नई दिल्ली/राजनीति : मनरेगा को हटाकर नया रोजगार कानून लाने के बाद अब केंद्र सरकार की नजर यूपीए सरकार के दौर में बने दो और बड़े “अधिकार आधारित कानूनों” पर टिक गई है। सरकार शिक्षा का अधिकार (RTE) और खाद्य सुरक्षा कानून में बड़े सुधार की तैयारी कर रही है। इसका मकसद साफ है कि योजनाओं का लाभ सिर्फ कागजों में नहीं, जमीन पर सही व्यक्ति तक पहुंचे। सरकार का मानना है कि किसी योजना को “कानूनी अधिकार” बना देना काफी नहीं होता, जब तक उसका 100% सही क्रियान्वयन न हो।
सरकार की सीधी सोच: अधिकार नहीं, नतीजा चाहिए -
आपको बता दें कि सरकार से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट निर्देश है कि हर लाभार्थी का पूरा रजिस्ट्रेशन (100%) हो और कोई फर्जी नाम, डुप्लीकेशन या लीकेज न रहे। लाभ समय पर, सही मात्रा में और सही व्यक्ति तक पहुंचे। इसी सोच के तहत पहले मनरेगा की जगह VB–G Ram G Bill लाया गया और अब शिक्षा व खाद्य सुरक्षा कानूनों की समीक्षा शुरू की गई है।
क्यों बदले जा रहे हैं यूपीए काल के ये कानून?
गौरतलब है कि परामर्श प्रक्रिया से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूपीए सरकार के समय बनाए गए इन “अधिकार कानूनों” में तीन बड़ी कमजोरियां सामने आईं -
हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं पहुंच पाई
खाद्य सुरक्षा के बावजूद कई परिवार आज भी छूटे रह गए
रजिस्ट्रेशन और निगरानी व्यवस्था कमजोर रही
सरकार का कहना है कि कानून तो बने, लेकिन सिस्टम उतना मजबूत नहीं था।
पहले नियम, फिर जरूरत पड़ी तो नया कानून :
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार फिलहाल दो स्तरों पर काम कर रही है -
●पहले नियमों और सरकारी आदेशों से सुधार
●अगर इससे समाधान नहीं निकला, तो संसद में नए संशोधन बिल लाए जाएंगे
यानी सीधे कानून बदलने से पहले सिस्टम को दुरुस्त करने की कोशिश होगी।
अब “घर पाने का अधिकार” भी एजेंडे में :
सरकार केवल शिक्षा, भोजन और रोजगार तक सीमित नहीं है। अब आवास (Housing) को भी कानूनी अधिकार बनाने पर मंथन चल रहा है।
सरकार मानती है कि शिक्षा, भोजन, रोजगार, स्वास्थ्य और आवास
ये पांचों इंसान की बुनियादी जरूरतें हैं।
सरकार के 3 बड़े टारगेट :
सरकार ने साफ कर दिया है कि अब योजनाएं तीन मजबूत स्तंभों पर चलेंगी—
समयबद्ध कवरेज
हर योजना के लिए तय समय-सीमा और लक्ष्य
डिजिटल निगरानी
डिजिटल प्लेटफॉर्म, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और डेटा ट्रैकिंग
100% पहचान
हर लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रव्यापी रजिस्ट्रेशन कैंपेन।
शिक्षा का अधिकार कानून पर क्या बदलेगा?
गौरतलब है कि शिक्षा का अधिकार कानून 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देता है, लेकिन सरकार मानती है कि दाखिले हुए, पर लर्निंग आउटकम कमजोर रहे। निजी स्कूलों में 25% EWS सीटों पर कई जगह गड़बड़ी और निगरानी तंत्र ढीला है। अब सरकार चाहती है कि हर बच्चा स्कूल में हो, पढ़ाई का स्तर भी सुधरे और डिजिटल ट्रैकिंग से ड्रॉपआउट रोका जाए
खाद्य सुरक्षा कानून पर क्या सुधार होंगे?
विदित है कि खाद्य सुरक्षा कानून का उद्देश्य किसी को भूखा न रहने देना था, लेकिन—
फर्जी राशन कार्ड
डुप्लीकेट लाभार्थी
एक जगह ज्यादा, दूसरी जगह बिल्कुल नहीं
इन समस्याओं ने सिस्टम पर सवाल खड़े किए। अब सरकार चाहती है कि केवल पात्र व्यक्ति को अनाज मिले और डिजिटल पहचान से लीकेज खतम हो। साथ ही रियल-टाइम वितरण निगरानी का लाभ मिले।
विपक्ष पहले ही हमलावर :
मनरेगा की जगह लाए गए VB–G Ram G Bill पर विपक्ष ने कड़ा विरोध किया था, खासकर महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर। अब शिक्षा और खाद्य सुरक्षा कानूनों में बदलाव की तैयारी से सियासी टकराव और तेज होने के संकेत हैं।
केंद्र सरकार का साफ संदेश है कि “अधिकार तभी मायने रखते हैं, जब उनका असर जमीन पर दिखे।” मनरेगा के बाद शिक्षा और खाद्य सुरक्षा कानूनों में सुधार की तैयारी
भारत की वेलफेयर पॉलिसी में बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।