लोहे की कढ़ाई में भूलकर भी न पकाएं ये 6 चीजें!: स्वाद से लेकर सेहत तक पर पड़ सकता बुरा असर, जानिए लोहे की कढ़ाई में खाना पकातें समय किन बातों का जरूर रखना चाहिए ध्यान
लोहे की कढ़ाई में भूलकर भी न पकाएं ये 6 चीजें!

लाइफस्टाइल: भारतीय रसोई में लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है। दादी-नानी के जमाने से लेकर आज तक कई घरों में इसमें सब्जियां और दूसरी चीजें बनाई जाती हैं। इसकी खास बात यह है कि लोहे के बर्तन में खाना पकाने से भोजन में कुछ मात्रा में आयरन शामिल हो सकता है। यही वजह है कि बहुत से लोग इसे सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोहे की कढ़ाई हर तरह के व्यंजन बनाने के लिए सही विकल्प नहीं है? खासकर ज्यादा खट्टे खाद्य पदार्थों को लोहे के बर्तन में पकाने या लंबे समय तक रखने से खाने में धातु का स्वाद आ सकता है और उसका रंग भी बदल सकता है। इसलिए अगली बार कढ़ाई चढ़ाने से पहले जान लें कि किन चीजों को दूसरे बर्तन में बनाना बेहतर रहेगा।

1. टमाटर वाली ग्रेवी बनाते समय बरतें सावधानी

आपको बता दें कि भारतीय सब्जियों में टमाटर का इस्तेमाल आम है। लेकिन टमाटर में प्राकृतिक अम्ल होते हैं, जो लोहे की सतह के साथ प्रतिक्रिया कर सकते हैं। खासकर जब टमाटर की ग्रेवी को लंबे समय तक पकाया जाए, तो खाने का रंग और स्वाद प्रभावित हो सकता है। अगर आप टमाटर की गाढ़ी करी या सॉस बना रहे हैं, तो स्टेनलेस स्टील या दूसरे उपयुक्त बर्तन का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

2. नींबू और अमचूर वाली चीजें

गौरतलब है कि नींबू का रस, अमचूर और दूसरे खट्टे पदार्थ भोजन का स्वाद बढ़ाते हैं। लेकिन इनका अधिक इस्तेमाल करके लोहे की कढ़ाई में खाना पकाने से उसमें लोहे की मात्रा बढ़ सकती है। इससे स्वाद में धातु जैसा एहसास भी आ सकता है। इसलिए नींबू या अमचूर डालकर किसी व्यंजन को लंबे समय तक लोहे की कढ़ाई में पकाने से बचें। जरूरत हो तो खट्टे मसाले खाना पकने के बाद मिलाएं और भोजन को लंबे समय तक उसी बर्तन में न रखें।

3. कढ़ी और दही वाली ग्रेवी

बेसन की कढ़ी, दही वाली सब्जी और छाछ से बनने वाले व्यंजनों में भी खट्टापन होता है। इन्हें लोहे के बर्तन में देर तक पकाने से स्वाद और रंग बदल सकता है। ऐसे व्यंजन बनाने के लिए स्टेनलेस स्टील का बर्तन अधिक सुविधाजनक विकल्प है।

4. पालक और दूसरी हरी पत्तेदार सब्जियां

विदित है कि पालक और दूसरी हरी सब्जियों में कई पोषक तत्व होते हैं। इन्हें लोहे की कढ़ाई में पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है, लेकिन रंग और स्वाद में बदलाव भी हो सकता है। पालक का गहरा पड़ जाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि खाना नुकसानदेह हो गया है। यदि आप पालक का प्राकृतिक रंग और स्वाद बनाए रखना चाहते हैं, तो इसे उपयुक्त दूसरे बर्तन में पकाएं और तैयार होने के बाद लंबे समय तक लोहे की कढ़ाई में न छोड़ें।

5. इमली की चटनी और सांभर

इमली, टमाटर और दूसरे खट्टे पदार्थों से तैयार सांभर या चटनी को लोहे के बर्तन में देर तक पकाने से धातु के साथ प्रतिक्रिया होने की आशंका रहती है। इससे खाने का जायका बदल सकता है। ऐसे व्यंजनों के लिए स्टेनलेस स्टील का बर्तन बेहतर विकल्प रहेगा।

6. सिरका और खट्टे सॉस वाले नूडल्स-पास्ता

नूडल्स और पास्ता बनाते समय कई लोग सिरका, टमाटर सॉस या दूसरे खट्टे सॉस डालते हैं। इन सामग्रियों के कारण लोहे की कढ़ाई में खाना पकाते समय स्वाद प्रभावित हो सकता है। इसलिए ऐसे व्यंजनों के लिए उपयुक्त स्टील का पैन या कढ़ाई इस्तेमाल करना बेहतर है।

क्या सेहत पर भी पड़ सकता है बुरा असर?

आपको बता दें कि लोहे की कढ़ाई में खट्टे व्यंजन लंबे समय तक पकाने से खाने में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है और स्वाद बदल सकता है। कुछ लोगों में अधिक आयरन से पेट दर्द, मतली या कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए खट्टे व्यंजनों के लिए स्टेनलेस स्टील के बर्तन का इस्तेमाल बेहतर है।

लोहे की कढ़ाई इस्तेमाल करते समय ये बातें भी याद रखें

लोहे की कढ़ाई में खाना बनाना सामान्य तौर पर सुरक्षित हो सकता है, बशर्ते बर्तन साफ और सही हालत में हो। इसे इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह सुखाएं, ताकि जंग न लगे। पके हुए भोजन, खासकर खट्टे व्यंजनों को लंबे समय तक इसमें रखकर न छोड़ें।

ध्यान रहे, लोहे के बर्तन में खाना पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ सकती है, लेकिन यह हर व्यक्ति में आयरन की कमी दूर करने का निश्चित उपाय नहीं है। सही बर्तन का चुनाव व्यंजन, पकाने के समय और सामग्री पर निर्भर करता है। छोटी-सी सावधानी से आप खाने का स्वाद बनाए रख सकते हैं और रसोई में लोहे की कढ़ाई का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं।

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