देहरादून: बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित हेरफेर के मामले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ बद्रीनाथ थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306 और 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
CM धामी का सख्त संदेश
आपको बता दें कि मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीन सदस्यीय हाई लेवल कमेटी गठित कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी पवित्र धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ करना अक्षम्य अपराध है। उन्होंने इसे "महापाप" बताते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
गौरतलब है कि विवाद की शुरुआत 2 जुलाई की CCTV फुटेज सामने आने के बाद हुई। आरोप है कि सुबह करीब 9:00 से 9:30 बजे के बीच चढ़ावा गणना केंद्र से मंदिर की धनराशि निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत निकाली गई। इसके बाद काल भैरव सेना ने 3 जुलाई को बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के मुख्य कार्याधिकारी को लिखित शिकायत देकर जांच की मांग की।
CCTV फुटेज के बाद कर्मचारी निलंबित
सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद BKTC ने आंतरिक जांच कराई। प्रारंभिक जांच में अनियमितता के संकेत मिलने पर अध्यक्ष कार्यालय में तैनात प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया गया। समिति का दावा है कि CCTV फुटेज में वे चढ़ावा गणना के दौरान सामान्य प्रक्रिया से अलग कुछ सामान अपने मोबाइल के साथ रखते हुए दिखाई दिए।
खंगाली जाएगी 40 दिन की रिकॉर्डिंग
विदित है कि जांच अब केवल 2 जुलाई की घटना तक सीमित नहीं रहेगी। मंदिर परिसर में लगे 32 CCTV कैमरों की लगभग 40 दिनों की रिकॉर्डिंग की जांच होगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की घटना पहले भी हुई थी या नहीं। साथ ही चढ़ावा गणना की पूरी प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी।
20-25 लैपटॉप का रिकॉर्ड भी गायब
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार पिछले 10 से 12 वर्षों में SBI, PNB और कैनरा बैंक द्वारा मंदिर समिति को दिए गए लगभग 20 से 25 लैपटॉप का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला है। स्टॉक रजिस्टर में भी उनका उल्लेख नहीं है। अब इन उपकरणों और अन्य संपत्तियों की भी जांच की जाएगी।
15 दिन में रिपोर्ट देगी हाई लेवल कमेटी
सरकार ने गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई है। समिति में पूर्व चमोली जिलाधिकारी एवं NHM के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वित्त निदेशक जगत सिंह चौहान भी शामिल हैं। समिति पूरे मामले की जांच कर 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।
जांच के केंद्र में कई बड़े सवाल
जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि प्रमोद नौटियाल को चढ़ावा गणना और प्रोटोकॉल जैसी जिम्मेदारियां किसके आदेश पर सौंपी गईं। साथ ही यह भी जांच होगी कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं और यदि कहीं लापरवाही हुई तो उसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।
कौन हैं प्रमोद नौटियाल?
प्रमोद नौटियाल वर्ष 2014 में इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के रूप में बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति से जुड़े थे। बाद में उन्हें निजी सहायक और फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। हालांकि BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि नौटियाल उनके निजी सचिव नहीं, बल्कि समिति के कर्मचारी थे।
BKTC ने दी अपनी सफाई
BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी का कहना है कि आरोप सामने आते ही सभी CCTV फुटेज और रिकॉर्ड सुरक्षित कर लिए गए थे तथा उसी दिन जांच समिति गठित कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच में संदेह मिलने पर संबंधित कर्मचारी को निलंबित किया गया और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
पहले भी विवादों में रह चुकी है समिति
BKTC पहले भी कई विवादों को लेकर चर्चा में रही है। वर्ष 2023 में ऑनलाइन दान के लिए लगाए गए QR कोड और दान राशि के उपयोग पर सवाल उठे थे। वहीं 2020 में कथित अवैध नियुक्तियों का मामला भी सामने आया था। अब चढ़ावा विवाद ने एक बार फिर समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विपक्ष और BSP ने उठाई जांच की मांग
कांग्रेस ने पूरे मामले में मंदिर समिति के नेतृत्व की नैतिक जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की है। बद्रीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने तीन वर्तमान न्यायाधीशों की समिति से जांच कराने की मांग उठाई है। वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की है।
एफआईआर दर्ज होने और हाई लेवल जांच शुरू होने के बाद अब सभी की नजर 15 दिनों में आने वाली जांच रिपोर्ट पर है। इसी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि कथित हेरफेर कैसे हुआ, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई और इस पूरे मामले में आखिर जिम्मेदार कौन है। क्योंकि बद्रीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई को लेकर लोगों की उम्मीदें सरकार और जांच एजेंसियों से बढ़ गई हैं।