वाराणसी: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में जल्द ही सफर का अंदाज पूरी तरह बदलने वाला है। शहर की संकरी सड़कों, भीषण ट्रैफिक और घंटों लगने वाले जाम से परेशान लोगों को अब आसमान के रास्ते सफर करने की सुविधा मिलने जा रही है। वाराणसी में देश का पहला अर्बन रोपवे लगभग तैयार हो चुका है। परियोजना का 96 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा होने का दावा किया जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया (काशी विश्वनाथ के पास वाला चौराहा) तक की दूरी महज 16 मिनट में तय की जा सकेगी। करीब 807 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना से स्थानीय लोगों के साथ-साथ काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
पांच स्टेशनों से होकर गुजरेगा रोपवे
आपको बता दें कि कैंट से गोदौलिया के बीच लगभग 3.85 किलोमीटर लंबे मार्ग पर पांच स्टेशन बनाए गए हैं। इनमें कैंट, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरिजाघर और गोदौलिया शामिल हैं। रोपवे के गंडोले जमीन से लगभग 50 फीट की ऊंचाई पर चलेंगे। इस रूट पर स्विट्जरलैंड की कंपनी बार्थोलेत के 153 गंडोले लगाए जा रहे हैं। प्रत्येक गंडोले में एक बार में 10 यात्री सफर कर सकेंगे। खास बात यह है कि यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हर दो मिनट में एक गंडोला स्टेशन पर पहुंचेगा।
सिर्फ 50 रुपये में पूरा सफर, हर स्टेशन का किराया 10 रुपये
गौरतलब है कि रोपवे का प्रस्तावित किराया आम यात्रियों की जेब को ध्यान में रखकर तय किया गया है। कैंट से गोदौलिया तक पूरे रूट का किराया 50 रुपये रखा गया है। वहीं, एक स्टेशन से अगले स्टेशन तक जाने के लिए 10 रुपये देने होंगे। इसके संचालन का प्रस्तावित समय सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक यानी लगभग 16 घंटे है। यात्री अपनी जरूरत के अनुसार बीच के किसी भी स्टेशन पर उतर सकेंगे। अभी कैंट से गोदौलिया तक सड़क मार्ग से करीब 7 किलोमीटर की दूरी तय करने में ऑटो से 30 से 40 मिनट लग जाते हैं। त्योहारों, सावन और धार्मिक आयोजनों के दौरान जाम की वजह से समय और बढ़ जाता है। रोपवे शुरू होने के बाद इस परेशानी से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
मेट्रो जैसे होंगे स्टेशन, सामान की भी होगी जांच
विदित है कि रोपवे के स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे। यात्रियों को प्रवेश के समय सामान की जांच करानी होगी। इसके बाद टिकट लेकर उसे स्कैन करना होगा और फिर प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकेंगे। स्टेशन के अंदर वेटिंग हॉल भी बनाया गया है, जिससे भीड़ होने पर यात्रियों को परेशानी न हो। स्टेशनों की सजावट में काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी शामिल किया जा रहा है। गंगा, घाट, भगवान शिव, डमरू और त्रिशूल से जुड़ी आकृतियां यहां देखने को मिलेंगी।
बिजली जाने पर भी नहीं फंसेंगे यात्री
सुरक्षा के लिए रोपवे में बैकअप सिस्टम लगाया गया है। बिजली या मुख्य ड्राइव सिस्टम में खराबी आने पर इसकी मदद से गंडोलों को नजदीकी स्टेशन तक पहुंचाया जा सकेगा। टावरों पर लगे एनीमोमीटर हवा की गति पर नजर रखेंगे। हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने पर सिस्टम स्वतः बंद हो जाएगा। प्रत्येक गंडोले का अलग नंबर होगा और परेशानी होने पर यात्री हेल्पलाइन से कंट्रोल रूम को सूचना दे सकेंगे। रेस्क्यू टीम को स्विट्जरलैंड में प्रशिक्षण भी दिया गया है।
अंतिम चरण में निर्माण, तकनीकी जांच बाकी
परियोजना का 96 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है। पहले सेक्शन का निर्माण पूरा है, जबकि दूसरे सेक्शन में गोदौलिया स्टेशन पर यात्रियों के चढ़ने और उतरने से जुड़ा काम अंतिम चरण में है। फिलहाल विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी सुरक्षा, ऑटोमेशन और स्काडा सिस्टम की जांच की जा रही है।
काशी का यह रोपवे शहर की यातायात व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। हालांकि, यात्रियों को नियमित सफर की सुविधा मिलने के लिए बाकी निर्माण कार्य और सभी तकनीकी परीक्षण पूरे होने के बाद ही संचालन शुरू होगा।