भारत मे बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की तैयारी!: क्या Meta-X-Youtube पर कसने वाला है शिकंजा, IT मंत्री ने दिए बड़े संकेत? आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा को लेकर हो सकते ये बड़े और सख्त बदलाव_एक नज़र
भारत मे बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की तैयारी!

नई दिल्ली/तकनीकी : देश में मोबाइल और इंटरनेट जितनी तेजी से बच्चों की दुनिया बनते जा रहे हैं, उतनी ही तेजी से खतरे भी बढ़ रहे हैं। नशे की तरह लत, गलत कंटेंट, साइबर बुलिंग और सबसे खतरनाक डीपफेक। अब सरकार इस पूरे मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। AI समिट के दौरान केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साफ संकेत दिए कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर बड़ा फैसला आने वाला है।

क्या सच में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया बैन होगा?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मंत्री ने सीधे “बैन” शब्द नहीं कहा, लेकिन उनके बयान ने साफ कर दिया कि सरकार गंभीर विकल्पों पर विचार कर रही है। सरकार सोशल मीडिया कंपनियों से लगातार बातचीत कर रही है। जिसमें उम्र आधारित एक्सेस कंट्रोल लागू करने पर चर्चा हो रही है। बच्चों को केवल सुरक्षित और उम्र के अनुसार कंटेंट दिखाने की तैयारी है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून (DPDP Act) में पहले से प्रावधान मौजूद है। इसका मतलब साफ है कि या तो कंपनियां नियम मानेंगी या सरकार नियम बनाकर मनवाएगी।

कंपनियों को कड़ा संदेश; भारत के कानून सबसे ऊपर :

गौरतलब है कि आईटी मंत्री ने बिना नाम लिए बड़ी टेक कंपनियों को चेतावनी दी कि भारत में काम करना है तो भारत के कानून मानने होंगे। इसका सीधा असर Meta (Facebook, Instagram), X (Twitter), YouTube, Netflix और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि भारत की संप्रभुता और बच्चों की सुरक्षा किसी भी एल्गोरिद्म से बड़ी है।

डीपफेक बना सबसे बड़ा खतरा :

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार खास तौर पर डीपफेक को लेकर चिंतित है। फर्जी वीडियो से ब्लैकमेल, बच्चों के चेहरे का गलत इस्तेमाल और गलत सूचना और मानसिक नुकसान जैसे कार्य डीपफेक में आते हैं। मंत्री ने संकेत दिया कि मौजूदा नियम कम पड़ रहे हैं और जरूरत पड़ी तो संसद में नया सख्त कानून लाया जाएगा। एक संसदीय समिति पहले ही इस पर विस्तृत रिपोर्ट दे चुकी है।

दुनिया क्या कर रही है?

गौरतलब है कि भारत अकेला ऐसा नहीं सोच रहा।

●ऑस्ट्रेलिया: 16 साल से कम बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन

●फ्रांस: पैरेंटल कंसेंट जरूरी

●यूके: सख्त एज वेरिफिकेशन कानून

यानी पूरी दुनिया अब बच्चों के डिजिटल बचपन को बचाने की कोशिश में है और भारत भी उसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

आगे क्या बदल सकता है?

विदित है कि आने वाले समय में आप ये बदलाव देख सकते हैं:

●उम्र वेरिफिकेशन अनिवार्य

●बच्चों के अकाउंट पर लिमिटेड फीचर

●रात में उपयोग प्रतिबंध

●एल्गोरिद्म-आधारित कंटेंट फ़िल्टर

●डीपफेक पर तुरंत कार्रवाई

असली मकसद क्या है?

गौरतलब है कि सरकार सोशल मीडिया बंद नहीं करना चाहती लेकिन सरकार बचपन को बचाना चाहती है। तकनीक रहे, लेकिन सुरक्षित रहे। मनोरंजन रहे, लेकिन मानसिक नुकसान न हो। अब सवाल ये नहीं कि बदलाव होगा या नहीं सवाल ये है कि कब और कितना बड़ा होगा।

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