नई दिल्ली: अगर आप वाहन चलाते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 15 अगस्त 2026 से ट्रैफिक नियमों को लेकर देशभर में नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब कई मामलों में सड़क पर ही जुर्माना भरकर छुटकारा नहीं मिलेगा। ट्रैफिक पुलिस या प्रवर्तन अधिकारी केवल चालान बनाएंगे और मामला सीधे अदालत भेजा जाएगा। इसके बाद कोर्ट के आदेश के अनुसार ही जुर्माना जमा करना होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन के बाद नई अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत करीब 23 प्रकार के ट्रैफिक उल्लंघनों को मौके पर जुर्माना वसूलने (कंपाउंडिंग) की सूची से बाहर कर दिया गया है। नई व्यवस्था 15 अगस्त 2026 से लागू होगी।
किन मामलों में अब सड़क पर नहीं होगा जुर्माना?
आपको बता दें कि नई व्यवस्था के तहत हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, बिना बीमा वाहन चलाना, बिना रजिस्ट्रेशन या फिटनेस वाहन चलाना, बिना परमिट वाहन चलाना, परमिट की शर्तों का उल्लंघन, ओवरलोड वाहन चलाना, तय सीमा से अधिक सामान बाहर निकालकर ले जाना, क्षमता से अधिक सवारी बैठाना, वाहन में अवैध मॉडिफिकेशन कराना, मॉडिफाइड साइलेंसर का इस्तेमाल, निषेध क्षेत्र में हॉर्न बजाना, वायु एवं ध्वनि प्रदूषण से जुड़े उल्लंघन और वाहन के जरूरी दस्तावेज नहीं होने जैसे मामलों में अब चालान कोर्ट भेजा जाएगा।
पहली बार चेतावनी, दूसरी बार कार्रवाई
सरकार ने कुछ मामलों में राहत भी दी है। वायु और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े उल्लंघनों के साथ-साथ बिना रजिस्ट्रेशन और बिना फिटनेस वाले वाहन पहली बार पकड़े जाने पर चेतावनी दी जा सकती है। यदि दोबारा वही उल्लंघन मिलता है तो मामला कोर्ट भेजा जाएगा और न्यायालय के आदेश के बाद जुर्माना लगाया जाएगा।
क्यों किया गया बदलाव?
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा-200 में संशोधन कर कंपाउंडिंग व्यवस्था में बदलाव किया है। इससे पहले अधिकांश मामलों में सड़क पर ही जुर्माना लेकर मामला समाप्त हो जाता था। अब गंभीर श्रेणी के कई ट्रैफिक उल्लंघनों का फैसला अदालत करेगी, जिससे नियमों का पालन और अधिक सख्ती से कराया जा सके।
वाहन चालकों पर क्या पड़ेगा असर?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद ट्रैफिक नियम तोड़ने पर मौके पर जुर्माना देकर मामला खत्म नहीं होगा। चालान कोर्ट में पेश किया जाएगा और न्यायालय के आदेश के बाद ही जुर्माना जमा करना होगा। इससे मामलों के निस्तारण में पहले की तुलना में अधिक समय लग सकता है और वाहन चालकों को अदालत की प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ सकता है।
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से ट्रैफिक नियमों के पालन में सुधार होगा, बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्ती बढ़ेगी और सड़क सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सकेगा।