लखनऊ/नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। लंबे समय से विवाद और विरोध के बीच अब प्रदेश की बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने प्रीपेड स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता खत्म कर दी है। अब प्रदेश में सिर्फ स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, लेकिन वे प्रीपेड होंगे या पोस्टपेड, इसका फैसला अब उपभोक्ता खुद करेगा। यह बदलाव लाखों उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आया है, जो अब तक जबरन लगाए जा रहे प्रीपेड मीटरों से परेशान थे।
क्या बदला है? समझिए पूरा फैसला
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने 1 अप्रैल 2026 को नई अधिसूचना जारी कर स्मार्ट मीटर नियमों में संशोधन किया है।नई व्यवस्था के तहत जहां संचार नेटवर्क उपलब्ध होगा, वहां स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। लेकिन प्रीपेड मोड अब अनिवार्य नहीं रहेगा। उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड विकल्प चुन सकेंगे। यानी अब बिजली विभाग किसी भी उपभोक्ता पर जबरन प्रीपेड मीटर नहीं थोप सकेगा।
अब तक क्या हो रहा था?
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में अभी तक 78 लाख से अधिक स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, इनमें लगभग 70 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर हैं। नए बिजली कनेक्शन पर लगभग अनिवार्य रूप से प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे थे। इसी को लेकर उपभोक्ताओं और कई संगठनों ने लगातार विरोध दर्ज कराया था।
क्यों हो रहा था विरोध?
आपको बता दें कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों की मुख्य शिकायतें थीं—
उपभोक्ता परिषद ने इसे “जनता की जीत” बताया
विदित है कि राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि “यह देशभर के बिजली उपभोक्ताओं की बड़ी जीत है। अब प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की सहमति से ही लगाया जाएगा।”
सरकार का अगला फोकस; गर्मी में बिजली सप्लाई सुधारना
इस बड़े फैसले के साथ ऊर्जा विभाग ने बिजली व्यवस्था को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा है कि गर्मियों में ट्रिपिंग बिल्कुल नहीं होनी चाहिए, ट्रांसमिशन लाइनें दुरुस्त रखी जाएं, उपकेंद्रों का निरीक्षण किया जाए नहीं तो खराब व्यवस्था पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
बिजली कर्मचारियों का आंदोलन भी तेज
आपको बता दें कि इधर बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारी संगठन भी आंदोलन तेज करने की तैयारी में हैं। संयुक्त संघर्ष समिति ने संकेत दिए हैं कि यदि निजीकरण प्रस्ताव वापस नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
आम उपभोक्ता के लिए इसका मतलब क्या है?
आपको बता दें कि अब अगर आपके घर स्मार्ट मीटर लगना है तो आपके पास विकल्प होगा:
प्रीपेड चुनें - पहले रिचार्ज, फिर बिजली
या
पोस्टपेड चुनें - बाद में बिल भुगतान
यानी अब फैसला विभाग नहीं, आपकी सुविधा करेगी।
उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था के इस बड़े बदलाव ने उपभोक्ताओं को राहत जरूर दी है। सरकार स्मार्ट मीटर तो लगाएगी, लेकिन अब भुगतान का तरीका जनता तय करेगी। जबरन प्रीपेड मीटर का दौर खत्म हो गया है। अब बिजली उपभोक्ता अपने बिल का तरीका खुद चुनेंगे।