लखनऊ : वाहन चलाने वालों के लिए 15 अगस्त से कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव होने जा रहा है। मोटर यान अधिनियम, 1988 में किए गए संशोधनों के बाद ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन बीमा, चालान, ओवरलोडिंग और सड़क की खराबी से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर व्यवस्था बदल जाएगी। खास बात यह है कि अब सड़क की खामी के कारण दुर्घटना होने पर केवल वाहन चालक या मालिक ही जिम्मेदार नहीं माना जाएगा, बल्कि संबंधित कार्यदायी संस्था और ठेकेदार पर भी 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। संशोधित 29 नियमों का प्रावधान 15 अगस्त से प्रभावी होने की बात कही गई है। नए नियमों में आम वाहन चालकों को कुछ मामलों में राहत मिलेगी, जबकि नियम तोड़ने वालों पर कई मामलों में पहले से अलग कार्रवाई होगी।
DL की वैधता खत्म होने के बाद भी 30 दिन की राहत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नए नियमों में ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अभी लाइसेंस की वैधता समाप्त होते ही उसकी वैधता खत्म मानी जाती है। संशोधित व्यवस्था में लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद भी 30 दिन तक उसकी वैधता बनी रहेगी। इसके अलावा वाहन चालक अब लाइसेंस की वैधता खत्म होने से एक साल पहले तक उसका नवीनीकरण करा सकेंगे। हालांकि, नया नवीनीकरण निर्धारित वैधता अवधि समाप्त होने के बाद ही प्रभावी होगा।
बिना परमिट वाहन चलाना पड़ेगा भारी
गौरतलब है कि बिना परमिट वाहन चलाने वालों के लिए जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है। ऐसे मामलों में पहले जहां 10 हजार रुपये का जुर्माना था, अब इसे बढ़ाकर 20 हजार रुपये किया गया है। यानी परिवहन नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन मालिकों की जेब पर अब पहले से ज्यादा असर पड़ेगा।
सड़क खराब हुई तो ठेकेदार भी जिम्मेदार
नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव सड़क की खराब स्थिति से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर है। अब तक सड़क की खामी के कारण दुर्घटना होने पर मुख्य कार्रवाई वाहन मालिक या चालक के खिलाफ होती थी। संशोधित व्यवस्था में यदि सड़क की खराबी के कारण दुर्घटना होती है और उसमें किसी व्यक्ति की मृत्यु या दिव्यांगता होती है, तो संबंधित कार्यदायी संस्था और ठेकेदार पर भी कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस प्रावधान से सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़ी एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
पहली बार गलती पर चेतावनी, बार-बार उल्लंघन पर जुर्माना
विदित है कि सामान्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी व्यवस्था में बदलाव किया गया है। पहली बार किसी सामान्य नियम का उल्लंघन करने पर सीधे जुर्माना लगाने के बजाय चेतावनी देने का प्रावधान किया गया है। लेकिन अगर वही गलती दोबारा की जाती है तो 500 से 1,500 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। हॉर्न और साइलेंसर से जुड़े नियमों में भी इसी तरह का बदलाव किया गया है। पहली बार उल्लंघन पर चेतावनी और दोबारा उल्लंघन करने पर 1,000 से 2,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
बिना बीमा वाहन चलाया तो बढ़ेगी जेब पर मार
गौरतलब है कि वाहन का बीमा नहीं होने पर भी नियम सख्त किए गए हैं। पहली बार बिना बीमा वाहन चलाते पकड़े जाने पर बीमा की मूल प्रीमियम राशि का तीन गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। अगर यही गलती दोबारा होती है तो पेनाल्टी पांच गुना तक हो सकती है। ऐसे में वाहन चालकों के लिए वैध बीमा के साथ सड़क पर निकलना और भी जरूरी हो जाएगा।
ओवरलोडिंग का फैसला अब कोर्ट में
ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारी ओवरलोड वाहन का चालान कर सकेंगे, लेकिन मौके पर चालक से जुर्माना वसूलने के बजाय मामले का निस्तारण कोर्ट के माध्यम से होगा। इस बदलाव से ओवरलोडिंग मामलों में प्रवर्तन अधिकारियों की भूमिका और न्यायिक प्रक्रिया के बीच अंतर स्पष्ट होगा।
अपील और दावा करने की समयसीमा भी बदली
वाहन पंजीकरण और स्वामित्व हस्तांतरण से जुड़े मामलों में अपील की अवधि 14 दिन से बढ़ाकर 30 दिन की जा रही है। वहीं, दुर्घटना से जुड़े दावे दाखिल करने की सामान्य छह महीने की अवधि में भी बदलाव किया गया है। पर्याप्त कारण होने पर दावा 12 महीने तक स्वीकार किया जा सकेगा। दावों के निस्तारण के लिए भी अब समयसीमा तय की गई है। नए प्रावधान के अनुसार मामलों का निस्तारण 12 महीने के भीतर करने का प्रावधान किया गया है।
वाहन के आकार और फिटनेस पर भी सख्ती
गौरतलब है कि निर्धारित मानक से अधिक लंबे, चौड़े या ऊंचे वाहनों के पंजीकरण और फिटनेस प्रमाणपत्र से जुड़े नियमों में भी दंड का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य सड़कों पर मानक से बाहर के वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करना है।
कुल मिलाकर 15 अगस्त से लागू होने वाली नई व्यवस्था में एक तरफ वाहन चालकों को लाइसेंस और कुछ सामान्य उल्लंघनों में राहत मिलेगी, तो दूसरी तरफ बिना परमिट, बिना बीमा, ओवरलोडिंग और अन्य गंभीर उल्लंघनों पर कार्रवाई का तरीका अधिक सख्त और स्पष्ट होगा। वहीं सड़क की खराबी से होने वाली गंभीर दुर्घटनाओं में ठेकेदार और जिम्मेदार संस्था की जवाबदेही तय होना इस बदलाव का सबसे बड़ा पहलू माना जा रहा है।