ऋषिकेश : योग नगरी ऋषिकेश अब सिर्फ आध्यात्म और गंगा आरती के लिए ही नहीं, बल्कि एक बड़े सामाजिक प्रयोग के लिए भी चर्चा में है। नगर निगम ने शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने की दिशा में सख्त फैसला लेते हुए मंदिरों, स्कूलों और गंगा घाटों के 200 मीटर दायरे में तंबाकू बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी है। यह फैसला लागू होते ही ऋषिकेश उत्तराखंड का पहला ऐसा शहर बन गया, जहां इस तरह का सख्त “तंबाकू नियंत्रण मॉडल” शुरू किया गया है।
200 मीटर का ‘नो टोबैको ज़ोन’; कहां-कहां रहेगा बैन :
आपको बता दें किनगर निगम की नई उपविधि के अनुसार अब इन जगहों के आसपास तंबाकू नहीं बिकेगा। मंदिर परिसर, सभी स्कूल व शिक्षण संस्थान, गंगा घाट, धार्मिक स्थल और सार्वजनिक पूजा स्थल; अगर कोई दुकानदार इस दायरे में बिक्री करता मिला तो उसका लाइसेंस रद्द किया जाएगा व चालान और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब बिना रजिस्ट्रेशन तंबाकू बेचना नामुमकिन :
गौरतलब है कि नगर निगम ने साफ कर दिया है कि शहर में तंबाकू बेचने के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। शहर में 134 दुकानों की पहचान की गई है। 18 दुकानों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है। बाकी दुकानों को जल्द प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह व्यापार बंद कराने का कदम नहीं, बल्कि नियंत्रित और जवाबदेह व्यवस्था बनाने की शुरुआत है।
फैसला क्यों लिया गया?
विदित है कि नगर निगम के मुताबिक दो मुख्य वजहें हैं:
धार्मिक मर्यादा की रक्षा
ऋषिकेश को देवभूमि का द्वार और अंतरराष्ट्रीय योग राजधानी माना जाता है इसलिए धार्मिक स्थलों के आसपास नशे से दूरी जरूरी है।
नई पीढ़ी को बचाने की कोशिश
तंबाकू को “धीमा जहर” बताते हुए कहा गया कि स्कूलों के पास बिक्री रोकने से बच्चों पर असर कम होगा।
देश में चुनिंदा शहरों में लागू मॉडल :
आपको बता दें कि यह मॉडल पूरे भारत में अभी सिर्फ 7-8 शहरों में लागू है। अब ऋषिकेश भी इस सूची में शामिल होकर राज्य का पहला उदाहरण बन गया है।
प्रशासन क्या कह रहा :
विदित है कि नगर निगम अधिकारियों का दावा है कि इससे जन-स्वास्थ्य सुधरेगा, नशे की उपलब्धता कम होगी और शहर की आध्यात्मिक पहचान मजबूत होगी। और सबसे अहम पर्यटन, स्वास्थ्य व संस्कृति तीनों को साथ लेकर चलने की कोशिश है।
आगे क्या होगा?
गौरतलब है कि अब निगरानी अभियान चलाया जाएगा, घाटों और स्कूलों के आसपास विशेष जांच होगी, और नियम तोड़ने वालों पर सीधे कार्रवाई होगी।
सरकार ने साफ संदेश है। ऋषिकेश ने एक प्रयोग शुरू किया है अगर सफल रहा तो जल्द ही दूसरे शहरों में भी ऐसा मॉडल लागू हो सकता है। देवभूमि ने संकेत दे दिया है कि आध्यात्मिक शहरों में अब नशे की जगह बिल्कुल नहीं है।