मुंबई/मनोरंजन : बॉलीवुड में ऐसे कलाकार बहुत कम हुए हैं जिन्होंने हर तरह के किरदार में खुद को साबित किया हो। एक तरफ पर्दे पर उनका खतरनाक विलेन वाला अंदाज दर्शकों को डराता था, तो दूसरी तरफ ‘बाबूराव’ बनकर उन्होंने करोड़ों लोगों को हंसी से लोटपोट कर दिया। आज हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता परेश रावल अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने जितनी शोहरत हासिल की, उतने ही विवाद और उतने ही दिलचस्प किस्से भी उनके जीवन का हिस्सा रहे।
जब गुस्से में टूट गया था सब्र, पत्थर मारकर फोड़ दिया था सिर
आपकी जानकारी के लिये बता दें कि हाल ही में एक बातचीत के दौरान परेश रावल ने अपनी जिंदगी का ऐसा किस्सा बताया जिसने सभी को चौंका दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि युवावस्था में उनका गुस्सा काफी तेज था। थिएटर के दिनों में एक बार दर्शकों में बैठा व्यक्ति लगातार अभद्र टिप्पणियां कर रहा था। गुस्से में परेश स्टेज से नीचे उतर आए और उसकी पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक बार उन्होंने गुस्से में किसी व्यक्ति के सिर पर पत्थर मार दिया था। हालांकि बाद में उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने उस व्यक्ति से माफी मांगकर मामला सुलझा लिया। परेश कहते हैं कि आज भी उस घटना को याद करके उन्हें पछतावा होता है।
कॉलेज में नकली पिता बनाकर पहुंचे, फिर पड़ा जोरदार थप्पड़
गौरतलब है कि परेश रावल के संघर्ष के दिनों का एक किस्सा बेहद दिलचस्प है। कॉलेज में कम अटेंडेंस होने पर प्रिंसिपल ने माता-पिता को बुलाने का आदेश दिया। परेश अपने एक बुजुर्ग दोस्त को नकली पिता बनाकर कॉलेज पहुंच गए। लेकिन मामला उल्टा पड़ गया। शिकायत सुनते ही उस व्यक्ति ने अभिनय करते हुए परेश को सबके सामने जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। प्रिंसिपल भी हैरान रह गए और उल्टा परेश की तारीफ करने लगे।
जब असली जिंदगी में भी डरने लगे थे लोग
90 के दशक में परेश रावल बॉलीवुड के सबसे खतरनाक विलेन माने जाते थे। फिल्मों में उनके किरदार इतने प्रभावशाली थे कि दर्शक उन्हें वास्तविक जीवन में भी डरावना समझने लगे थे। कई बार फ्लाइट में लोग उनके बगल वाली सीट पर बैठने से बचते थे। कुछ लोग तो अपना सामान तक संभालकर रखते थे। उनकी आंखों का खौफ, भारी आवाज और स्क्रीन पर मौजूदगी दर्शकों को अंदर तक प्रभावित करती थी।
विलेन से कॉमेडी किंग बनने की कहानी
विदित है कि लगातार नकारात्मक किरदारों की वजह से बनी छवि को तोड़ने के लिए परेश रावल ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने कॉमेडी की तरफ रुख किया और फिर इतिहास बन गया।
यादगार किरदार जिन्होंने बदल दी पहचान
इन किरदारों ने उन्हें भारतीय सिनेमा का सबसे पसंदीदा कॉमेडी स्टार बना दिया।
‘बाबूराव’ जिसने बना दिया सुपरस्टार
फिल्म हेरा फेरी का बाबूराव आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय किरदारों में गिना जाता है। मोटा चश्मा, धोती-कुर्ता, टूटी-फूटी हिंदी और मासूमियत से भरा अंदाज लोगों के दिलों में बस गया। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के कई लोकप्रिय दृश्य परेश रावल ने मौके पर खुद तैयार किए थे। हालांकि बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि बाबूराव की लोकप्रियता इतनी बढ़ गई कि लोग उन्हें हर फिल्म में उसी रूप में देखने लगे और यह उनके लिए चुनौती बन गया।
किन्नर का किरदार निभाने के लिए असली लोगों के बीच पहुंचे
आपको बता दें कि फिल्म तमन्ना में उन्होंने एक किन्नर की भूमिका निभाई थी। इस किरदार की तैयारी के लिए उन्होंने वास्तविक किन्नर समुदाय के लोगों से मुलाकात की, उनकी जिंदगी को समझा और उनके व्यवहार का अध्ययन किया। यह उनके करियर के सबसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण किरदारों में गिना जाता है।
सरदार पटेल बनना क्यों था सबसे कठिन?
फिल्म सरदार में उन्होंने भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका निभाई। इसके लिए उन्होंने भाषणों, चाल-ढाल और व्यक्तित्व का गहन अध्ययन किया। परेश का मानना था कि ऐतिहासिक किरदार निभाना सबसे मुश्किल होता है क्योंकि दर्शक उस व्यक्ति को पहले से जानते हैं और छोटी गलती भी तुरंत पकड़ लेते हैं।
'ओह माय गॉड' से बदली गंभीर अभिनेता की छवि
आपको बता दें कि फिल्म OMG – Oh My God! में उनके कानजी मेहता के किरदार को काफी सराहा गया। धर्म और अंधविश्वास पर सवाल उठाने वाली इस फिल्म ने साबित कर दिया कि परेश रावल सिर्फ कॉमेडियन नहीं, बल्कि एक गंभीर और दमदार अभिनेता भी हैं।
विवादों से भी रहा गहरा नाता
अपने लंबे करियर में परेश रावल कई बार अपने बयानों को लेकर विवादों में भी रहे। राजनीतिक मंचों, सोशल मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिए गए कुछ बयानों पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई बार उन्हें आलोचनाओं, विरोध और कानूनी शिकायतों का सामना भी करना पड़ा। हालांकि कुछ मामलों में उन्होंने सफाई दी और माफी भी मांगी।
राजनीति में भी दिखाया दम
आपको बता दें कि अभिनय के अलावा परेश रावल राजनीति में भी सक्रिय रहे। वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और लोकसभा सांसद भी रहे। राजनीति में भी उन्होंने अपनी स्पष्टवादिता और बेबाक अंदाज से अलग पहचान बनाई।
71 की उम्र में भी बरकरार है जलवा
आज जब परेश रावल 71 वर्ष के हो चुके हैं, तब भी उनकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। नई पीढ़ी उन्हें मीम्स और कॉमेडी के जरिए जानती है, जबकि पुरानी पीढ़ी उन्हें एक शानदार अभिनेता, दमदार विलेन और बहुमुखी कलाकार के रूप में याद करती है।
चार दशकों से ज्यादा लंबे सफर में उन्होंने साबित किया कि असली कलाकार वही है जो हर किरदार में नई जान डाल सके। कभी लोग उनसे डरते थे, आज वही कलाकार करोड़ों लोगों की मुस्कान की वजह है। यही है परेश रावल की सबसे बड़ी सफलता।