यूपी के होटल-रेस्टोरेंट में अब Veg और Non-Veg के लिए होगी अलग रसोई!: चाकू और बर्तन भी रखने होंगे अलग, वहीं नियम के उल्लंघन पर...जानें किन नियमों में हुए बदलाव और कब से होंगे लागू
यूपी के होटल-रेस्टोरेंट में अब Veg और Non-Veg के लिए होगी अलग रसोई!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और फास्ट-फूड प्रतिष्ठानों की रसोई व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब शाकाहारी और मांसाहारी भोजन तैयार करने वाले प्रतिष्ठानों को दोनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था करनी होगी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने पकाए जाने वाले और रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर नए मानकों के अनुपालन पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी की है। 1 नवंबर से इन नियमों का पालन सुनिश्चित कराने पर विशेष जोर रहेगा। नई व्यवस्था का मकसद सिर्फ वेज और नॉनवेज भोजन को अलग रखना नहीं, बल्कि भोजन में किसी भी तरह के क्रॉस-कंटामिनेशन यानी एक खाद्य पदार्थ से दूसरे में संक्रमण या मिलावट की संभावना को कम करना है। इसके लिए किचन से लेकर स्टोरेज और खाद्य पदार्थ तैयार करने की प्रक्रिया तक कई स्तरों पर जांच की जाएगी।

अलग होगी वेज और नॉनवेज की रसोई व्यवस्था

आपको बता दें कि नए मानकों के तहत होटल और रेस्टोरेंट में शाकाहारी तथा मांसाहारी भोजन तैयार करने के लिए अलग-अलग किचन या निर्धारित अलग क्षेत्र की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। कच्चे मांस, पोल्ट्री और समुद्री उत्पादों को रखने तथा तैयार करने के लिए भी अलग जगह होनी चाहिए। इतना ही नहीं, दोनों तरह के भोजन के लिए इस्तेमाल होने वाले कटिंग बोर्ड, चाकू और बर्तन भी अलग रखने होंगे। इससे कच्चे मांस के संपर्क में आने वाले उपकरणों से शाकाहारी भोजन के दूषित होने की आशंका कम की जा सकेगी।

निरीक्षण में किचन से लेकर स्टोरेज तक होगी जांच

गौरतलब है कि FSDA की जांच सिर्फ खाने की सामग्री तक सीमित नहीं रहेगी। अधिकारियों की टीम होटल और रेस्टोरेंट में खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण, किचन, डाइनिंग एरिया, स्टोरेज, ड्रेनेज और साफ-सफाई जैसी व्यवस्थाओं को भी देखेगी। किचन की दीवार, फर्श और छत की स्थिति भी जांच का हिस्सा होगी। अधिकारियों का उद्देश्य यह देखना होगा कि कहीं ऐसी स्थिति तो नहीं है जिससे खाद्य पदार्थों में भौतिक, रासायनिक या माइक्रोबियल संदूषण का खतरा पैदा हो।

कच्चे मांस के लिए अलग क्षेत्र और उपकरण जरूरी

मांसाहारी भोजन तैयार करने वाले प्रतिष्ठानों में कच्चे मांस, पोल्ट्री और समुद्री उत्पादों के लिए अलग क्षेत्र रखना महत्वपूर्ण होगा। इन खाद्य पदार्थों के लिए इस्तेमाल होने वाले चाकू, कटिंग बोर्ड और अन्य बर्तन अलग रखने होंगे। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि कच्चे मांस के संपर्क में आए उपकरण दोबारा शाकाहारी भोजन तैयार करने में इस्तेमाल न हों।

मांस काटने के बाद सतह की सफाई भी जरूरी

विदित है कि कच्चे मांस या पोल्ट्री को तैयार करने के बाद उस सतह की अच्छी तरह सफाई करनी होगी। विभागीय मानकों के अनुसार ऐसी सतह को उपयुक्त बैक्टीरिया-रोधी क्लीनिंग एजेंट से साफ करने, पानी से धोने और सैनिटाइज करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे कच्चे मांस से संभावित बैक्टीरिया दूसरी खाद्य सामग्री तक पहुंचने के जोखिम को कम किया जा सकेगा।

नियमों का उल्लंघन मिला तो कार्रवाई

निरीक्षण के दौरान यदि खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया गया तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। यानी आने वाले समय में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को सिर्फ स्वाद और सर्विस ही नहीं, बल्कि किचन की व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा मानकों पर भी विशेष ध्यान देना होगा।

यूपी में 1 नवंबर से शुरू होने वाली सख्ती का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक तक पहुंचने वाला भोजन सुरक्षित हो और वेज-नॉनवेज खाद्य पदार्थों के बीच अनचाही मिलावट या संक्रमण की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।

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