राजस्थान में नवजातों के लिए बड़ा ऐलान!: जन्म से 1 साल तक इलाज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार, लाखों परिवारों को फायदा, वहीं निजी अस्पतालों में...
राजस्थान में नवजातों के लिए बड़ा ऐलान!

जयपुर: राजस्थान में नवजात बच्चों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है। सरकार अब सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों को जन्म के बाद सिर्फ 30 दिन नहीं, बल्कि पूरे एक साल तक मुफ्त इलाज देने की व्यवस्था करने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत इलाज के साथ दवाएं, जांच और जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस की सुविधा भी मुफ्त मिल सकेगी। सरकार का यह कदम खास तौर पर नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने और गरीब परिवारों को इलाज के खर्च से राहत देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। अभी तक सरकारी अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चे को सीमित अवधि तक ही यह सुविधा मिलती है। इसके बाद इलाज का खर्च परिवार को उठाना पड़ता है।

अब एक साल तक नहीं देना होगा इलाज का खर्च

आपकी बता दें कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद सरकारी अस्पताल में जन्मे बच्चे को पहले साल के दौरान बीमारी होने पर इलाज के लिए आर्थिक परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। दवा, जांच और इलाज के साथ एंबुलेंस सुविधा भी इसमें शामिल होगी। इससे उन परिवारों को सबसे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद है, जो बच्चे के जन्म के बाद अचानक बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी आने पर महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा पाते।

बड़े अस्पताल रेफर होने पर भी सरकार उठाएगी खर्च

गौरतलब है कि अगर किसी नवजात की हालत गंभीर होती है और उसे बेहतर इलाज के लिए बड़े चिकित्सा संस्थान में रेफर किया जाता है, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था भी सरकार की ओर से किए जाने का प्रस्ताव है। यानी रेफरल की स्थिति में बच्चे को लाने-ले जाने का खर्च परिवार पर नहीं पड़ेगा।

निजी अस्पतालों तक भी पहुंच सकती है सुविधा

नई व्यवस्था को केंद्र सरकार की योजना से जोड़कर निजी अस्पतालों में भी लागू करने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो सरकारी अस्पतालों के साथ निजी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराने वाले पात्र परिवारों को भी इसका लाभ मिल सकता है। हालांकि निजी अस्पतालों में यह सुविधा किस तरह लागू होगी और किन शर्तों के तहत मिलेगी, इसका अंतिम स्वरूप व्यवस्था लागू होने के बाद स्पष्ट होगा।

गर्भवती महिलाओं को भी मिलती रहेंगी मुफ्त सुविधाएं

विदित है कि इस बदलाव का लाभ केवल नवजात बच्चों तक सीमित नहीं रहेगा। गर्भवती महिलाओं को प्रसव से जुड़ी आवश्यक सुविधाएं मुफ्त देने की व्यवस्था भी जारी रहेगी। सामान्य प्रसव के बाद 3 दिन और सीजेरियन प्रसव के बाद 7 दिन तक मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी जारी रहेगी।

हर साल 8 लाख से ज्यादा बच्चों को फायदा

राजस्थान में हर महीने औसतन करीब 62 हजार से 71 हजार बच्चों का जन्म होता है। सालभर में यह संख्या लगभग 8 लाख से 8.80 लाख तक पहुंच जाती है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने पर हर साल लाखों नवजातों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार की कोशिश है कि बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती एक साल में बीमारी या आपात स्थिति के कारण इलाज पैसे की कमी से न रुके। समय पर जांच, दवा और अस्पताल तक पहुंच मिलने से नवजात मृत्यु दर में कमी लाने में भी मदद मिल सकती है।

यानी राजस्थान में प्रस्तावित यह बदलाव सिर्फ मुफ्त इलाज का विस्तार नहीं, बल्कि नवजात बच्चों को जीवन के सबसे संवेदनशील पहले साल में बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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