नई दिल्ली: मोबाइल नेटवर्क खत्म हो गया, Wi-Fi नहीं है और आसपास कोई टावर भी नहीं है, फिर भी फोन से मैसेज भेजना संभव हो; सैटेलाइट-टू-मोबाइल तकनीक वास्तव में इसी दिशा में बड़ा बदलाव ला रही है। Airtel Africa और SpaceX की Starlink ने अफ्रीका में इस तकनीक को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। कंपनी की योजना ऐसे इलाकों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाने की है, जहां सामान्य मोबाइल टावरों का नेटवर्क नहीं पहुंच पाता। Airtel Africa ने 2026 में अपने 14 अफ्रीकी बाजारों में Starlink Direct-to-Cell सेवा शुरू करने की योजना बनाई थी।
फोन सीधे सैटेलाइट से होगा कनेक्ट
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यूजर को सामान्य मोबाइल टावर का सिग्नल नहीं मिलने पर भी सपोर्टेड स्मार्टफोन सीधे Starlink के सैटेलाइट नेटवर्क से कनेक्ट हो सकता है। इसके लिए अलग Starlink डिश या कोई विशेष सैटेलाइट फोन जरूरी नहीं है। Airtel और SpaceX का लक्ष्य मौजूदा मोबाइल नेटवर्क की पहुंच को उन इलाकों तक बढ़ाना है, जहां टावर लगाना मुश्किल या महंगा है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि फोन हर जगह सामान्य 4G/5G की तरह तेज इंटरनेट चलाने लगेगा। शुरुआती चरण में सेवा को मुख्य रूप से मैसेजिंग और कम डेटा वाले चुनिंदा कामों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
WhatsApp और SMS जैसी सुविधाएं
गौरतलब है कि शुरुआती Direct-to-Cell सेवा में SMS और चुनिंदा मैसेजिंग सेवाओं पर जोर है। Airtel Africa और SpaceX ने केन्या में किए परीक्षणों में WhatsApp मैसेजिंग, कुछ अन्य मैसेजिंग सेवाओं और हल्के डेटा वाले ऐप्स का इस्तेमाल प्रदर्शित किया था। कंपनी आगे चलकर वॉयस कॉलिंग और ज्यादा डेटा क्षमता भी जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। इसलिए इसे फिलहाल हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड का विकल्प समझना सही नहीं होगा। इसका असली फायदा उन जगहों पर है जहां नेटवर्क बिल्कुल नहीं पहुंचता।
खुले आसमान की जरूरत
सैटेलाइट से सीधे कनेक्शन के लिए फोन को आसमान का अपेक्षाकृत साफ रास्ता चाहिए। घनी इमारतों, सुरंगों या दूसरी बड़ी रुकावटों के कारण कनेक्शन प्रभावित हो सकता है। यानी यह तकनीक नेटवर्क के डेड जोन को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन हर परिस्थिति में सामान्य मोबाइल नेटवर्क की तरह काम करेगी, ऐसा मानना सही नहीं है।
दूरदराज इलाकों के लिए बड़ा बदलाव
विदित है कि अफ्रीका के कई ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में मोबाइल टावर और फाइबर नेटवर्क पहुंचाना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे इलाकों में Direct-to-Cell तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। किसान, स्वास्थ्यकर्मी, राहत एवं बचाव दल, खनन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी और दूर-दराज यात्रा करने वाले लोग इससे बुनियादी संचार सुविधाओं से जुड़े रह सकते हैं। Airtel Africa और SpaceX ने दिसंबर 2025 में 14 अफ्रीकी बाजारों में Starlink Direct-to-Cell कनेक्टिविटी लाने का समझौता किया था। सेवा का विस्तार संबंधित देशों की नियामकीय मंजूरियों के अनुसार किया जाना है।
भारत में कब आएगी ऐसी सुविधा?
भारत में Airtel ने मार्च 2025 में SpaceX के साथ Starlink सेवाओं को अपने ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए समझौता किया था। हालांकि भारत में ऐसी Direct-to-Cell सेवा कब और किस रूप में शुरू होगी, यह सरकारी और नियामकीय मंजूरियों तथा संबंधित कंपनियों की लॉन्च योजना पर निर्भर करेगा।
यानी आने वाला समय ऐसा हो सकता है जब मोबाइल कनेक्टिविटी सिर्फ टावरों पर निर्भर न रहे। जहां नेटवर्क खत्म होगा, वहां आसमान से कनेक्शन मिलने की संभावना होगी। Airtel-Starlink की यह तकनीक फिलहाल शुरुआती चरण में है, लेकिन दूरदराज इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।