जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव!: समय पर नहीं कराया रजिस्ट्रेशन तो...वही इतने दिनों में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा अनिवार्य, जानें किन नियमों में हुए प्रमुख बदलाव?
जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियमों में बड़ा बदलाव!

नई दिल्ली: जन्म और मृत्यु का पंजीकरण अब सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड भर नहीं है। जन्म प्रमाणपत्र कई महत्वपूर्ण कामों में उम्र और जन्मस्थान के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल होता है। 2023 के संशोधन के बाद, 1 अक्टूबर 2023 से लागू प्रावधानों के तहत जन्म प्रमाणपत्र को शिक्षा में प्रवेश, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची, विवाह पंजीकरण, सरकारी नौकरी, पासपोर्ट और आधार नंबर जैसे कामों के लिए जन्मतिथि और जन्मस्थान के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसी वजह से जन्म या मृत्यु की सूचना समय पर देना बेहद जरूरी है। 2026 में हुए नए बदलाव ने देरी से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को और सख्त किया है, खासकर दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में।

21 दिन के भीतर कराएं पंजीकरण

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जन्म या मृत्यु की सूचना सामान्य तौर पर 21 दिनों के भीतर संबंधित रजिस्ट्रार को देनी चाहिए। यही सबसे आसान और सुरक्षित तरीका है। 21 दिन की निर्धारित अवधि के बाद भी पंजीकरण कराया जा सकता है, लेकिन देरी बढ़ने के साथ प्रक्रिया और शुल्क दोनों बढ़ सकते हैं। इसलिए परिवार को जन्म या मृत्यु के बाद प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना चाहिए।

21 से 30 दिन की देरी पर लगेगी लेट फीस

गौरतलब है कि अगर 21 दिन की अवधि निकल गई है, लेकिन घटना के 30 दिनों के भीतर सूचना दे दी जाती है, तो पंजीकरण कराया जा सकता है। इस स्थिति में निर्धारित विलंब शुल्क देना पड़ सकता है। यानी 21 दिन बीत जाने का मतलब यह नहीं है कि प्रमाणपत्र नहीं बन सकता, लेकिन सामान्य प्रक्रिया से अलग शुल्क लागू हो सकता है।

30 दिन से एक साल तक क्या होगा?

अगर जन्म या मृत्यु की सूचना 30 दिन के बाद लेकिन एक साल के भीतर दी जाती है, तो मामला और गंभीर हो जाता है। ऐसे पंजीकरण के लिए जिला रजिस्ट्रार या निर्धारित प्राधिकारी की लिखित अनुमति, निर्धारित शुल्क और आवश्यक दस्तावेज देने होते हैं। इसलिए देरी होने पर भी इसे टालते रहना समझदारी नहीं है।

एक साल से दो साल तक DM या SDM की अनुमति

विदित है कि 2026 के संशोधन का महत्वपूर्ण बदलाव एक साल से ज्यादा लेकिन दो साल तक की देरी से जुड़ा है। अब ऐसे मामले में पंजीकरण के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या DM द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। संबंधित अधिकारी जन्म या मृत्यु की जानकारी की सत्यता की जांच करने के बाद ही पंजीकरण की अनुमति दे सकता है।

दो साल बाद सीधे कोर्ट की निगरानी

सबसे बड़ा बदलाव दो साल से अधिक पुराने मामलों को लेकर है। ऐसी स्थिति में अब पंजीकरण के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) का आदेश जरूरी होगा। मजिस्ट्रेट जानकारी की सत्यता की जांच के बाद ही पंजीकरण की अनुमति दे सकता है और निर्धारित शुल्क भी देना होगा। इससे सरकार का उद्देश्य फर्जी या गलत जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड पर रोक लगाना और आधिकारिक आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ाना है।

जन्म प्रमाणपत्र को हल्के में न लें

आज जन्म प्रमाणपत्र का महत्व काफी बढ़ गया है। 2023 के कानून के तहत नए प्रावधानों में इसे शिक्षा, ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता सूची, विवाह पंजीकरण, सरकारी नियुक्ति, पासपोर्ट और आधार जैसे मामलों में जन्मतिथि और जन्मस्थान के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल करने की व्यवस्था है।

इसलिए सबसे आसान रास्ता यही है कि जन्म या मृत्यु के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण करा लें। जितनी ज्यादा देरी होगी, उतने ज्यादा दस्तावेज, अनुमति और कानूनी प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।

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