नई दिल्ली: चाय-पानी से लेकर सब्जी, किराना, ऑनलाइन शॉपिंग और कैब तक में आज करोड़ों भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी में UPI बेहद जरूरी हो चुका है। ऐसे में UPI पेमेंट पर चार्ज लगने की चर्चा ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नए टैक्स संशोधन बिल के बाद सवाल उठने लगा कि क्या अब QR कोड स्कैन करके पैसे भेजने पर ग्राहक को भी अतिरिक्त रकम देनी होगी? फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए राहत की खबर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) की ओर से स्पष्ट किया गया है कि आम ग्राहकों से UPI इस्तेमाल करने का कोई शुल्क लेने की बात नहीं है। यानी व्यक्ति से व्यक्ति पैसे भेजने या सामान्य खरीदारी में UPI का इस्तेमाल पहले की तरह मुफ्त रह सकता है।
फिर UPI चार्ज की चर्चा क्यों शुरू हुई?
दरअसल, संसद में पेश Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के बाद MDR यानी Merchant Discount Rate को लेकर चर्चा तेज हुई है। MDR वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के लिए व्यापारी और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच लगाया जा सकता है। यही बात सोशल मीडिया और राजनीतिक बहस में इस सवाल का कारण बनी कि कहीं भविष्य में इसका बोझ ग्राहकों पर तो नहीं आएगा। हालांकि सरकार का कहना है कि मर्चेंट पर लगने वाला शुल्क और ग्राहक से UPI इस्तेमाल का शुल्क अलग-अलग चीजें हैं।
क्या ₹2,000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा?
आपको बता दें कि प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर चर्चा है कि ₹2,000 से अधिक के कुछ बड़े कारोबारी UPI लेन-देन पर MDR लगाया जा सकता है। अलग-अलग रिपोर्टों में संभावित दर 0.25% से 0.5% तक बताई गई है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ₹2,000 से ज्यादा का भुगतान करने वाले हर ग्राहक से UPI चार्ज लिया जाएगा। संभावित MDR मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट और पेमेंट सिस्टम के बीच शुल्क की व्यवस्था होगी।
छोटे दुकानदारों को भी राहत
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छोटे किराना दुकानदार, सब्जी विक्रेता और छोटे कारोबारियों को इस तरह के शुल्क से बाहर रखने की बात कही गई है। यानी रोजमर्रा की छोटी खरीदारी करने वाले लोगों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
ग्राहक से पैसा कौन लेगा?
गौरतलब है कि PCI ने भी स्पष्ट किया है कि UPI ग्राहकों के लिए फ्री बना रहेगा। अगर भविष्य में बड़े कारोबारियों से कोई मर्चेंट सर्विस चार्ज लिया जाता है तो वह व्यापारी और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच व्यावसायिक व्यवस्था होगी। ग्राहक से UPI इस्तेमाल करने के नाम पर अलग से शुल्क लेना इसका सीधा मतलब नहीं है।
फिर MDR की जरूरत क्यों पड़ रही है?
UPI के पीछे सिर्फ QR कोड और मोबाइल ऐप नहीं है। इसके लिए बड़े स्तर पर सर्वर, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड रोकने की व्यवस्था, तकनीकी ढांचा और 24 घंटे चलने वाला नेटवर्क चाहिए। इसका खर्च बैंक, फिनटेक कंपनियां और दूसरे नेटवर्क पार्टनर्स उठाते हैं। UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इस पूरे सिस्टम को लंबे समय तक सुरक्षित और मजबूत बनाए रखने के लिए फंडिंग की जरूरत भी बढ़ रही है। इसी वजह से बड़े कारोबारियों से संभावित MDR को लेकर चर्चा हो रही है।
आम यूजर के लिए फिलहाल क्या मतलब?
सब मिलाकर UPI इस्तेमाल करने वाले आम ग्राहक को फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति पैसे भेजना हो या छोटे दुकानदार को QR स्कैन कर भुगतान करना; UPI पर ग्राहक से चार्ज लेने की कोई सामान्य व्यवस्था घोषित नहीं हुई है। आगे बड़े कारोबारियों पर MDR की व्यवस्था लागू होती है या नहीं, इसकी तस्वीर संबंधित प्रक्रिया और फैसलों के बाद ही साफ होगी। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि UPI पेमेंट महंगा होने जा रहा है।