उत्तराखंड : उत्तराखंड सरकार ने साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में ऐसा फैसला लिया है, जो न सिर्फ देश बल्कि दुनिया भर के पर्वतारोहियों को आकर्षित करने वाला है। गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय की 83 प्रमुख पर्वत चोटियां अब आधिकारिक तौर पर पर्वतारोहण के लिए खोल दी गई हैं। खास बात यह है कि भारतीय पर्वतारोहियों से किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाएगी, जबकि विदेशियों को भी पहले से कहीं ज्यादा राहत दी गई है। यह ऐतिहासिक फैसला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर लिया गया है, जिसे उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) और वन विभाग ने मिलकर लागू किया है। सरकार का साफ संदेश है; उत्तराखंड को ग्लोबल एडवेंचर टूरिज्म हब बनाना।
भारतीय पर्वतारोहियों के लिए बड़ी खुशखबरी; 100% शुल्क माफी :
आपको बता दें कि अब देश के पर्वतारोहियों को 83 अधिसूचित चोटियों पर चढ़ाई के लिए कोई सरकारी शुल्क नहीं देना होगा। इसमें पीक फीस, कैंपिंग चार्ज, ट्रेल मैनेजमेंट फीस और पर्यावरण शुल्क शामिल है। सरकार का मकसद युवाओं को पर्वतारोहण और एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए प्रेरित करना है, ताकि देश के भीतर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के अभियान तैयार हो सकें।
विदेशियों को भी राहत; दोहरी फीस खत्म :
गौरतलब है कि पहले विदेशी पर्वतारोहियों को दो जगह फीस देनी पड़ती थी; वन विभाग और Indian Mountaineering Foundation। अब वन विभाग की ओर से लिया जाने वाला अभियान शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। विदेशी पर्वतारोही अब सिर्फ IMF द्वारा तय शुल्क ही चुकाएंगे।
सिंगल विंडो सिस्टम से आवेदन; अब परमिशन होगी आसान :
सरकार ने ऑफलाइन प्रक्रिया खत्म कर उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम (UKMPS) लागू किया है। अब पर्वतारोहियों को अनुमति के लिए www.mountaineering.uk.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी होगी, मंजूरी जल्दी मिलेगी और फाइलों और दफ्तरों के चक्कर खत्म होंगे।
5,700 से 7,756 मीटर तक की ऊंची चोटियां खुलीं :
गौरतलब है कि इस फैसले के तहत हिमालय की कुछ सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण चोटियां भी खोली गई हैं -
●कामेट – 7,756 मीटर (चमोली)
●नंदा देवी (पूर्वी) – 7,434 मीटर (चमोली)
●चौखंबा समूह – 7,138 मीटर
●त्रिशूल-I – 7,120 मीटर
●सतोपंथ – 7,075 मीटर
●केदारनाथ पीक – 6,940 मीटर
●शिवलिंग – 6,543 मीटर
●भागीरथी-I – 6,856 मीटर
●पंचाचूली – 6,354 मीटर
ये चोटियां लंबे समय से पर्वतारोहियों का सपना रही हैं, लेकिन अब तक इन तक पहुंच सीमित थी।
रोजगार और सीमावर्ती इलाकों को मिलेगा फायदा :
पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्बयाल के मुताबिक, यह फैसला उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा। इससे सीमावर्ती और दूरस्थ इलाकों में पर्यटन बढ़ेगा, स्थानीय युवाओं को गाइड, पोर्टर और लॉजिस्टिक्स में रोजगार मिलेगा, साथ ही होम-स्टे, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय कारोबार को नई रफ्तार मिलेगी। सरकार ने पर्वतारोहियों से सुरक्षा मानकों और पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील भी की है।
उत्तराखंड का यह फैसला सिर्फ एक पर्यटन नीति नहीं, बल्कि हिमालयी क्षेत्रों के आर्थिक, सामाजिक और साहसिक भविष्य की नींव है। अब पहाड़ सिर्फ देखने के लिए नहीं, बल्कि फतह करने के लिए बुला रहे हैं।