अयोध्या : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब जांच एजेंसियों के सामने आए सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ से यह सामने आया है कि कथित चोरी कोई एक-दो बार की घटना नहीं थी, बल्कि सुनियोजित तरीके से लगातार की जा रही थी। जांच के अनुसार करीब 40 दिनों के भीतर चढ़ावे की रकम लगभग 70 बार निकाली गई। इनमें सबसे ज्यादा बार एक आरोपी कैमरे में रकम उठाते हुए दिखाई दिया।
एक आरोपी पर थी रकम निकालने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी
आपकी जानकारी के लिए बता दें क़ि जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्यों ने आपस में काम बांट रखा था। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार सबसे अधिक बार अविनाश शुक्ला चढ़ावे की रकम निकालते हुए दिखाई दिया। जांच एजेंसियों का दावा है कि करीब 50 बार वही रकम उठाते कैमरे में कैद हुआ। बाकी आरोपी उसके आसपास खड़े होकर निगरानी करते थे ताकि किसी को शक न हो।
पूरी योजना बनाकर किया जाता था काम
जांच में यह भी सामने आया कि कथित वारदात अचानक नहीं होती थी। पहले यह तय किया जाता था कि किस समय रकम निकाली जाएगी और कौन किस भूमिका में रहेगा। कुछ लोग निगरानी करते थे, जबकि तय आरोपी चढ़ावे की राशि निकालता था। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूरी प्रक्रिया पहले से तय योजना के तहत अंजाम दी जाती थी।
अन्य आरोपी भी करते थे रकम पार
गौरतलब है क़ि जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी के अलावा कुछ अन्य लोग भी समय-समय पर चढ़ावे की रकम निकालते थे। बाद में कथित रूप से निकाली गई राशि का आपस में बंटवारा किया जाता था। इस संबंध में जांच एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ के आधार पर कई तथ्य जुटाए हैं।
लगभग हर दिन दो बार निकाली जाती थी रकम
सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के विश्लेषण से पता चला है कि अधिकांश दिनों में दो बार चढ़ावे की रकम निकाली गई। कुछ दिनों में यह संख्या तीन तक भी पहुंची। जांच अधिकारियों के अनुसार यह सिलसिला लगातार कई सप्ताह तक चलता रहा और इसे बेहद सावधानी से अंजाम दिया जाता था।
CCTV फुटेज बने सबसे बड़े सबूत
विदित है क़ि पूरे मामले में सीसीटीवी फुटेज सबसे अहम साक्ष्य बनकर सामने आए हैं। पुलिस ने इन्हें अपनी विवेचना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। फुटेज के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों का क्रम तैयार किया गया है और पूछताछ में मिले बयानों का भी मिलान किया जा रहा है।
SIT जांच अंतिम चरण में, पुलिस जांच जारी
विशेष जांच दल (SIT) की विस्तृत जांच अंतिम चरण में बताई जा रही है। वहीं पुलिस की विवेचना अभी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, दस्तावेजों और आरोपियों के बयानों का मिलान करने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले में जिम्मेदारी और कथित नुकसान की अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।