लखनऊ : यूपी की राजनीति एक बार फिर करवट लेने जा रही है। बिहार में NDA की ऐतिहासिक जीत के तुरंत बाद अब भाजपा की नज़र सीधे उत्तर प्रदेश पर टिक गई है। पार्टी संगठन और सरकार दोनों में बड़ा फेरबदल तय माना जा रहा है। इसी बीच सबसे ज़्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह है डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष की रेस में उनका नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। बीते 11 महीनों से खाली पड़ी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर अब दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हलचल तेज़ हो चुकी है। दिसंबर तक भाजपा यूपी में बड़ा बदलाव करने के मूड में है… और यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक “मास्टरस्ट्रोक” साबित हो सकता है।
बिहार की जीत, अब यूपी में बदलाव; क्या है पार्टी की रणनीति?
आपको बता दें कि भाजपा के अंदर कई महीनों से माना जा रहा था कि बिहार चुनाव तक यूपी के प्रदेश अध्यक्ष और मंत्रिमंडल विस्तार का फैसला रोककर रखा गया है। अब जब बिहार में NDA को रिकॉर्ड बहुमत मिला है, केंद्रीय नेतृत्व और भी मज़बूती से आगे बढ़ रहा है। यूपी भाजपा अध्यक्ष सिर्फ प्रदेश के लिए नहीं, बल्कि केंद्र की राजनीति के लिए भी बेहद अहम पद माना जाता है। इसलिए पार्टी “तेज-तर्रार, मैनेजमेंट में माहिर और हर गुट को साधने वाले” नेता की तलाश में है और इसी लिस्ट में ब्रजेश पाठक का नाम मजबूती से उभर रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी 11 महीने से खाली; अब जल्द आएगा नाम
गौरतलब है कि 15 जनवरी 2025 को नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा होनी चाहिए थी, लेकिन महाराष्ट्र चुनाव, यूपी उपचुनाव फिर बिहार चुनाव इन सब कारणों से फैसला टलता गया। अब भाजपा इसे और लंबा खींचने के मूड में नहीं है। सूत्रों के मुताबिक दिसंबर में नया अध्यक्ष तय और जनवरी से नए समीकरण पर काम शुरू।
क्यों बढ़ गया ब्रजेश पाठक का नाम?
विदित है कि ब्रजेश पाठक को लेकर पार्टी में चर्चा इसलिए तेज है क्योंकि ब्राह्मण समाज में मजबूत पकड़ है। सियासी मैनेजमेंट में आक्रामक स्टाइल है। साथ ही योगी सरकार में मजबूत उपस्थिति दर्ज है। इसके साथ ही उनका संगठन और सरकार दोनों से अच्छे संबंध हैं। 2027 के लिए भाजपा को एक तेजतर्रार अध्यक्ष चाहिए हालांकि दौड़ में धर्मपाल सिंह, स्वतंत्र देव सिंह और भूपेंद्र चौधरी जैसे नाम भी हैं, पर नए सियासी माहौल में पाठक की संभावना सबसे भारी बताई जा रही है।
पहले संगठन में बदलाव, फिर मंत्रिमंडल विस्तार
भाजपा की रणनीति बिल्कुल साफ है:
पहले प्रदेश अध्यक्ष का ऐलान
फिर योगी कैबिनेट का दूसरा बड़ा विस्तार
योगी सरकार 2.0 में अभी 6 कैबिनेट सीटें खाली हैं। दलित, पिछड़ा, अगड़ा, क्षेत्रीय संतुलन इन सबको ध्यान में रखते हुए फेरबदल होगा। कुछ कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों को हटाने की भी तैयारी है, लेकिन एक वर्ग चुनाव से पहले किसी को हटाने के खिलाफ भी है। फिर भी, अंतिम फैसला अब केंद्र का होगा और उसपर कोई रोक-टोक नहीं।
क्यों जरूरी है तेज़ निर्णय?
गौरतलब है कि अगले 6–7 महीनों में इतने चुनाव हैं कि भाजपा देर नहीं कर सकती अप्रैल से पंचायत चुनाव का बिगुल फिर 2 महीने बाद शिक्षक-स्नातक MLC चुनाव उसके बाद विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी करना है। अगर अध्यक्ष और मंत्रिमंडल के फैसले और टलते हैं तो इसका सीधा असर जमीन पर पड़ेगा।
चुनाव प्रबंधन के लिए ‘तेजतर्रार अध्यक्ष’ की तलाश
भाजपा को अब ऐसा प्रदेश अध्यक्ष चाहिए जो CM योगी, संगठन महामंत्री धर्मपाल, RSS और केंद्रीय नेतृत्व चारों के बीच एक मजबूत पुल बन सके। और साथ ही जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी खत्म कर सके। कई नेताओं का मानना है कि चौधरी अनुभवी हैं, लेकिन मौजूदा चुनावी माहौल में “अधिक आक्रामक, अधिक ऊर्जावान” चेहरे की ज़रूरत है।
भाजपा के अंदर जो हलचल है, उससे यही संकेत मिल रहा है कि दिसंबर तक यूपी बीजेपी का नया अध्यक्ष, योगी सरकार 2.0 का मंत्रिमंडल विस्तार, चुनावी समीकरण सेट करना सब कुछ एक साथ बदल सकता है। और इसी बड़े बदलाव की चर्चा में सबसे आगे एक ही नाम ब्रजेश पाठक क्या बनेंगे यूपी बीजेपी के नए ‘कमांडर’? आने वाला दिसंबर ही तय करेगा कि भाजपा 2027 की लड़ाई किस अध्यक्ष के साथ लड़ेगी।