नई दिल्ली: भारत में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए वाहनों से निकलने वाले धुएं की जांच के नियम और सख्त करने की तैयारी है। BS-VI के बाद अब BS-VII उत्सर्जन मानकों की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कार, एसयूवी, छोटे मालवाहक वाहन, बस और ट्रक तक के प्रदूषण की जांच के तरीके बदल सकते हैं। खास बात यह है कि अब केवल साइलेंसर से निकलने वाले धुएं पर ही नहीं, बल्कि टायरों के घिसने और ब्रेक लगाने से पैदा होने वाले बारीक कणों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
कब से लागू हो सकतें नये नियम :
आपको बता दें कि प्रस्तावित समयसीमा के मुताबिक, नए नियमों को अप्रैल 2029 से चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है। हालांकि, अंतिम तारीखों और तकनीकी प्रावधानों की पुष्टि सरकार की अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगी।
तीन चरणों में बदल सकता है वाहनों का सिस्टम
प्रस्तावित योजना के अनुसार, सबसे पहले नई कारों और एसयूवी को नए उत्सर्जन मानकों के दायरे में लाने की तैयारी है। इसके बाद छोटे मालवाहक वाहन और पिकअप वैन शामिल किए जा सकते हैं। बसों और ट्रकों जैसे भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए भी सख्त मानक प्रस्तावित हैं। रिपोर्ट में दी गई समयसीमा के अनुसार, कारों और एसयूवी के लिए अप्रैल 2029, छोटे वाणिज्यिक वाहनों के लिए 2030 और भारी वाहनों के लिए अप्रैल 2031 से नियम लागू करने की योजना बताई गई है। व्यापक प्रक्रिया अप्रैल 2035 तक चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ सकती है। दोपहिया वाहनों के लिए अलग समयसीमा की जानकारी का इंतजार है।
अब 10 नैनोमीटर तक के छोटे कणों पर भी नजर
गौरतलब है कि BS-VII की सबसे अहम विशेषताओं में प्रदूषण फैलाने वाले बेहद छोटे कणों की जांच शामिल है। प्रस्तावित व्यवस्था में पार्टिकल नंबर टेस्टिंग के तहत 10 नैनोमीटर तक के कणों को मापने की बात कही गई है। ये सूक्ष्म कण सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं। इसके अलावा, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों पर भी सख्त नियंत्रण की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इससे वाहन कंपनियों को इंजन और प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली में तकनीकी सुधार करने पड़ सकते हैं।
टायर और ब्रेक से निकलने वाली धूल भी बनेगी जांच का हिस्सा
वाहन प्रदूषण का स्रोत केवल इंजन नहीं है। गाड़ी चलने पर टायर सड़क से रगड़ खाते हैं और ब्रेक लगाने पर ब्रेक के हिस्से घिसते हैं। इससे भी बारीक कण निकलते हैं। प्रस्तावित BS-VII मानकों में ऐसे गैर-एग्जॉस्ट प्रदूषण पर नियंत्रण के प्रावधान शामिल किए जाने की बात है। साथ ही, वास्तविक सड़क परिस्थितियों में वाहनों के उत्सर्जन की जांच को मजबूत किया जा सकता है, ताकि वाहन केवल प्रयोगशाला में ही नहीं, बल्कि सड़क पर चलते समय भी निर्धारित मानकों का पालन करें।
क्या पुरानी BS-VI कारें बंद हो जाएंगी?
विदित है कि इस खबर से मौजूदा कार मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। प्रस्तावित BS-VII मानक लागू होने का अर्थ यह नहीं है कि सभी पुरानी BS-VI गाड़ियां अपने आप बंद कर दी जाएंगी। नए मानक मुख्य रूप से निर्धारित तारीख से बनने वाले नए वाहनों पर लागू किए जाने की योजना है। पुराने वाहनों पर उम्र, फिटनेस और प्रदूषण प्रमाणपत्र से जुड़े नियम अलग से लागू रहेंगे।
क्या महंगी हो जाएंगी नई गाड़ियां?
नए मानकों को पूरा करने के लिए कंपनियों को इंजन, फिल्टर और उत्सर्जन नियंत्रण उपकरणों में सुधार करना पड़ सकता है। इससे वाहन बनाने की लागत बढ़ने की आशंका है, लेकिन ग्राहकों के लिए कीमतें कितनी बढ़ेंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
BS-VII की तैयारी भारत में वाहन प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में अगला बड़ा कदम हो सकती है। अब सबकी नजर सरकार की अंतिम अधिसूचना पर है, जिससे लागू होने की तारीखें और नए नियमों का पूरा स्वरूप स्पष्ट होगा।