लखनऊ : उत्तर प्रदेश में अब Ola, Uber और अन्य ऐप आधारित कैब सेवाओं से सफर करने वाले यात्रियों के लिए व्यवस्था पहले से ज्यादा सख्त और जवाबदेह होगी। राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026 लागू की है। इसके साथ ही एग्रीगेटर कंपनियों और डिजिटल परिवहन सेवाओं को नियमों के दायरे में लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर यात्रियों और कैब ड्राइवरों पर दिखाई देगा। अब बुकिंग के बाद कैब की देरी, राइड कैंसिल करने, ड्राइवर की रेटिंग और सुरक्षा जैसे मामलों के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं।
10 मिनट में कैब नहीं आई तो राइड कर सकेंगे कैंसिल
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नई व्यवस्था के तहत यदि बुकिंग के बाद कैब 10 मिनट के भीतर रिपोर्ट नहीं करती, तो यात्री राइड रद्द कर सकेगा। ऐसी स्थिति में ड्राइवर पर 100 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और यात्री को अगली बुकिंग में उसी राशि के बराबर राहत देने का प्रावधान है। वहीं, यात्री खुद बिना उचित कारण राइड रद्द करता है तो उससे किराये का 10 प्रतिशत, अधिकतम 100 रुपये तक, कैंसिलेशन शुल्क लिया जा सकता है।
ड्राइवर की मनमानी पर भी लगेगी लगाम
गौरतलब है कि अगर ड्राइवर बिना वैध कारण बुक की गई राइड कैंसिल करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य बुकिंग स्वीकार करने के बाद यात्रियों को परेशान करने या मनमाने तरीके से राइड रद्द करने की घटनाओं पर रोक लगाना है।
हर कैब में पैनिक बटन, लाइव ट्रैकिंग पर जोर
यात्रियों की सुरक्षा को नई नियमावली में खास महत्व दिया गया है। कैब में पैनिक बटन और वाहन लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने का प्रावधान है। यात्रा के दौरान जरूरत पड़ने पर यात्री अपनी लाइव लोकेशन साझा कर सकेगा। अगर वाहन निर्धारित मार्ग से अचानक हटता है तो संबंधित कंट्रोल रूम को अलर्ट मिलने की व्यवस्था भी की जा रही है। इससे संदिग्ध गतिविधियों की स्थिति में समय रहते निगरानी और कार्रवाई संभव होगी।
महिला यात्रियों के लिए भी विशेष व्यवस्था
विदित है कि कार पूलिंग के दौरान महिला यात्री की सुरक्षा को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। यदि वाहन में पहले से पुरुष यात्री मौजूद है और महिला यात्री को बैठाना है तो उसकी सहमति लेने की व्यवस्था होगी। संभव होने पर महिला यात्रियों के लिए महिला ड्राइवर की सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। यात्रा कराने वाले ड्राइवर की जानकारी ऐप पर कम से कम सात दिनों तक उपलब्ध रखने का प्रावधान है, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित जानकारी हासिल की जा सके।
ड्राइवर बनने के लिए अनुभव और प्रशिक्षण जरूरी
नई व्यवस्था में कैब ड्राइवर के लिए कम से कम दो साल का ड्राइविंग अनुभव जरूरी किया गया है। पिछले तीन वर्षों में किसी अपराध में दोषसिद्ध व्यक्ति के ड्राइवर के रूप में पात्र होने पर भी रोक रहेगी। हर ड्राइवर को 40 घंटे का प्रशिक्षण लेना होगा। इसमें सुरक्षित ड्राइविंग, आपात स्थिति में सहायता, ऐप का इस्तेमाल, यात्रियों से व्यवहार और मार्ग की जानकारी जैसे विषय शामिल होंगे।
खराब रेटिंग वालों की होगी ट्रेनिंग
गौरतलब है कि अब यात्रियों की रेटिंग भी ड्राइवरों के लिए महत्वपूर्ण होगी। कम रेटिंग वाले ड्राइवरों को दोबारा प्रशिक्षण से गुजरना पड़ेगा। जिनकी रेटिंग तय न्यूनतम स्तर से नीचे होगी, उन्हें नियमित प्रशिक्षण लेने का प्रावधान है।
कंपनियों के लिए लाइसेंस जरूरी
नई व्यवस्था केवल ड्राइवरों तक सीमित नहीं है। ऐप आधारित एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं को भी राज्य में संचालन के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत लाइसेंस लेना होगा। प्रस्तावित व्यवस्था में आवेदन शुल्क, लाइसेंस शुल्क और वाहनों की संख्या के आधार पर सुरक्षा जमा जैसी शर्तें भी रखी गई हैं। इसके लिए upmyfleet.com एग्रीगेटर पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से वाहनों और एग्रीगेटर सेवाओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने की योजना है।
12 साल तक पुराने वाणिज्यिक वाहनों को भी मौका
नई नियमावली में वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण की अधिकतम उम्र सीमा को भी बढ़ाया गया है। अब 12 साल तक पुराने वाणिज्यिक वाहनों के पंजीकरण की व्यवस्था होगी। पहले यह सीमा आठ वर्ष बताई गई थी।
सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से ऐप आधारित परिवहन सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और यात्रियों, ड्राइवरों तथा कंपनियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट होंगी। आने वाले समय में इन नियमों के प्रभाव से यह भी तय होगा कि कैब बुकिंग से लेकर यात्रा की सुरक्षा तक आम यात्रियों को वास्तव में कितनी राहत मिलती है।