पश्चिम एशिया में युद्ध से नोएडा में लगभग 1200 करोड़ का कारोबार ठप!: पोर्ट पर फंसा करोड़ो का माल, एक्सपोर्ट बुरी तरह प्रभावित, वहीं छोटे उद्योग...जानें किन उत्पादों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर_एक नज़र
पश्चिम एशिया में युद्ध से नोएडा में लगभग 1200 करोड़ का कारोबार ठप!

नोएडा : पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के असर अब भारत की औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचने लगे हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र नोएडा की इंडस्ट्री पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। गल्फ देशों के साथ व्यापार लगभग ठहरने की स्थिति में पहुंच गया है, जिसके चलते निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। उद्योग संगठनों के अनुसार नोएडा से हर महीने लगभग 1200 करोड़ रुपये का तैयार माल खाड़ी देशों को भेजा जाता है। लेकिन क्षेत्र में चल रहे सैन्य तनाव, शिपिंग सेवाओं में बाधा और अंतरराष्ट्रीय परिवहन की अनिश्चितता के कारण यह निर्यात फिलहाल बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

पोर्ट पर फंसा 800 करोड़ का माल :

उद्योगपतियों के मुताबिक करीब 800 करोड़ रुपये का माल दो सप्ताह पहले निर्यात के लिए भेजा गया था, लेकिन अब वह विभिन्न पोर्ट पर फंसा हुआ है। जहाजों की आवाजाही कम होने और कई शिपिंग लाइनों के अस्थायी रूप से बंद होने से कंटेनर आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। इस वजह से बड़ी संख्या में कंटेनर डंपिंग यार्ड में खड़े हैं, जबकि कई कंपनियों में तैयार माल फैक्ट्रियों के अंदर ही जमा हो गया है।

किन उत्पादों पर पड़ा असर :

गौरतलब है कि निर्यात में शामिल प्रमुख उत्पादों में शामिल हैं:

•पैकेज्ड फूड प्रोडक्ट
•रेडीमेड गारमेंट्स
•ज्वेलरी और फैशन एक्सेसरीज
•इलेक्ट्रॉनिक सामान
•मशीनरी और औद्योगिक पार्ट्स

इनमें से कई उत्पाद ऐसे होते हैं जिनकी एक निश्चित समय सीमा होती है। खासकर फूड और फैशन से जुड़े सामान में देरी होने पर उनकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित

विदित है कि निर्यात कारोबार से जुड़े उद्योगपतियों का कहना है कि नोएडा से सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन, इराक और ईरान जैसे देशों में बड़ी मात्रा में सामान भेजा जाता है। लेकिन मौजूदा हालात में पूरी सप्लाई चेन प्रभावित हो चुकी है। कई कंपनियों का माल जो पहले ही भेजा जा चुका था, वह पोर्ट और यार्ड में खड़ा है, जबकि जो माल भेजा जाना था वह फैक्ट्रियों में ही स्टोर कर लिया गया है।

कंपनियों को मिल रहे ‘ऑर्डर होल्ड’ के संदेश

आपको बता दें कि निर्यातक कंपनियों को गल्फ देशों के व्यापारिक साझेदारों की ओर से लगातार “ऑर्डर होल्ड” के संदेश मिल रहे हैं। कुछ कंपनियों को यह भी बताया गया है कि फिलहाल नए ऑर्डर जारी नहीं किए जाएंगे। इसका सीधा असर आने वाले महीनों में उत्पादन पर पड़ सकता है। अगर ऑर्डर कम होते हैं तो कंपनियों का कैश फ्लो प्रभावित होगा और रोजगार पर भी दबाव बढ़ सकता है।

छोटे उद्योगों के लिए सबसे बड़ा संकट :

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को होगा। कई कंपनियां पहले ही कच्चा माल खरीदकर उत्पादन कर चुकी हैं। अब तैयार माल लंबे समय तक स्टॉक में रखने से:

•गोदाम का खर्च बढ़ेगा
•बैंक की ईएमआई और ब्याज का दबाव बढ़ेगा
•मजदूरी और बिजली बिल का भुगतान मुश्किल होगा

इस स्थिति में कई उद्योगपतियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

अनिश्चितता के बीच बढ़ी चिंता

उद्योग जगत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्दी सामान्य नहीं हुए तो निर्यात कारोबार पर इसका गहरा असर पड़ेगा। नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर निर्यात पर निर्भर करती है, इसलिए वैश्विक संघर्ष का असर स्थानीय उद्योगों तक पहुंचना स्वाभाविक है।

फिलहाल कारोबारी उम्मीद कर रहे हैं कि स्थिति जल्द स्थिर हो और शिपिंग सेवाएं सामान्य हों, ताकि अटके हुए माल की सप्लाई फिर से शुरू हो सके।

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