फाइनेंस: अगर आपने बैंक से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है, तो हर महीने ईएमआई की तारीख आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग सोचते हैं कि एक दिन देर से किस्त जमा करने पर आखिर कितना फर्क पड़ेगा? कुछ लोग तो यह भी मान लेते हैं कि बैंक दो-चार दिन की छूट जरूर देता होगा। लेकिन हकीकत इससे अलग हो सकती है। ईएमआई तय तारीख पर जमा नहीं हुई, तो बैंक आपके खाते में बकाया दर्ज कर सकता है और लेट पेमेंट चार्ज भी लगा सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि सिर्फ एक दिन की देरी से आपका CIBIL स्कोर तुरंत गिर जाए, यह जरूरी नहीं है।
एक दिन देर से EMI भरी तो क्या बैंक लगाएगा जुर्माना?
मान लीजिए आपकी ईएमआई हर महीने की 5 तारीख को कटती है, लेकिन खाते में पर्याप्त पैसे नहीं होने के कारण किस्त 6 तारीख को जमा हो पाती है। ऐसी स्थिति में बैंक भुगतान में देरी मान सकता है। बैंक आपके लोन की शर्तों और अपनी घोषित नीति के अनुसार लेट पेमेंट चार्ज या अन्य लागू शुल्क वसूल सकता है। यह जरूरी नहीं कि हर बैंक कुछ दिनों का ग्रेस पीरियड दे। कुछ मामलों में बैंक भुगतान के लिए अतिरिक्त समय दे सकता है, लेकिन यह सुविधा मिलने का मतलब यह नहीं कि उस अवधि में लगने वाला शुल्क भी माफ हो जाएगा। इसलिए लोन लेते समय उसकी शर्तों को समझना जरूरी है।
RBI के नियम क्या कहते हैं, क्या बैंक मनमाना जुर्माना वसूल सकता है?
आपको बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कर्ज की किस्त या अन्य भुगतान में चूक पर लगाए जाने वाले दंडात्मक शुल्क को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए हैं। बैंक और दूसरे विनियमित कर्जदाता मनमाने तरीके से पेनल चार्ज नहीं लगा सकते। शुल्क उचित होना चाहिए और उसकी जानकारी लोन समझौते में स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। एक अहम नियम यह भी है कि पेनल चार्ज को लोन की मूल रकम में जोड़कर उस पर दोबारा ब्याज नहीं लगाया जा सकता। यानी जुर्माने पर फिर से ब्याज वसूलने के लिए उसे मूल कर्ज का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
क्या एक दिन की देरी से CIBIL स्कोर गिर जाएगा?
गौरतलब है कि यह सवाल सबसे ज्यादा लोगों को परेशान करता है। दरअसल, एक दिन की देरी का मतलब यह नहीं कि आपका क्रेडिट स्कोर तुरंत काफी नीचे चला जाएगा। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि बैंक या वित्तीय संस्थान भुगतान की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को कब और किस स्थिति में भेजता है। क्रेडिट रिपोर्ट में भुगतान का रिकॉर्ड दर्ज होना महत्वपूर्ण है। यदि भुगतान में देरी की जानकारी रिपोर्ट में दर्ज हो जाती है, तो भविष्य में बैंक आपकी लोन चुकाने की आदत का आकलन करते समय इसे देख सकते हैं। ऐसी जानकारी कई वर्षों तक क्रेडिट रिकॉर्ड में दिखाई दे सकती है। इसलिए यह मानकर न चलें कि अगले दिन किस्त भर देने से देरी का रिकॉर्ड हर हाल में मिट जाएगा।
क्या सात साल तक क्रेडिट रिपोर्ट में दिख सकती है EMI की देरी?
अगर आपकी EMI देर से जमा हुई और बैंक ने इसकी जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को रिपोर्ट कर दी, तो भुगतान में हुई चूक आपकी क्रेडिट हिस्ट्री में दर्ज हो सकती है। ऐसी जानकारी सामान्यतः 7 साल तक क्रेडिट रिपोर्ट में बनी रह सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर एक दिन की देरी अपने आप सात साल तक रिपोर्ट में दर्ज हो जाएगी। यह इस बात पर निर्भर करता है कि बैंक ने भुगतान की स्थिति किस तरह रिपोर्ट की है।
30 दिन और 90 दिन की देरी बन सकती है बड़ी मुसीबत
विदित है कि अगर ईएमआई बार-बार देर से जमा होती है, तो इसका असर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर बढ़ सकता है। 30 दिन या उससे अधिक समय तक बकाया रहने पर भुगतान में चूक की गंभीरता बढ़ जाती है। वहीं, सामान्य बैंकिंग नियमों के तहत टर्म लोन में मूलधन या ब्याज 90 दिनों से अधिक समय तक बकाया रहने पर खाता एनपीए यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति घोषित किया जा सकता है। यह स्थिति कर्ज लेने वाले के लिए काफी गंभीर होती है।
EMI छूट जाए तो तुरंत क्या करें?
यदि आपकी किस्त समय पर नहीं कट पाई है, तो सबसे पहले बकाया रकम जमा करें। ऑटो-डेबिट की सुविधा होने के बावजूद पैसा नहीं कटा है, तो बैंक से संपर्क कर इसकी वजह पता करें। भुगतान की रसीद और बैंक स्टेटमेंट सुरक्षित रखें। अगर क्रेडिट रिपोर्ट में गलत जानकारी दर्ज हो गई है, तो बैंक और संबंधित क्रेडिट ब्यूरो में शिकायत करें।
ईएमआई में एक दिन की देरी को मामूली गलती समझना भारी पड़ सकता है। भले ही CIBIL स्कोर तुरंत गिरना तय न हो, लेकिन लेट फीस और क्रेडिट रिकॉर्ड पर असर का जोखिम बना रहता है। इसलिए हर महीने किस्त की तारीख से पहले खाते में पर्याप्त बैलेंस रखना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।