शनिवार स्पेशल: शनिवार आते ही लोगों के मन में शनि देव का नाम आते ही एक अलग ही रहस्य और डर का मिश्रण पैदा होता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनि देव उन देवताओं में से हैं जो कर्मों के आधार पर फल देते हैं न ज्यादा, न कम। यही कारण है कि शनिवार के दिन कुछ विशेष कामों को करने की सख्त मनाही मानी गई है।
शनिवार को भूलकर भी न करें ये 7 काम, शनि के कोप का कारण बनते हैं ये कार्य
1️⃣ बाल, दाढ़ी या नाखून काटना
ज्योतिष कहता है कि शनिवार को यह कार्य शनि को अप्रसन्न करता है। शनि अनुशासन और संयम के देवता हैं, इसलिए इन शारीरिक सज्जा-संबंधी कार्यों को अशुभ माना गया है।
2️⃣ लोहे, भारी धातु या झाड़ू जैसे सामान खरीदना
शनि का वाहन और तत्व ‘लोहा’ है। इसलिए शनिवार को लोहा खरीदना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे अनावश्यक बाधाएं और आर्थिक रुकावटें बढ़ सकती हैं।
3️⃣ नमक, तेल या काली उड़द खरीदना
ये सभी वस्तुएं शनि से जुड़ी हैं। शनिवार को इन्हें खरीदने से गृहस्थ जीवन और आर्थिक स्थिति पर शनि का कठोर प्रभाव पड़ सकता है।
4️⃣ मांसाहार, शराब या किसी भी तरह के नशे का सेवन
शनि देव धर्म, संयम और अनुशासन के देवता हैं। नशा और मांसाहार जैसे कार्य उनके सिद्धांतों के विपरीत माने जाते हैं।
5️⃣ गरीबों, बुजुर्गों या जरूरतमंदों के साथ दुर्व्यवहार
शनि ‘न्याय के देवता’ हैं। वह गरीबों, श्रमिकों और पीड़ितों के रक्षक माने जाते हैं। किसी भी जरूरतमंद को दुख देने से शनि तुरंत अप्रसन्न होते हैं।
6️⃣ बेटी को मायके भेजना या बड़े पारिवारिक फैसले लेना
पुरानी मान्यताओं के अनुसार, शनिवार को ऐसे कार्य परिवारिक संबंधों में तनाव ला सकते हैं। इसलिए इस दिन बड़े निर्णय टालने की सलाह दी जाती है।
7️⃣ शनिवार को अनावश्यक खर्च या उधार देना
उधार देना इस दिन अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इससे धन वापस आने में बाधा और आर्थिक हानि हो सकती है।
कौन हैं शनि देव? क्यों इन्हें ‘कर्मफलक दाता’ कहा जाता है?
1️⃣ शनि का जन्म और परिवार
शनि सूर्य देव व छाया (संख्या) के पुत्र हैं।
इनके भाई यमराज हैं और बहन भद्रा।
शनि और सूर्य के बीच संबंध जन्म से ही जटिल रहे, इसी कारण शनि को ‘कठोर दृष्टि वाला ग्रह’ कहा गया।
2️⃣ न्याय के देवता, कर्मों का तराजू
शनि हर मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं।
अच्छा कर्म: सुरक्षा व उन्नति
बुरा कर्म: कठिन परीक्षा, कष्ट और अवरोध
इसी वजह से शनि देव से दुनिया सबसे ज्यादा डरती है।
शनि की दृष्टि क्यों इतनी प्रभावशाली मानी जाती है?
ज्योतिष में शनि की तीसरी, सातवीं और दसवीं दृष्टि बेहद भारी मानी गई है। कहा जाता है कि इनकी दृष्टि मनुष्य के जीवन को झकझोर देती है लेकिन अंत में सुधार और सीख भी देती है।
साढ़ेसाती और ढैय्या, जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा
साढ़ेसाती (7.5 वर्ष)
यह वह समय होता है जब शनि जीवन में संघर्ष, अनुशासन और वास्तविकता की कड़ी परीक्षा लेते हैं।
ढैय्या (2.5 वर्ष)
यह अवधि मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों वाला समय माना जाता है।
लेकिन ध्यान रहे शनि परेशान भले करें, पर अन्याय नहीं करते। वह सिर्फ वही देते हैं जो हम कर्मों में बोते हैं।
शनि का वाहन और प्रतीक
•वाहन: काला कौवा, गिद्ध
•धातु: लोहा
•रत्न: नीलम
•रंग: काला, नीला
•द्रव्य: तेल, काले तिल, उड़द
कृष्ण वर्ण के कारण शनि को ग्रहों में सबसे रहस्यमय माना गया है।
हनुमान-शनि संबंध: पौराणिक कथा
लंका युद्ध में रावण ने शनि को कैद कर रखा था। हनुमान जी ने उन्हें मुक्त किया, तब शनि बोले “जो मेरी शरण में आए और हनुमान की आराधना करे, मैं उसे कष्ट कम दूँगा।”इसीलिए शनिवार को हनुमान चालीसा का विशेष महत्व है।
शनिवार को ये शुभ कार्य अवश्य करें
•पीपल के नीचे सरसों के तेल का दिया
•काले तिल या उड़द का दान
•हनुमान चालीसा
•गाय/कुत्ते को रोटी
•श्रमिकों, गरीबों की सेवा
ये उपाय शनि को प्रसन्न करने वाले माने जाते हैं।
अंत में शनिदेव डराते नहीं, सुधारते हैं
शनिदेव का उद्देश्य मनुष्य को सत्कर्म और सत्य के मार्ग पर ले जाना है। उनका क्रोध दंड नहीं, बल्कि सुधार है। अगर आप शनिवार को कुछ बातों का ध्यान रखें और अपने कर्मों को शुद्ध रखें तो शनिदेव आशिर्वाद भी देते हैं और संकट भी दूर करते हैं।