देश में अब सभी नागरिकों के पास होगा 'अपना घर'!: सरकार ने किफायती आवासों के लिए बनाई नई रणनीति, सस्ते मकान के लिए जमीन से लेकर किराये तक के इन नियमों में होंगे बड़े बदलाव?
देश में अब सभी नागरिकों के पास होगा 'अपना घर'!

नई दिल्ली: देश में किफायती और सुरक्षित घर का सपना देखने वाले लोगों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार अब सिर्फ अलग-अलग आवास योजनाएं चलाने के बजाय किफायती मकानों का पूरा सिस्टम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका मकसद ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें कम और मध्यम आय वाले परिवारों के साथ-साथ प्रवासी मजदूरों, युवाओं, छात्रों और कामगारों को भी आसानी से सस्ता घर मिल सके। इसी मुद्दे पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से ‘किफायती आवास सुधारों पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ आयोजित किया गया। सम्मेलन का फोकस इस बात पर रहा कि भारत में अफोर्डेबल हाउसिंग को केवल सरकारी योजना न मानकर एक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले हाउसिंग इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जाए।

सस्ती जमीन मिलेगी तो घट सकती है घर की कीमत

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किफायती मकान बनाने में सबसे बड़ी अड़चनों में जमीन की ऊंची कीमत भी शामिल है। सम्मेलन में नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में किफायती आवास बढ़ाने के लिए भूमि और शहरी नियोजन में बड़े सुधार जरूरी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन पर लैंड-यूज चेंज फीस माफ की जा सकती है। इसके अलावा ऐसी आवासीय इकाइयों को स्टांप ड्यूटी से छूट देने का सुझाव भी दिया गया। इससे निर्माण की कुल लागत घट सकती है और डेवलपर्स के लिए कम कीमत वाले घर बनाना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है।

मास्टर प्लान में अलग होगा अफोर्डेबल हाउसिंग जोन

गौरतलब है कि नीति आयोग और आवास मंत्रालय की संयुक्त रिपोर्ट में किफायती आवास के लिए बड़ा सुझाव दिया गया है। इसके तहत मास्टर प्लान में कम से कम 10 फीसदी आवासीय जमीन को अफोर्डेबल हाउसिंग जोन के तौर पर आरक्षित करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही ऐसे इलाकों में FAR यानी फ्लोर एरिया रेशियो 5 या 6 तक बढ़ाने, ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने और सरकारी स्तर पर भूमि बैंक तैयार करने की बात कही गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में सरकार ऐसी जगहों को चिन्हित कर सकती है, जहां बड़ी संख्या में कम कीमत वाले मकान बनाए जा सकें और लोगों को रोजगार तथा परिवहन सुविधाओं के नजदीक आवास मिल सके।

किराए के सस्ते मकानों पर भी जोर

विदित है कि हर व्यक्ति के लिए तुरंत अपना मकान खरीदना संभव नहीं होता। खासकर दूसरे शहरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर, छात्र, युवा और औद्योगिक कामगार अक्सर किराए के मकान पर निर्भर रहते हैं। इसीलिए सरकार की चर्चा में रेंटल हाउसिंग भी प्रमुख मुद्दा रहा। टेनेंसी सिस्टम में सुधार और किराए के मकानों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इस क्षेत्र में निजी निवेश और वित्तीय संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई, ताकि अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग के लिए पूंजी की कमी न हो।

PMAY-U 2.0 से 1 करोड़ परिवारों को मदद का लक्ष्य

गौरतलब है कि सरकार पहले से ही प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) के जरिए शहरी परिवारों को आवास उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। अब इसका अगला चरण PMAY-U 2.0 है। इस योजना के तहत मांग आधारित व्यवस्था के जरिए 1 करोड़ अतिरिक्त पात्र शहरी परिवारों को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें आधुनिक तकनीक, आसान वित्तीय पहुंच और सरकारी संस्थाओं के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि किफायती आवास सिर्फ लोगों को छत देने की योजना नहीं है। इससे निर्माण क्षेत्र में रोजगार बढ़ सकता है, आर्थिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं और शहरों का विकास भी ज्यादा व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है।

आगे क्या बदलेगा?

सम्मेलन में जमीन और शहरी नियोजन, किराए के मकानों का विस्तार, खाली पड़ी आवासीय संपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल और सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। फिलहाल ये सभी सुझाव और नीतिगत विचार हैं। इन्हें अलग-अलग राज्यों और संबंधित विभागों के स्तर पर लागू करने के लिए आगे की प्रक्रिया जरूरी होगी। यानी हर नागरिक को तुरंत मुफ्त या सस्ता घर मिलने की घोषणा नहीं हुई है, बल्कि सरकार किफायती आवास की लागत और उपलब्धता से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए एक व्यापक व्यवस्था तैयार करने पर काम कर रही है।

अगर प्रस्तावित सुधार जमीन पर उतरते हैं तो सस्ती जमीन, कम टैक्स-फीस, बेहतर प्लानिंग, आसान वित्त और रेंटल हाउसिंग के विस्तार के जरिए शहरी क्षेत्रों में किफायती घरों की सप्लाई बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।

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