दिल्ली-यूपी समेत 4 राज्यों को जोड़ेगा हाईस्पीड ऑर्बिटल रेल नेटवर्क!: इससे 3 चरणों में जुड़ेंगे ये 25 शहर, वहीं 2029 में...जानें क्या हैं ऑर्बिटल रेल नेटवर्क और कैसे बदल देगा पूरे NCR की तस्वीर
दिल्ली-यूपी समेत 4 राज्यों को जोड़ेगा हाईस्पीड ऑर्बिटल रेल नेटवर्क!

नई दिल्ली : आने वाले वर्षों में दिल्ली-एनसीआर की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। बढ़ती आबादी, ट्रैफिक जाम और शहरों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब एक विशाल ऑर्बिटल रेल नेटवर्क तैयार करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के जरिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के करीब 25 शहरों को हाईस्पीड रेल कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा।

NCR मास्टरप्लान के तहत तैयार होगी योजना :

आपको बता दें कि एनसीआर मास्टर प्लान-2041 के तहत तैयार हो रही इस योजना का उद्देश्य सिर्फ तेज सफर उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों पर बढ़ रहे आबादी के बोझ को कम करना भी है।

15 करोड़ आबादी की चुनौती से निपटने की तैयारी

अनुमान है कि आने वाले करीब 15 वर्षों में एनसीआर क्षेत्र की आबादी तेजी से बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार ऐसी परिवहन व्यवस्था तैयार करना चाहती है, जिससे लोग छोटे शहरों में रहते हुए भी बड़े रोजगार और औद्योगिक केंद्रों से आसानी से जुड़ सकें। इसी सोच के साथ सड़क की रिंग रोड व्यवस्था की तरह रेल आधारित ऑर्बिटल कॉरिडोर तैयार किया जाएगा, जिससे एनसीआर के शहर आपस में सीधे जुड़ सकेंगे।

तीन चरणों में तैयार होगा विशाल रेल नेटवर्क

गौरतलब है कि इस पूरे प्रोजेक्ट को तीन बड़े चरणों में विकसित करने की योजना बनाई गई है।

पहला चरण: KMP-KGP के आसपास दौड़ेगी रेल

पहले चरण में कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (KGP) और कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास रेल नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे पलवल, खुर्जा, मेरठ, बागपत और सोनीपत जैसे शहरों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर के जरिए सोनीपत से पलवल तक रेल संपर्क को मजबूत किया जा रहा है।

दूसरा चरण: उद्योगों को मिलेगी नई ताकत

दूसरे ऑर्बिटल कॉरिडोर का फोकस औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने पर रहेगा। इसके तहत सोनीपत, शामली, मेरठ, जेवर, नूंह, भिवाड़ी, रेवाड़ी, झज्जर, रोहतक और पानीपत जैसे शहर एक मजबूत रेल नेटवर्क का हिस्सा बनेंगे। इससे जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, भिवाड़ी और रेवाड़ी जैसे औद्योगिक केंद्रों तक पहुंच आसान होगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

तीसरा चरण: बाहरी NCR तक पहुंचेगी रेल कनेक्टिविटी

तीसरे चरण में एनसीआर के बाहरी शहरों को जोड़ने की तैयारी है। इसमें करनाल, जींद, भिवानी, महेंद्रगढ़, नारनौल, बहरोड़, अलवर, डिबाई, गढ़मुक्तेश्वर, हस्तिनापुर और मुजफ्फरनगर जैसे शहर शामिल किए जा सकते हैं। इस चरण के लिए व्यवहार्यता अध्ययन (फिजिबिलिटी स्टडी) पर काम किया जा रहा है।

क्या है ऑर्बिटल रेल नेटवर्क?

आपको बता दें कि ऑर्बिटल रेल नेटवर्क एक रिंग जैसी रेल व्यवस्था है, जो बड़े शहर के चारों ओर बनती है और आसपास के शहरों को जोड़ती है। इससे ट्रेनें मुख्य शहर में आए बिना ही एक जगह से दूसरी जगह जा सकती हैं, जिससे समय बचता है और ट्रैफिक कम होता है। दिल्ली-NCR में प्रस्तावित यह नेटवर्क आसपास के राज्यों यूपी, हरियाणा, राजस्थान जैसे राज्यों के शहरों को सीधे जोड़ेगा और विकास को बढ़ावा देगा।

2029 तक पहला चरण पूरा करने का लक्ष्य

आपको बता दें कि पहले चरण को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। करीब 126 किलोमीटर लंबे हिस्से पर लगभग 11,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार होने के बाद आगे की मंजूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

नमो भारत और रैपिड रेल से भी जुड़ेगा नेटवर्क

गौरतलब है कि इस ऑर्बिटल रेल सिस्टम को दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर के साथ प्रस्तावित दिल्ली-पानीपत और दिल्ली-अलवर रैपिड रेल लाइनों से जोड़ने की योजना है। ऐसा होने पर एनसीआर के कई शहर हाईस्पीड रेल नेटवर्क के दायरे में आ जाएंगे और यात्रियों को तेज सफर का विकल्प मिलेगा।

माल ढुलाई होगी आसान, सड़कों पर कम होगा बोझ

इस प्रोजेक्ट को पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ने की भी तैयारी है। इससे माल ढुलाई तेज होगी और खर्च कम होने की उम्मीद है। रेल नेटवर्क शुरू होने के बाद दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे, एनएच-44, डीएनडी और अन्य बड़े मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव घट सकता है।

छोटे शहरों में आएगा निवेश और रोजगार

विशेषज्ञों के अनुसार इस रेल कॉरिडोर से जुड़े बागपत, शामली, नूंह, झज्जर और अन्य शहरों में नई टाउनशिप, उद्योग और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट तेजी पकड़ सकते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से रोजगार के नए अवसर बनेंगे और दिल्ली-एनसीआर का विकास सिर्फ कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा।

कुल मिलाकर यह ऑर्बिटल रेल नेटवर्क आने वाले समय में एनसीआर के सफर, कारोबार और विकास की दिशा बदलने वाली बड़ी परियोजना साबित हो सकता है।

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