देश भर में जनगणना 2027 की तारीखों का ऐलान!: 25 जनवरी से 28 फ़रवरी तक लोगों की गिनती, वहीं 95 साल बाद पहली बार...जानिए यूपी समेत इन 5 राज्यों में क्यों टली जनगणना प्रक्रिया?
देश भर में जनगणना 2027 की तारीखों का ऐलान!

नई दिल्ली: देश की बहुप्रतीक्षित जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने कार्यक्रम जारी कर दिया है। इस बार जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। आजादी के बाद यह देश की आठवीं जनगणना होगी और पहली बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि करीब 95 साल बाद जाति आधारित गणना भी की जाएगी। सरकार के मुताबिक, देश के अधिकांश राज्यों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना का काम चलेगा। हालांकि, उत्तर प्रदेश समेत कुछ चुनावी राज्यों और बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों को फिलहाल इस कार्यक्रम से बाहर रखा गया है।

कब से कब तक होगी जनगणना? जानिए पूरा शेड्यूल

आपको बता दें कि सरकारी अधिसूचना के अनुसार, आम नागरिकों को 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन का विकल्प मिलेगा। इस दौरान लोग निर्धारित पोर्टल पर अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक प्रगणक घर-घर जाकर जनगणना का काम करेंगे। लोगों द्वारा दी गई जानकारी का पुनरीक्षण करने के लिए 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक रिवीजन राउंड आयोजित होगा। जनगणना के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि 12 बजे निर्धारित की गई है। यानी इस तारीख को रात 12 बजे की स्थिति के आधार पर जनसंख्या से संबंधित आंकड़े तैयार किए जाएंगे।

यूपी समेत इन राज्यों में फिलहाल नहीं होगी गणना

गौरतलब है कि जनवरी-फरवरी के निर्धारित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर को शामिल नहीं किया गया है। इन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए जनगणना की तारीखें अलग से निर्धारित की जाएंगी। मणिपुर के लिए अगली घोषणा तक कार्यक्रम स्थगित रखा गया है। इसके अलावा लद्दाख और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों को भी इस चरण से बाहर रखा गया है। इन इलाकों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग कार्यक्रम जारी किया जाएगा।

95 साल बाद फिर होगी जाति की गिनती

विदित है कि इस जनगणना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में जाति गणना शामिल है। वर्ष 1931 के बाद पहली बार सामान्य जनगणना प्रक्रिया में जातियों से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे देश की सामाजिक संरचना से जुड़े आंकड़े जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

पहली बार डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया

जनगणना 2027 में प्रगणक पारंपरिक कागजी रजिस्टर के बजाय मोबाइल या टैबलेट के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे। इसके लिए करीब 30 लाख कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की योजना है। नागरिकों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का विकल्प भी मिलेगा। केंद्र सरकार ने इस व्यापक अभियान के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। यह पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत संचालित होगी।

आपकी निजी जानकारी रहेगी गोपनीय

सरकार के अनुसार, जनगणना के दौरान नागरिकों से प्राप्त व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रखी जाएगी। जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत इस जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता और न ही इसे सामान्य रूप से अदालत में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। गौरतलब है कि देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना कोरोना महामारी के कारण टाल दी गई थी।

जनगणना 2027 केवल लोगों की संख्या जानने का अभियान नहीं होगी, बल्कि डिजिटल तकनीक और जाति संबंधी आंकड़ों के कारण भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब लोगों को अपने राज्य के लिए जारी होने वाली अलग तारीखों और स्व-गणना की प्रक्रिया पर नजर रखनी होगी।

अन्य खबरे