देशभर में एक साथ लागू हुए 4 नए लेबर कोड!: 29 पुराने श्रम कानून रद्द, कंपनियों से लेकर मजदूरों तक सब पर पड़ेगा असर, वहीं अब 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का मॉडल...जानें क्या होंगे बदलाव और कर्मचारियों को होने वाले फायदे_एक नजर
नई दिल्ली : देश में नौकरी करने वाले करोड़ों कर्मचारियों और कंपनियों के लिए बड़ा बदलाव हो गया है। केंद्र सरकार ने लंबे इंतजार के बाद आखिरकार देशभर में चारों नए लेबर कोड पूरी तरह लागू कर दिए हैं। सरकार ने इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके साथ ही अब देश के 29 पुराने श्रम कानून खत्म हो गए हैं और उनकी जगह एक नई, आधुनिक और एकीकृत व्यवस्था लागू हो गई है।
इस बदलाव का असर:
आपको बता दें कि इस नए बदलाव से कर्मचारियों की सैलरी, काम के घंटे, छुट्टियां, PF और ग्रेच्युटी, ओवरटाइम और नौकरी की सुरक्षा जैसी कई अहम चीजों पर पड़ने वाला है।
कौन-कौन से नए लेबर कोड लागू हुए?
गौरतलब है कि सरकार ने जिन चार बड़े लेबर कोड्स को लागू किया है, वे हैं:
वेज कोड 2019
इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020
ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020
इन सभी को मिलाकर अब देश में श्रम कानूनों की नई व्यवस्था लागू होगी।
क्यों लाने पड़े नए लेबर कानून?
विदित है कि सरकार का कहना है कि पहले देश में 29 अलग-अलग श्रम कानून थे, जिन्हें समझना मुश्किल था, लागू करना जटिल था और कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को परेशानी होती थी। इसी वजह से सभी कानूनों को मिलाकर आसान और एक जैसे नियम बनाए गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे कारोबार करना आसान होगा, निवेश बढ़ेगा, नई कंपनियां आएंगी और रोजगार के मौके बढ़ेंगे।
सैलरी पर क्या असर पड़ेगा?
विदित है कि नए नियमों के तहत “बेसिक सैलरी” की परिभाषा बदली जा सकती है। इसका असर PF कटौती, ग्रेच्युटी और टेक-होम सैलरी पर पड़ सकता है। संभावना है कि हाथ में मिलने वाली सैलरी कुछ कम हो लेकिन PF और रिटायरमेंट बेनिफिट बढ़ जाएं। यानी अभी कम पैसा हाथ में, लेकिन भविष्य के लिए ज्यादा बचत।
काम के घंटे बदलेंगे?
सबसे ज्यादा चर्चा 4-दिन काम और 3-दिन छुट्टी वाले मॉडल को लेकर हो रही है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि कुल कार्य समय सप्ताह में 48 घंटे ही रहेगा। कंपनियां जरूरत के अनुसार शिफ्ट तय कर सकती हैं। यानी:
12 घंटे की शिफ्ट के साथ 4 दिन काम
8 घंटे की शिफ्ट के साथ 6 दिन काम
जैसे विकल्प लागू किए जा सकते हैं।
कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?
विदित है कि नए लेबर कोड्स में न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा और कार्यस्थल सुरक्षा पर ज्यादा जोर दिया गया है। अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की कोशिश होगी।
कंपनियों को क्या राहत मिलेगी?
गौरतलब है कि कंपनियों के लिए अब कागजी प्रक्रिया कम होगी, अलग-अलग कानूनों की जटिलता घटेगी और एकीकृत नियमों से अनुपालन आसान होगा। सरकार का दावा है कि इससे “Ease of Doing Business” मजबूत होगा।
5 साल बाद आखिर क्यों लागू हो पाए कानून?
इन लेबर कोड्स को पहली बार 2019 और 2020 में संसद से मंजूरी मिली थी। लेकिन राज्यों के नियम, तकनीकी तैयारियां और उद्योगों की चिंताएं जैसे कारणों से इनका पूरा लागू होना टलता रहा। अब सरकार ने सभी जरूरी नियम तैयार कर दिए हैं।
किन बातों को लेकर बढ़ सकती है बहस?
हालांकि सरकार इसे बड़ा सुधार बता रही है, लेकिन ट्रेड यूनियन और कर्मचारी संगठन कुछ प्रावधानों को लेकर पहले भी चिंता जता चुके हैं। विशेषकर काम के लंबे घंटे, छंटनी नियम और कॉन्ट्रैक्ट जॉब जैसे मुद्दों पर आगे बहस बढ़ सकती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव भारत की श्रम व्यवस्था का सबसे बड़ा पुनर्गठन है। अब आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि कर्मचारियों को कितना फायदा मिलता है, कंपनियां नए नियमों को कैसे लागू करती हैं और रोजगार बाजार पर इसका क्या असर पड़ता है। लेकिन इतना तय है कि अब भारत में नौकरी, सैलरी और कामकाज की दुनिया पहले जैसी नहीं रहने वाली।