जैसा “तुरंत” नहीं रहेगा, लेकिन सुरक्षा कई गुना बढ़ सकती है। यानी भविष्य में पैसे भेजने से पहले सिर्फ सोचने का नहीं, रोकने का भी मौका मिलेगा।

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