धर्म : इस वर्ष होली का पर्व सामान्य वर्षों से अलग तिथियों और विशेष ज्योतिषीय योगों के कारण चर्चा में है। शास्त्रीय गणना, भद्रा काल और चंद्रग्रहण के कारण होलिका दहन और रंगोत्सव के समय में बदलाव हुआ है। पंडितों और पंचांग के अनुसार, होलिका दहन 2 मार्च की आधी रात के बाद होगा, जबकि रंगों की होली 4 मार्च को मनाई जाएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक रहेगी। लेकिन पूर्णिमा लगते ही भद्रा काल भी शुरू हो जाएगा, जो पूरी रात रहेगा। धर्म शास्त्रों के अनुसार भद्रा के मुख काल में होलिका दहन करना वर्जित माना गया है, इसलिए इस बार श्रद्धालुओं को भद्रा के पुच्छ काल का इंतजार करना होगा।
रात 12:50 बजे से 2:02 बजे तक (3 मार्च की सुबह)
यही समय होलिका दहन के लिए शास्त्रसम्मत और शुभ माना गया है।
ज्योतिषीयों के अनुसार, इस समय होलिका पूजन और दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
गौरतलब है कि इस बार 3 मार्च को चंद्रग्रहण भी लग रहा है।
•ग्रहण शुरू: दोपहर 3:20 बजे
•ग्रहण समाप्त: शाम 6:46 बजे
•भारत में दिखाई देगा: शाम 6:14 बजे से 6:46 बजे तक
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जो इस बार सुबह 9:20 बजे से शुरू होगा। सूतक काल में किसी भी शुभ कार्य, पूजा या त्योहार मनाना वर्जित माना जाता है। इसी कारण 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी।
विदित है कि पंचांग के अनुसार, 4 मार्च की सुबह सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी, और शास्त्रों में इसी दिन रंगोत्सव मनाने का नियम बताया गया है। इसलिए पूरे देश में 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी। यह दिन पारंपरिक रूप से खुशी, भाईचारे और रंगों के उत्सव का प्रतीक होगा।
गौरतलब है कि होलिका दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन अग्नि में पुराने नकारात्मक भाव, रोग और बाधाओं का अंत होता है।
•पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें
•रोली, गुलाल, नारियल, कच्चा सूत, अनाज और जल से पूजा करें
•परिवार सहित होलिका की परिक्रमा करना शुभ माना जाता है
•अगले दिन होलिका की राख को पवित्र माना जाता है
आपको बता दें कि इस बार के होली के खास होने के कई कारण हैं। इस बार भद्रा काल के कारण आधी रात में होलिका दहन होगा। चंद्रग्रहण के कारण रंगोत्सव की तारीख बदली है। जिस वजह से 4 मार्च को पूरे देश में रंगों की होली खेली जाएगी।
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि शास्त्रों के अनुसार सही मुहूर्त में होलिका दहन और सही तिथि पर रंगोत्सव मनाने से ही त्योहार का पूर्ण पुण्य