अब यूपी मे दहेज, चेक बाउंस, घरेलू हिंसा समेत इन 31 मामलों में सीधे दर्ज़ नहीं होगी FIR!: DGP के आदेश से मचा हड़कंप, अब कोर्ट...जानें DGP ने क्यों दिया ये निर्देश और आम आदमी के लिए इसके मायने_एक नजर
अब यूपी मे दहेज, चेक बाउंस, घरेलू हिंसा समेत इन 31 मामलों में सीधे दर्ज़ नहीं होगी FIR!

लखनऊ : उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव सामने आया है। अब दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा और चेक बाउंस जैसे करीब 31 मामलों में पुलिस सीधे FIR दर्ज नहीं करेगी। इस फैसले ने आम लोगों से लेकर कानून विशेषज्ञों तक में हलचल मचा दी है।

क्या है पूरा मामला?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि जिन मामलों में कानून के तहत “परिवाद” (Complaint Case) का प्रावधान है, उनमें सीधे FIR दर्ज करना गलत माना जाएगा। ऐसे मामलों में अब पहले शिकायत ली जाएगी, लेकिन FIR तभी दर्ज होगी जब कोर्ट आदेश देगा।

किन-किन मामलों में नहीं होगी सीधे FIR?

गौरतलब है कि इस फैसले के दायरे में कई अहम मामले शामिल हैं -

•दहेज प्रताड़ना से जुड़े कुछ प्रावधान

•घरेलू हिंसा के केस

•चेक बाउंस (Negotiable Instrument Act)

•मानहानि (Defamation)

•उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े विवाद

•खनन (Mines & Minerals Act)

•पशु क्रूरता से जुड़े मामले

यानी अब इन मामलों में पुलिस की बजाय कोर्ट की भूमिका पहले आएगी।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बदला नियम

विदित है कि यह बड़ा फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की सख्त टिप्पणी के बाद आया है। कोर्ट ने साफ कहा था कि कुछ धाराओं में सीधे FIR दर्ज करना कानून के खिलाफ है। पहले पीड़ित की शिकायत (Complaint) जरूरी है। इसके बाद ही पुलिस हरकत में आई और नया निर्देश जारी कर दिया गया।

पुलिस की गलती पड़ रही थी भारी!

आपको बता दें कि डीजीपी ने माना कि कई बार पुलिस नियमों के खिलाफ FIR दर्ज कर देती थी। इससे आरोपी कोर्ट में फायदा उठा लेते थे। जांच भी कमजोर हो जाती थी। अब इस “तकनीकी गलती” को सुधारने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है।

क्या बदलेगा आम आदमी के लिए?

इस फैसले का सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा -

•अब सीधे थाने में FIR दर्ज नहीं होगी

•पहले कोर्ट में परिवाद (Complaint) दाखिल करना होगा

•प्रक्रिया थोड़ी लंबी जरूर हो सकती है। लेकिन कानून के हिसाब से कार्रवाई ज्यादा मजबूत होगी

क्यों अहम है ये फैसला?

गौरतलब है कि यह फैसला पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव है। “सीधे FIR” के बजाय “कानूनी प्रक्रिया” को प्राथमिकता दी गई है। इससे गलत FIR और जांच की खामियां कम होंगी। लेकिन सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या इससे पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होगी? या फिर यह फैसला सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाएगा?

यूपी में अब कानून का खेल थोड़ा बदल गया है।हर शिकायत FIR नहीं बनेगी कोर्ट की मंजूरी के बाद ही केस आगे बढ़ेगा। यानी अब थाने से ज्यादा ताकत कोर्ट के हाथ में होगी और यही इस फैसले की सबसे बड़ी कहानी है।

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