बद्रीनाथ-केदारनाथ में मुस्लिम-ईसाइयों की एंट्री के लिए बनेंगे नए नियम!: सनातन धर्म में आस्था का एफिडेविड और...वही विपक्ष बोला- सियासी लाभ के लिए...जानें क्या होंगे एंट्री के नए नियम_एक नजर
बद्रीनाथ-केदारनाथ में मुस्लिम-ईसाइयों की एंट्री के लिए बनेंगे नए नियम!

देहरादून/हरिद्वार: देवभूमि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध बद्रीनाथ और केदारनाथ धामों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर एक सख्त एसओपी तैयार कर रही है। इसके तहत अब किसी भी गैर-हिंदू श्रद्धालु को बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए पहले यह लिखित घोषणा यानी एफिडेविड देनी होगी कि वे सनातन धर्म में आस्था रखते हैं और मंदिर की परंपराओं का सम्मान करेंगे।

क्या होगा नियम?

आपको बता दें कि मंदिर समिति एक ऐसा घोषणा-पत्र (हलफनामा/एफिडेविट) तैयार कर रही है, जिसे दर्शन के इच्छुक गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को भरना होगा। इसमें उन्हें लिखित रूप में यह स्वीकार करना होगा:

  • वे सनातन धर्म में आस्था रखते हैं

  • मंदिर की सभी परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान करेंगे

  • वे अपनी इच्छा से यह घोषणा कर रहे हैं, किसी दबाव में नहीं हैं

मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने साफ किया कि यह नियम सभी वीआईपी हस्तियों पर भी लागू होगा। उन्होंने कहा, "अगर कोई गैर-हिंदू सनातन धर्म के प्रति अपनी आस्था जाहिर करता है और हलफनामा जमा करता है, तो उसे मंदिर में प्रवेश के साथ पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी जाएगी।"

सारा अली खान पर क्या असर?

गौरतलब है कि यह नियम बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान पर भी लागू होगा, जो हर साल बद्रीनाथ-केदारनाथ की यात्रा करती हैं और अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं। सारा ने 2018 में फिल्म 'केदारनाथ' से डेब्यू किया था और तब से वह नियमित रूप से इन धामों के दर्शन करने आती हैं। विदित है कि सारा के पिता सैफ अली खान मुस्लिम हैं, जबकि मां अमृता सिंह सिख हैं। हालांकि अपने पुराने इंटरव्यू में सारा ने खुद को "गौरवान्वित भारतीय" कहा है। अब उन्हें भी दर्शन से पहले यह हलफनामा देना होगा।

क्या कहते हैं BKTC अध्यक्ष?

मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह व्यवस्था कोई नया नियम नहीं है। उनके अनुसार आदि गुरु शंकराचार्य के समय से ही धामों की पवित्रता और परंपराओं को बनाए रखने पर जोर दिया जाता रहा है। उन्होंने कहा, "चारधाम सनातन धर्म की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इसलिए मंदिर परिसर और विशेष रूप से गर्भगृह के आसपास वही लोग प्रवेश करें जिनकी सनातन धर्म में आस्था हो।" फिलहाल इस व्यवस्था को लागू करने से पहले मंदिर समिति विधिक राय ले रही है। समिति का गठन "द यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट 1939" के तहत हुआ था, जिसके तहत उसे नियम बनाने का अधिकार है।

चारधाम यात्रा के आंकड़े:

गौरतलब है कि 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के लिए देशभर में उत्साह दिख रहा है। 6 मार्च से शुरू हुई रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में 13 दिनों के भीतर ही 6,86,305 श्रद्धालु पंजीकरण करवा चुके हैं। औसतन हर दिन करीब 52 हजार लोग यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि जो लोग पहले से रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं, उनमें यदि कोई गैर-सनातनी हुआ तो नई व्यवस्था लागू होने के बाद उसके मामले को कैसे संभाला जाएगा।

जनता में बंटा मत

आपको बता दें कि इस फैसले पर लोगों की राय बंटी हुई है। समर्थन में लोग मंदिर की पवित्रता बनाए रखने की बात, और नियम और अनुशासन जरूरी को बता रहे हैं वहीं विरोध में लोग कह रहे हैं क़ि “ईश्वर के द्वार सबके लिए खुले होने चाहिए, आस्था दिल की होती है, कागज की नहीं, धर्म के आधार पर प्रवेश गलत है। वहीं विपक्ष ने कहा कि सियासी लाभ के लिए समाज में जहर फैलाया जा रहा है।

किन मंदिरों पर लागू होगा नियम?

यह नियम केवल बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर समिति के अधीन आने वाले करीब 48 मंदिरों में भी लागू हो सकता है।

कानूनी पहलू:

मंदिर समिति इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले कानूनी विशेषज्ञों की राय ले रही है। श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन "द यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट 1939" के तहत हुआ था। इस कानून के तहत समिति को मंदिर प्रशासन और व्यवस्थाओं से जुड़े नियम बनाने का अधिकार दिया गया है। हालांकि ऐसे नियमों को लागू करने से पहले बायलॉज बनाना, उन्हें प्रकाशित करना और कई मामलों में राज्य सरकार की पुष्टि जैसी प्रक्रियाएं भी जरूरी हो सकती हैं।

बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर मंदिर समिति का यह प्रस्ताव धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में गहमागहमी पैदा कर गया है। एक तरफ जहां समिति इसे परंपरा और पवित्रता से जोड़कर देख रही है, वहीं आम जनता और बुद्धिजीवी इसे आस्था के नाम पर राजनीति करार दे रहे हैं। अब देखना होगा कि कानूनी राय आने के बाद इस प्रस्ताव को क्या रूप मिलता है और क्या वाकई सारा अली खान जैसी हस्तियों को अब बद्री-केदार के दर्शन के लिए हलफनामा देना होगा।

अन्य खबरे