नई दिल्ली : देश में सार्वजनिक परिवहन का चेहरा अब तेजी से बदलने जा रहा है। सड़क, मेट्रो और रेल नेटवर्क के बाद अब केंद्र सरकार पानी पर चलने वाली आधुनिक “वॉटर मेट्रो” सेवा को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी में जुट गई है। Inland Waterways Authority of India और Kochi Metro Rail Limited की मदद से देश के 18 शहरों में इस हाईटेक परियोजना पर काम चल रहा है।
पहले चरण में Ayodhya, Varanasi, Prayagraj, Patna और Srinagar जैसे बड़े शहरों को चुना गया है, जहां जल्द ही नदियों के रास्ते आधुनिक यात्री सेवा शुरू हो सकती है।
अगर योजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो आने वाले वर्षों में लोग:
सड़क जाम से बचकर
नदियों के रास्ते ऑफिस, बाजार और दूसरे इलाकों तक पहुंच सकेंगे
घाटों के बीच हाईटेक इलेक्ट्रिक फेरी जैसी सेवाओं का उपयोग करेंगे
सरकार का लक्ष्य सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि वॉटर मेट्रो को रोजमर्रा की पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था का हिस्सा बनाना है।
पहले चरण में जिन शहरों को प्राथमिकता दी गई है:
Ayodhya
Varanasi
Prayagraj
Patna
Srinagar
इसके बाद दूसरे चरण में असम के:
Tezpur
Dibrugarh
को भी जोड़े जाने की योजना है।
सरकार द्वारा कराए जा रहे व्यवहारिकता अध्ययन में यह जांच की जा रही है:
जलमार्ग कितने उपयोगी हैं
प्रतिदिन कितने यात्री सफर कर सकते हैं
परियोजना आर्थिक रूप से कितनी सफल होगी
बस, सड़क और मेट्रो नेटवर्क से इसका कनेक्शन कैसे बनेगा
बताया जा रहा है कि 18 में से 17 शहरों की ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार हो चुकी है।
केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal के अनुसार यह मॉडल पारंपरिक मेट्रो सिस्टम की तुलना में काफी कम खर्चीला है क्योंकि:
नई सड़कें कम बनानी पड़ती हैं
जमीन अधिग्रहण कम होता है
मौजूदा नदियों और जलमार्गों का उपयोग किया जाता है
ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों कम होते हैं
Kochi Water Metro की सफलता के बाद केंद्र सरकार अब इसी मॉडल को देश के दूसरे शहरों तक पहुंचाना चाहती है। केरल में यह सेवा:
कम समय में लोकप्रिय हुई
पर्यावरण-अनुकूल ट्रांसपोर्ट मॉडल बनी
पर्यटन और दैनिक यात्रा दोनों में उपयोगी साबित हुई
Ayodhya, Varanasi और Prayagraj जैसे धार्मिक शहरों में वॉटर मेट्रो शुरू होने से:
श्रद्धालुओं की यात्रा आसान होगी
घाटों के बीच तेज कनेक्टिविटी मिलेगी
पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा
स्थानीय रोजगार बढ़ सकता है
केंद्र सरकार अब वॉटर मेट्रो को भविष्य के “ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल” के रूप में देख रही है। लक्ष्य यह है कि आने वाले समय में:
नदियां भी शहरों की लाइफलाइन बनें
सड़क ट्रैफिक का दबाव घटे
इलेक्ट्रिक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन बढ़े
अगर यह परियोजना सफल रही, तो भारत के कई शहरों में पानी के रास्ते सफर करना आने वाले वर्षों में सामान्य बात बन सकता है।