यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस ने सपा से मांगी 87 सीटों पर दावेदारी!: अमेठी-रायबरेली से नहीं छोड़ेगी कोई सीट, वहीं 55 सीट...जानें कैसे अखिलेश के सामने गठबंधन पर खड़ी हो सकती बड़ी सियासी चुनौती?
यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस ने सपा से मांगी 87 सीटों पर दावेदारी!

लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासी बिसात बिछने लगी है। भाजपा को चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर सबकी नजरें टिकी हैं। इसी बीच कांग्रेस की एक अहम बैठक से सीटों के बंटवारे को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। खबरों के मुताबिक, प्रियंका गांधी वाड्रा की अगुवाई में पार्टी ने संभावित सीटों का आकलन करते हुए A-B फॉर्मूला तैयार किया है। इसके तहत कांग्रेस करीब 85 से 87 विधानसभा सीटों पर अपना दावा मजबूत रखना चाहती है। कांग्रेस की रणनीति से साफ संकेत मिलता है कि पार्टी इस बार सीटों के बंटवारे में अपने चुनावी प्रदर्शन और संगठन की ताकत को प्रमुख आधार बनाना चाहती है। हालांकि, सपा के साथ सीटों पर अंतिम सहमति बनी है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह कांग्रेस की प्रस्तावित रणनीति और बातचीत की तैयारी से जुड़ी जानकारी है।

क्या है प्रियंका गांधी का A-B फॉर्मूला?

आपको बता दें कि 19 अक्टूबर को दिल्ली में हुई बैठक में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने चुनावी तैयारियों और संभावित सीटों पर चर्चा की। बैठक में यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद समेत अन्य नेताओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने संभावित सीटों को दो श्रेणियों में बांटा है। पहली श्रेणी में 55 सीटें रखी गई हैं, जबकि दूसरी श्रेणी में 30 से 32 सीटों पर दावा करने की तैयारी है।

A कैटेगरी: 55 सीटों पर कांग्रेस की प्राथमिकता

गौरतलब है कि कांग्रेस की योजना में A कैटेगरी सबसे अहम मानी जा रही है। इन सीटों पर पार्टी अपना संगठन मजबूत होने और चुनावी संभावनाएं बेहतर होने का दावा कर रही है। इस सूची में 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को बढ़त दिलाने वाली 39 विधानसभा सीटें भी शामिल बताई गई हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस इन सीटों पर अपना दावा आसानी से छोड़ने के मूड में नहीं है। कुछ सीटों पर समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायकों की मौजूदगी के कारण गठबंधन की बातचीत चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

B कैटेगरी: 30 से 32 सीटों पर भी नजर

दूसरी श्रेणी में कांग्रेस ने 30 से 32 सीटें रखी हैं। पार्टी का आकलन है कि इन क्षेत्रों में दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ें तो जीत की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं। इस तरह A और B श्रेणियों को मिलाकर कांग्रेस 85 से 87 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश करने की तैयारी में है।

अमेठी-रायबरेली समेत कई क्षेत्रों पर नजर

विदित है कि कांग्रेस अमेठी, रायबरेली और सहारनपुर लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों पर भी मजबूत दावेदारी चाहती है। इसके अलावा पार्टी की कोशिश प्रदेश के हर जिले में कम से कम एक सीट पर चुनाव लड़ने की बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस शुरुआत में समाजवादी पार्टी के सामने करीब 150 सीटों की सूची रख सकती है। हालांकि, यह अंतिम मांग नहीं, बल्कि बातचीत शुरू करने की रणनीति बताई जा रही है। पार्टी चाहती है कि सीटों के बंटवारे पर 15 नवंबर तक सहमति बन जाए, ताकि उम्मीदवारों और संगठन की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

सपा से बात नहीं बनी तो क्या होगा?

कांग्रेस की बैठक में दूसरे दलों के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर भी विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी बातचीत के विकल्प खुले रखना चाहती है। वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से सीटों को लेकर क्या रुख अपनाया जाएगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अखिलेश यादव कांग्रेस की प्रस्तावित सीटों पर सहमत होंगे या दोनों दलों के बीच लंबी बातचीत चलेगी? फिलहाल A-B फॉर्मूले ने यूपी की चुनावी राजनीति में गठबंधन के गणित को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अंतिम तस्वीर सीटों के बंटवारे पर दोनों दलों की सहमति के बाद ही साफ होगी।

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