ड्राइविंग लाइसेंस को बनवाने के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी!: कमर्शियल वाहन के लिए अलग से लाइसेंस, तो वहीं भारी वाहन...जानें पूरी प्रक्रिया और इसके फायदे?
ड्राइविंग लाइसेंस को बनवाने के नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी!

नई दिल्ली : देशभर में ड्राइविंग लाइसेंस सिस्टम को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सड़क हादसों पर लगाम लगाने और व्यावसायिक वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए सरकार एक बार फिर कमर्शियल वाहनों के लिए अलग लाइसेंस सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट (MV Act) में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। अगर यह बदलाव लागू होता है, तो अब कोई भी चालक सीधे भारी वाहन (Heavy Vehicle) नहीं चला पाएगा। इसके लिए उसे अनुभव के अलग-अलग चरणों से गुजरना होगा।

अब ऐसे बनेगा कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस :

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नए प्रस्ताव के मुताबिक ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया को स्टेप-बाय-स्टेप किया जाएगा -

पहला चरण

चालक के पास कम से कम 1 साल पुराना सामान्य चौपहिया (LMV) लाइसेंस होना जरूरी। इसके बाद ही वह सामान्य कमर्शियल वाहन लाइसेंस के लिए पात्र होगा।

दूसरा चरण

विदित है कि कामर्शियल लाइसेंस पर 1 साल का अनुभव पूरा करने के बाद चालक को मध्यम भार वाहन (Medium Vehicle) का लाइसेंस मिलेगा।

तीसरा चरण

गौरतलब है कि मध्यम भार वाहन लाइसेंस पर एक और साल का अनुभव जरूरी है। इसके बाद ही भारी वाहन (Heavy Vehicle) का लाइसेंस जारी किया जाएगा। यानी अब एक नए चालक को भारी वाहन चलाने का लाइसेंस पाने में करीब 4 साल का समय लगेगा।

क्यों जरूरी समझा गया यह बदलाव?

हाल ही में नई दिल्ली में हुई एक अहम बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में माना गया कि सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण अनुभवहीन चालकों द्वारा भारी वाहनों का संचालन है। मौजूदा सिस्टम में कई बार कम अनुभव वाले ड्राइवर भी सीधे बड़े वाहन चलाने लगते हैं। इससे न सिर्फ ड्राइवर बल्कि आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ती है इसी वजह से सरकार अब अनुभव आधारित लाइसेंस प्रणाली लागू करना चाहती है।

पहले क्या था नियम?

आपको बता दें कि पहले व्यावसायिक वाहनों के लिए अलग लाइसेंस बनाया जाता था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद 7.5 टन तक वजन वाले वाहनों के लिए अलग कमर्शियल लाइसेंस की जरूरत खत्म कर दी गई थी। हालांकि, मध्यम और भारी माल वाहनों के लिए अलग लाइसेंस की व्यवस्था पहले से बनी हुई है। अब सरकार इस व्यवस्था को और सख्त और व्यवस्थित करने जा रही है।

पुराने लाइसेंस धारकों को राहत :

आपको बता दें कि सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन ड्राइवरों के पास पहले से मध्यम या भारी वाहन का वैध लाइसेंस है उन्हें नया लाइसेंस बनवाने या प्रक्रिया दोहराने की जरूरत नहीं होगी। नए नियम केवल नए आवेदकों पर लागू होंगे।

राज्यों की भी सहमति :

गौरतलब है कि बैठक में कई राज्यों के परिवहन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। उत्तराखंड के अपर परिवहन आयुक्त एस.के. सिंह ने बताया कि कमर्शियल वाहनों के लिए अलग लाइसेंस सिस्टम पर सहमति बन चुकी है। इसके लिए MV Act में संशोधन प्रस्तावित है। जल्द ही इस पर औपचारिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?

● सड़क सुरक्षा बेहतर होगी
●अनुभवहीन ड्राइवर भारी वाहन नहीं चला पाएंगे
●हादसों में कमी आने की उम्मीद
●ट्रांसपोर्ट सेक्टर में प्रोफेशनलिज्म बढ़ेगा

हालांकि, इससे ड्राइवर बनने की प्रक्रिया लंबी जरूर होगी, लेकिन सरकार का मानना है कि सुरक्षा के सामने यह देरी जरूरी है।

ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर प्रस्तावित यह बदलाव सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अनुभव आधारित कमर्शियल लाइसेंस सिस्टम लागू होने से जहां हादसों में कमी आने की उम्मीद है, वहीं ट्रांसपोर्ट सेक्टर में अनुशासन और जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।

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