नई दिल्ली: गाड़ी का पुराना चालान, महीनों से पेंडिंग केस और कोर्ट के बार-बार चक्कर से परेशान लोगों की परेशानी लगभग खत्म होने जा रहा है। दिल्ली में ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए नया डिजिटल लोक अदालत सिस्टम शुरू कर दिया गया है, जिसके जरिए लोग घर बैठे अपना चालान देख, तारीख चुन और तुरंत निपटारा कर सकते हैं। सरकार का दावा है कि अब चालान क्लियर कराने में न लाइन, न दलाल और न ही लंबा इंतजार करना होगा।
क्या है डिजिटल लोक अदालत?
आपकी जानकारी के लिए बता डदें कि यह एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म/ऐप है जिसे ट्रैफिक पुलिस, लीगल सर्विसेज अथॉरिटी और टेक्निकल एजेंसियों ने मिलकर बनाया है। इसका मकसद चालान प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और आसान बनाना है।
पहले क्या होता था?
गौरतलब है कि पहले चालान जमा होता था, फिर महीनों अपडेट नहीं, रिकॉर्ड मिसमैच हो जाता था, इससे बार-बार कोर्ट विजिट करना होता था।
अब क्या होगा?
आपको बता दें कि अब सब रियल-टाइम अपडेट के साथ कार्य होगा एक क्लिक में पूरी जानकारी मिलेगी। और SMS से स्टेटस प्राप्त होगा।
SMS से मिलेगा हर अपडेट :
विदित है कि अब चालान निपटते ही मोबाइल पर मैसेज आएगा। भुगतान हुआ या नहीं, केस बंद हुआ या नहीं, रिकॉर्ड अपडेट हुआ नहीं सब पता चलता रहेगा। यानी बार-बार वेबसाइट खोलने या दफ्तर जाने की जरूरत खत्म होगी।
कितने चालान निपटे?
आपको बता दें कि अब तक एक साथ लगभग 1.9 लाख से ज्यादा चालानों का निपटारा इस डिजिटल सिस्टम से किया जा चुका है। अधिकारियों का दावा है कि इससे न्याय प्रक्रिया की स्पीड कई गुना बढ़ी।
स्टेप-बाय-स्टेप: घर बैठे चालान कैसे निपटाएं?
वाहन नंबर डालें
पोर्टल/ऐप खोलें फिर गाड़ी नंबर डालें फिर OTP से लॉगिन
चालान देखें
सभी पेंडिंग चालान स्क्रीन पर दिखाई देंगे
लोक अदालत चुनें
जिस चालान का निपटारा करना है उसे सिलेक्ट करें
पास की कोर्ट + तारीख + टाइम चुनें
अंडरटेकिंग सबमिट
डिक्लेरेशन टिक करें फिर स्लिप डाउनलोड/सेव
तय समय पर पेश हों
कोर्ट में बारकोड स्कैन फिर अधिकारी आदेश पास
जुर्माना भरें
भुगतान होते ही सिस्टम में तुरंत अपडेट
केस वहीं खत्म, अब दोबारा आने की जरूरत नहीं।
क्या बदलेगा आम आदमी के लिए?
●दलालों से छुटकारा
●समय और पैसा बचत
●पारदर्शी प्रक्रिया
●गलत चालान भी तुरंत क्लियर
असल बदलाव क्या है?
गौरतलब है कि यह सिर्फ ऑनलाइन भुगतान नहीं यह न्याय प्रक्रिया का डिजिटलीकरण है। पहले “चालान खत्म हुआ या नहीं?” पता करने में हफ्ते लगते थे। अब भुगतान किया फिर तुरंत केस बंद।
क्यों जरूरी था ये सिस्टम?
विदित है कि अधिकारियों के मुताबिक सबसे बड़ी समस्या अलग-अलग प्लेटफॉर्म, मैन्युअल एंट्री, अपडेट में देरी थी। डिजिटल लोक अदालत इन्हें खत्म कर एक यूनिफाइड सिस्टम देती है।
ट्रैफिक चालान अब कानूनी सिरदर्द नहीं बल्कि मोबाइल-आधारित प्रक्रिया बनता जा रहा है और आने वाले समय में इसे दूसरे राज्यों में भी लागू करने की तैयारी मानी जा रही है।